रीवा में सियासी बवाल! ‘सुंदर महिला की डेडबॉडी से रेप’ वाले बयान पर सांसद का पलटवार- ‘अभय यौन विकृतियों से पीड़ित’, पहले बैंक में पॉकेटमारी करते थे
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्यप्रदेश के रीवा में इन दिनों राजनीतिक बयानबाजी ने नया मोड़ ले लिया है। संजय गांधी अस्पताल एवं उससे जुड़े पोस्टमॉर्टम प्रकरण को लेकर कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद अब भाजपा के वरिष्ठ नेता और रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने तीखा पलटवार किया है। मामला केवल अस्पताल की व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहा। दोनों पक्षों की बयानबाजी के बाद विवाद सीधे व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गया है। जनार्दन मिश्रा ने अभय मिश्रा के बयान को बेहद आपत्तिजनक बताते हुए उन पर गंभीर टिप्पणी की है।
इस पूरे घटनाक्रम ने रीवा की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस और भाजपा के बीच टकराव को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
जनप्रतिनिधियों की भाषा और जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल
जनता अपने सांसद और विधायक से उम्मीद करती है कि वे सदन से लेकर सड़क तक **मर्यादित भाषा में जनता की समस्याएं उठाएं, व्यवस्था में सुधार के लिए काम करें और अपने पद की गरिमा बनाए रखें।** लेकिन रीवा में जिस तरह एक तरफ विधायक अभय मिश्रा और दूसरी तरफ सांसद जनार्दन मिश्रा के बीच गंभीर व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप सामने आ रहे हैं, उससे असली मुद्दे पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि **जनता के प्रतिनिधि अगर एक-दूसरे पर आरोप लगाने और राजनीतिक बयानबाजी में ही उलझे रहें, तो जनता की समस्याओं और सिस्टम में सुधार की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?** जनता को तमाशा नहीं, अपने जनप्रतिनिधियों से काम, जवाबदेही और समाधान चाहिए।
जनार्दन मिश्रा ने अभय मिश्रा पर क्या कहा?
रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने विधायक अभय मिश्रा के कथित बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह की बात सामान्य व्यक्ति सोच भी नहीं सकता। उन्होंने अभय मिश्रा पर यौन विकृतियों से पीड़ित होने का आरोप लगाया।
सांसद का कहना था कि पोस्टमॉर्टम जैसे संवेदनशील विषय पर इस प्रकार की टिप्पणी बेहद गंभीर है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि विषय इतना संवेदनशील और आपत्तिजनक है कि इस तरह की बात कहना भी मर्यादा के दायरे में नहीं आता।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि सांसद द्वारा लगाए गए ये आरोप उनका राजनीतिक दावा हैं और स्वतंत्र रूप से इनकी पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है।
पोस्टमॉर्टम को लेकर अभय मिश्रा के आरोप क्या थे?
विवाद की शुरुआत कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने रीवा के संजय गांधी अस्पताल की पोस्टमॉर्टम व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल उठाए।
रिपोर्ट के अनुसार, जयस्तंभ चौराहे पर कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन के दौरान अभय मिश्रा ने आरोप लगाया कि यदि किसी सुंदर महिला का शव पोस्टमॉर्टम के लिए संजय गांधी अस्पताल लाया जाता है, तो उसके साथ दुष्कर्म किया जाता है।
उन्होंने पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया के दौरान मृतकों के परिजनों से पैसे लिए जाने के भी आरोप लगाए। ये आरोप बेहद गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे में इनके संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच, पुलिस रिकॉर्ड और संबंधित संस्थानों की प्रतिक्रिया सामने आना महत्वपूर्ण है।
यौन विकृति वाले बयान पर क्यों मचा बवाल?
