रीवा की चीखें: कहीं 'रफ्तार' ने कुचला, कहीं 'फंदे' ने ली जान, तो कहीं 'करंट' ने बुझा दिया घर का चिराग!

 
GFHFG
रीवा में सड़क हादसा, छात्र की आत्महत्या और हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से तीन बच्चों ने गंवाई जान। क्या प्रशासन और समाज बच्चों की सुरक्षा में फेल हो चुका है?

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश का रीवा जिला इस वक्त गहरे शोक और सन्नाटे में है। पिछले 24 घंटों के भीतर जिले में तीन ऐसी हृदयविदारक घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने पूरे विंध्य क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। तीन मासूम जिंदगियां, तीन अलग-अलग वजहें, लेकिन दर्द एक—असहनीय! इन घटनाओं ने न केवल प्रशासन की व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है, बल्कि सामाजिक और सुरक्षा ढांचों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

1. रतहरा में मौत की रफ्तार: बहन के सामने भाई ने तोड़ा दम
शहर के समान थाना क्षेत्र अंतर्गत रतहरा में गुरुवार की सुबह किसी ने नहीं सोचा था कि स्कूल की राह श्मशान तक जाएगी। 10 वर्षीय रुद्र त्रिपाठी, जो अपनी बड़ी बहन के साथ हँसते-खेलते स्कूल जा रहा था, उसे एक अनियंत्रित ट्रक ने कुचल दिया।

  • लापरवाही का आलम: तेज रफ्तार ट्रक ने मासूम को रौंदा और फिर डिवाइडर से जा टकराया।
  • सवाल: भीड़भाड़ वाले इलाके में सुबह के वक्त भारी वाहनों की रफ्तार पर अंकुश क्यों नहीं है? क्या पुलिस केवल कागजों पर चेकिंग करती है?

2. वार्ड क्रमांक 5 में सन्नाटा: 7वीं के छात्र ने क्यों चुना मौत का रास्ता?
आत्महत्या की एक ऐसी खबर आई जिसने हर माता-पिता के दिल में खौफ भर दिया है। वार्ड नंबर 5 के रहने वाले कान्हा पुरवार ने स्कूल से लौटने के बाद अपनी माँ के दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

  • खामोश मौत: कान्हा रोज की तरह स्कूल से आया, कपड़े बदले और फिर बिना कुछ कहे यह खौफनाक कदम उठा लिया।
  • गंभीर चिंता: महज 7वीं कक्षा का छात्र इतना बड़ा फैसला कैसे ले सकता है? क्या वह किसी मानसिक दबाव में था या स्कूल में उसके साथ कुछ गलत हुआ था? पुलिस अब इसकी गुत्थी सुलझाने में जुटी है।

3. मकर संक्रांति की खुशियां मातम में बदली: 11 हजार वोल्ट का 'काल'
त्योहार के दिन जब पूरा शहर आसमान में पतंगें देख रहा था, तब बिछिया थाना क्षेत्र की चौरसिया कॉलोनी में एक मां का लाल मौत के करंट से झुलस रहा था। 15 वर्षीय कुश चौरसिया छत पर फंसी पतंग निकालने के चक्कर में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया।

  • हादसे की वजह: लोहे की रॉड जैसे ही 11,000 वोल्ट की लाइन से टकराई, जोरदार ब्लास्ट हुआ और कुश बुरी तरह झुलस गया। संजय गांधी अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
  • सिस्टम का दोष: रिहायशी इलाकों के घरों की छतों के ठीक ऊपर से हाईटेंशन तार गुजरना किसी खुली कब्र से कम नहीं है। बिजली विभाग आखिर इन तारों की शिफ्टिंग क्यों नहीं करता?

प्रशासन और समाज के लिए 3 कड़वे सवाल
ट्रैफिक विभाग से: क्या शहर के भीतर भारी वाहनों की एंट्री और उनकी रफ्तार की निगरानी के लिए सीसीटीवी सिर्फ चालान काटने के लिए हैं, जान बचाने के लिए नहीं?

  • शिक्षा विभाग और अभिभावकों से: क्या हम बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने में विफल हो रहे हैं? छोटी उम्र में आत्महत्या के बढ़ते मामले 'रेड सिग्नल' हैं।
  • बिजली विभाग से: रिहायशी इलाकों में झूलते मौत के तार (High Tension Lines) कब हटाए जाएंगे? क्या विभाग और भी मासूमों की बलि का इंतजार कर रहा है?

निष्कर्ष: लापरवाही की कीमत मासूमों ने चुकाई
रीवा की ये तीनों घटनाएं महज 'दुर्घटनाएं' नहीं हैं। ये हमारे सिस्टम की उस खामी का नतीजा हैं जहाँ नियम सिर्फ कागजों पर चलते हैं। रुद्र, कान्हा और कुश—ये तीन नाम अब केवल पुलिस की फाइल का हिस्सा बनकर रह जाएंगे, लेकिन इनके परिवारों को जो जख्म मिले हैं, उनकी भरपाई नामुमकिन है। प्रशासन को अब 'मर्ग कायम' करने से आगे बढ़कर सख्त एक्शन लेना होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: रीवा सड़क हादसे में आरोपी ट्रक ड्राइवर की क्या स्थिति है? उत्तर: हादसे के बाद आरोपी चालक फरार हो गया है। समान थाना पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और ट्रक को जब्त कर लिया गया है।
प्रश्न 2: क्या छात्र कान्हा पुरवार के पास से कोई सुसाइड नोट मिला? उत्तर: प्रारंभिक जांच में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस पारिवारिक स्थिति और स्कूल के माहौल की जांच कर रही है।
प्रश्न 3: हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने पर तत्काल क्या करना चाहिए? उत्तर: सबसे पहले लकड़ी की मदद से पीड़ित को तार से दूर करें (खुद को बचाते हुए) और बिना देरी किए अस्पताल पहुँचाएँ। हालांकि, हाईटेंशन लाइन के मामले में बचाव की संभावना कम होती है, इसलिए सावधानी ही एकमात्र सुरक्षा है।

Related Topics

Latest News