"रीवा का 'पावर गेम': वायरल स्कैंडल ने छीनी कुर्सी, डिप्टी सीएम ने अपने करीबियों को दिखाया बाहर का रास्ता

 
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रसूख की चमक फीकी, वायरल स्कैंडल ने छीनी कुर्सी। डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला ने अपने दो सबसे भरोसेमंद सहयोगियों से बनाई दूरी। बंगले से हुई सीधी विदाई।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों खलबली मची हुई है। अमहिया स्थित डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला के आवास और उनके प्रभाव क्षेत्र से दो प्रमुख चेहरों—जिनमें नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय का नाम प्रमुखता से शामिल है—को अब सक्रिय भूमिका से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। लंबे समय से डिप्टी सीएम के नाम पर प्रभाव जमा रहे इन नेताओं का अचानक हाशिए पर चले जाना शहर में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।

विवादों का बवंडर: ऑडियो और वीडियो कांड की पूरी कहानी
इस पूरी कार्रवाई के पीछे महिला से जुड़े गंभीर आरोपों को मुख्य वजह माना जा रहा है। मामले को 'मैनेज' करने की खबरों ने विवाद को और अधिक हवा दे दी। दूसरी ओर, नगर निगम अध्यक्ष व्यंकटेश पाण्डेय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह एक सोशल साइट पर महिला का नंबर मांगते हुए देखे गए। इस तरह के आचरण ने डिप्टी सीएम को काफी असहज कर दिया, क्योंकि वे खुद पर उठ रही अंगुलियों से बचने के लिए बेहद सतर्क हो गए हैं।

एक अन्य मामले में, डिप्टी सीएम के एक पूर्व करीबी सहयोगी के खिलाफ एक महिला ने शिकायत की थी। हालांकि मामले को शुरुआती दौर में दबाने की कोशिश की गई, लेकिन ऑडियो वायरल होने के बाद सच्चाई सामने आ गई। इन घटनाओं ने न केवल डिप्टी सीएम की छवि को प्रभावित किया, बल्कि उन्हें सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर भी कर दिया।

सत्ता के गलियारों में चर्चा: 'दबंगई' और 'अहंकार' का अंत
पिछले कुछ वर्षों में इन लोगों ने डिप्टी सीएम के करीबी होने का पूरा लाभ उठाया था। रीवा ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी इनका प्रभाव बढ़ता जा रहा था। बंगले के बाहर उमड़ने वाली भीड़ और इनका 'दबंग' अंदाज अब बीते दिनों की बात हो गई है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह केवल एक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह एक कड़ा संदेश है कि अनुशासन और मर्यादा के विरुद्ध आचरण करने वालों के लिए सत्ता में अब कोई जगह नहीं है।

अमहिया बंगले पर जो भीड़ कभी इनकी 'आज्ञा' लेने के लिए उमड़ती थी, आज वहां सन्नाटा पसरा है। जिन लोगों ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर अपनी पहुंच बनाई थी, वे अब हाशिए पर हैं।

विपक्ष की चुप्पी और राजनीतिक विश्लेषण
आश्चर्यजनक रूप से, इतने बड़े घटनाक्रम के बाद भी विपक्ष पूरी तरह से खामोश है। न तो कांग्रेस के किसी बड़े विधायक ने और न ही पार्टी के शीर्ष स्तर पर कोई मुखर टिप्पणी की गई है। सिर्फ प्रवक्ता स्तर पर शुरुआती विरोध के बाद मामला शांत हो गया। इस राजनीतिक चुप्पी को भी कई लोग अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुप्पी के पीछे अपनी ही पार्टी के कई नेताओं के 'दागदार' इतिहास होने का डर भी हो सकता है।

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