अभय मिश्रा के कथित बयान के बाद भाजपा नेताओं ने इसे राजनीतिक मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ दिया है।
जनार्दन मिश्रा ने इसी मुद्दे को लेकर विधायक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इस प्रकार की बात कभी नहीं सोची और आरोप लगाया कि ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति सामान्य मानसिकता वाला नहीं हो सकता। राजनीतिक विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोप चाहे किसी भी पक्ष की ओर से लगाए जाएं, उनकी सत्यता की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों या आधिकारिक दस्तावेजों से होना जरूरी है।
डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल के पिता पर टिप्पणी का जवाब
विवाद का एक दूसरा पहलू मध्यप्रदेश के डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल के पिता स्वर्गीय भैयालाल शुक्ल से जुड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अभय मिश्रा ने डिप्टी CM के पिता के व्यवसाय को लेकर टिप्पणी की थी। इसके जवाब में जनार्दन मिश्रा ने भैयालाल शुक्ल का बचाव करते हुए कहा कि यदि उन्होंने कोई व्यवसाय किया भी था तो वह ईमानदारी का व्यवसाय था।
इस बयान के बाद विवाद और अधिक व्यक्तिगत राजनीतिक आरोपों की दिशा में बढ़ गया।
स्टेपनी चोरी और बैंक पॉकेटमारी के दावे पर विवाद
जनार्दन मिश्रा ने अभय मिश्रा के पुराने जीवन को लेकर भी गंभीर दावे किए। उन्होंने आरोप लगाया कि अभय मिश्रा ने कथित तौर पर स्टेपनी चोरी और स्टेट बैंक में पॉकेटमारी से अपना कारोबार शुरू किया था।
सांसद ने यह भी दावा किया कि कभी कोतवाली में अपराधियों की फोटो स्लेट के साथ लगाई जाती थी और लंबे समय तक अभय मिश्रा की फोटो भी वहां लगी रहती थी।
इन दावों को भी सांसद द्वारा लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति के आपराधिक अतीत से संबंधित दावे की पुष्टि के लिए पुलिस रिकॉर्ड, न्यायालयीन दस्तावेज या अन्य आधिकारिक प्रमाण आवश्यक होंगे।
संजय गांधी अस्पताल का मुद्दा अब राजनीतिक बहस क्यों बना?
संजय गांधी अस्पताल रीवा और आसपास के क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण सरकारी चिकित्सा संस्थान है। ऐसे अस्पताल से जुड़ी किसी भी गंभीर शिकायत का सीधा संबंध आम लोगों के भरोसे से होता है।
पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया को लेकर यदि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाते हैं, तो स्वाभाविक रूप से प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से जवाब की अपेक्षा की जाती है।
लेकिन इस मामले में अस्पताल संबंधी आरोपों से आगे बढ़कर नेताओं के बीच व्यक्तिगत बयानबाजी शुरू हो गई है। यही वजह है कि मूल मुद्दे के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी चर्चा में आ गए हैं।
अभय मिश्रा के बयान से कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने
रीवा की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा रही है। ऐसे में अस्पताल जैसा संवेदनशील मुद्दा सामने आने के बाद दोनों दलों के नेताओं की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
एक ओर कांग्रेस विधायक अस्पताल की कथित व्यवस्थाओं और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा नेता उनके बयान को ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है और क्या इस मामले में कोई आधिकारिक जांच होगी?
पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल क्या है?
- इस पूरे मामले में राजनीतिक बयानबाजी से अलग कुछ सीधे सवाल खड़े होते हैं।
- क्या संजय गांधी अस्पताल में पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया को लेकर वास्तव में कोई अनियमितता हुई है?
- क्या मृतकों के परिजनों से कथित रूप से पैसे लिए जाने के आरोपों की जांच होगी?
- क्या अभय मिश्रा के लगाए गए गंभीर आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या शिकायत मौजूद है?
और दूसरी तरफ, जनार्दन मिश्रा द्वारा अभय मिश्रा के पुराने जीवन को लेकर लगाए गए आरोपों का आधिकारिक रिकॉर्ड क्या कहता है?
इन सवालों का जवाब राजनीतिक मंच से नहीं बल्कि आधिकारिक जांच और प्रमाणों से मिलना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
बयानबाजी से आगे जांच की जरूरत
रीवा में इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि संवेदनशील स्वास्थ्य और मृत्यु से जुड़े मामलों पर राजनीतिक बयानबाजी की सीमा क्या होनी चाहिए।
अस्पताल से जुड़े आरोप गंभीर हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं किसी जनप्रतिनिधि पर व्यक्तिगत या आपराधिक आरोप लगाए जाते हैं तो उनके समर्थन में प्रमाण सामने आना भी उतना ही जरूरी है।
जनता के लिए बेहतर यही होगा कि पूरे मामले को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय आधिकारिक जांच, दस्तावेज और तथ्य के आधार पर देखा जाए।
रीवा में अभय मिश्रा बनाम जनार्दन मिश्रा विवाद अब सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रह गया है। संजय गांधी अस्पताल की पोस्टमॉर्टम व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विवाद व्यक्तिगत आरोपों और राजनीतिक पलटवार तक पहुंच चुका है।
जनार्दन मिश्रा ने अभय मिश्रा के बयान को लेकर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी और उन पर गंभीर व्यक्तिगत आरोप लगाए। वहीं विवाद की मूल वजह अभय मिश्रा द्वारा संजय गांधी अस्पताल की पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पर लगाए गए गंभीर आरोप हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग या संबंधित जांच एजेंसियां इस मामले में कोई आधिकारिक कदम उठाती हैं या नहीं।
महत्वपूर्ण: इस रिपोर्ट में नेताओं द्वारा लगाए गए व्यक्तिगत एवं आपराधिक आरोपों को तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया गया है। संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रमाण उपलब्ध होने पर तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है।