रीवा में राजनीतिक भूचाल! 7 करोड़ के डामरीकरण घोटाले पर महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ के तीखे तेवर से हिला पूरा शहर

 
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रीवा के कांग्रेस महापौर अजय मिश्रा 'बाबा' ने शहर में प्री-मानसून डामरीकरण को 7 करोड़ का घोटाला बताया है। रीवा सड़क भ्रष्टाचार मामला Mayor Ajay Mishra Baba Rewa

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा शहर में सड़क निर्माण और डामरीकरण के कार्यों को लेकर सियासत गरमा गई है। रीवा नगर निगम के कांग्रेस महापौर अजय मिश्रा ‘बाबा’ ने शहर में बरसात से पहले कराए गए डामरीकरण के कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महापौर ने इस पूरे प्रोजेक्ट को लगभग 7 करोड़ रुपए का घोटाला करार दिया है। उनका साफ कहना है कि शहर की जनता को बेहतर बुनियादी ढांचा देने के बजाय इस राशि का दुरुपयोग किया गया है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होना बेहद जरूरी है।

सीमेंट सड़कों पर डामर बिछाने का औचित्य और तकनीकी लापरवाही
महापौर अजय मिश्रा का सबसे बड़ा तकनीकी और प्रशासनिक सवाल यह है कि जब शहर के कई प्रमुख हिस्सों में पहले से ही मजबूत सीमेंट-कंक्रीट (CC) की सड़कें बनी हुई थीं, तो उनके ऊपर दोबारा डामर की परत चढ़ाने की क्या आवश्यकता थी?

तकनीकी रूप से गलत निर्णय: सीमेंट की सतह पर डामर की बॉन्डिंग कमजोर होती है, जिससे वाहन के गुजरने पर डामर आसानी से उखड़ने लगता है।
अनावश्यक खर्च: जिन सड़कों की स्थिति पहले से ठीक थी, वहां केवल कागजी खानापूर्ति कर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए खर्च किए गए।
जल्दबाजी में निर्माण: मानसून आने से ठीक पहले बिना किसी स्पष्ट योजना और तकनीकी जरूरत के यह कार्य करवाया गया।

प्रभावित प्रमुख मार्ग और जनता की परेशानियां
महापौर के मुताबिक रीवा शहर के कई वीवीआईपी और व्यस्त मार्गों पर यह कार्य कराया गया था, जो अब भ्रष्टाचार की पोल खोल रहे हैं। प्रभावित प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं:

  • जयस्तंभ चौक
  • स्टेच्यू चौराहा
  • रीवा फ्लाइओवर
  • छोटीपुल क्षेत्र
  • कॉलेज चौराहा
  • फोर्ट रोड

इन सभी स्थानों पर मानसून की पहली बारिश के बाद ही डामर की ऊपरी परत पूरी तरह से उखड़ गई। इसके परिणामस्वरूप, इन सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और उड़ने वाली धूल व गिट्टी से राहगीरों तथा वाहन चालकों का चलना दूभर हो गया है। जनता को सुविधा मिलने के विपरीत अब उन्हें पहले से भी बदतर और जानलेवा सड़कों का सामना करना पड़ रहा है।

उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
इस पूरे प्रकरण के सामने आने के बाद महापौर ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि डामरीकरण का यह कार्य जनता की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों और एजेंसियों को आर्थिक लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से किया गया था।

कार्यों की उच्च स्तरीय जांच: महापौर ने मांग की है कि पूरे 7 करोड़ रुपए के इस डामरीकरण कार्य की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
स्वीकृति की फाइल तलब: यह पता लगाया जाए कि सीमेंट रोड पर डामर बिछाने का यह प्रस्ताव किसके स्तर पर और किन नियमों के तहत स्वीकृत हुआ था।
एजेंसी और अधिकारियों पर कार्रवाई: इस घटिया निर्माण कार्य को अंजाम देने वाली संबंधित ठेका एजेंसी और इसमें संलिप्त अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

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