"Exclusive: रीवा में आम आदमी पार्टी का अंदरूनी कलह उजागर, जिला अध्यक्ष और प्रदेश प्रवक्ता के इस्तीफे से हिला संगठन"

 
fbcvb
रीवा में आम आदमी पार्टी में मची भगदड़; जिला अध्यक्ष शेरा सिंह और प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद शर्मा ने दिया इस्तीफा। जानें विंध्य की राजनीति का पूरा समीकरण।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही आम आदमी पार्टी (AAP) को रीवा जिले में एक के बाद एक दो करारे झटके लगे हैं। पिछले 24 घंटों के भीतर पार्टी के दो कद्दावर नेताओं ने अपने पदों से त्यागपत्र दे दिया है, जिससे संगठन के भीतर खलबली मच गई है। पहले जिला अध्यक्ष (शहरी) शेरा सिंह और अब प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद कुमार शर्मा के इस्तीफे ने पार्टी की रणनीतियों पर पानी फेर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पार्टी आगामी स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर अपनी पैठ मजबूत करने का दावा कर रही थी।

प्रमोद शर्मा का इस्तीफा: जिम्मेदारी मिलने के तुरंत बाद बड़ा फैसला
रीवा के निवासी और तेजतर्रार नेता प्रमोद कुमार शर्मा को हाल ही में पार्टी आलाकमान ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी। उन्हें मध्य प्रदेश का प्रदेश प्रवक्ता नियुक्त किया गया था। उम्मीद जताई जा रही थी कि उनके अनुभव से पार्टी को मीडिया और जनता के बीच बेहतर माइलेज मिलेगा। लेकिन नियुक्ति के कुछ ही समय बाद उनके इस्तीफे ने सबको चौंका दिया है।

प्रमोद शर्मा ने अपने त्यागपत्र में 'व्यक्तिगत कारणों' का हवाला दिया है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संगठन के भीतर तालमेल की कमी इस फैसले की मुख्य वजह हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ईमानदारी और पारदर्शिता की राजनीति के समर्थक रहे हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वे अपनी जिम्मेदारी निभाने में असमर्थ हैं।

जिला अध्यक्ष शेरा सिंह की रवानगी: संकट की पहली आहट
इस राजनीतिक भूकंप की शुरुआत शुक्रवार शाम को हुई जब आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष (शहरी) एडवोकेट राजीव सिंह परिहार, जिन्हें क्षेत्र में 'शेरा सिंह' के नाम से जाना जाता है, ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। शेरा सिंह ने अपना पत्र प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह तोमर को भेजा है। शेरा सिंह पार्टी के पुराने और वफादार सिपाही माने जाते थे। उनके जाने से कार्यकर्ताओं के मनोबल पर गहरा असर पड़ा है।

इस्तीफों के पीछे की असली वजह: क्या यह आपसी गुटबाजी है?
सवाल यह उठता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि एक के बाद एक दो बड़े नेताओं ने साथ छोड़ दिया? रीवा की राजनीति को करीब से देखने वालों का मानना है कि इसके पीछे तीन मुख्य कारण हो सकते हैं:

  • अंदरूनी कलह: पार्टी के स्थानीय नेतृत्व और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के बीच सामंजस्य की भारी कमी।
  • उपेक्षा का भाव: पुराने कार्यकर्ताओं को लग रहा है कि नए विस्तार में उनकी राय को तवज्जो नहीं दी जा रही है।
  • रणनीतिक मतभेद: विंध्य क्षेत्र में पार्टी जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, उससे स्थानीय नेता सहमत नहीं दिख रहे हैं।

विंध्य क्षेत्र में आम आदमी पार्टी का भविष्य और चुनौतियां
विंध्य हमेशा से ही तीसरे विकल्प की तलाश में रहता है। आम आदमी पार्टी ने सिंगरौली नगर निगम चुनाव में जीत दर्ज कर एक उम्मीद जगाई थी। रीवा, जो विंध्य का केंद्र है, वहां पार्टी का इस तरह बिखरना भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। यदि बड़े नेता ही पार्टी छोड़ देंगे, तो जनता के बीच 'विकल्प' बनने का दावा कमजोर पड़ जाएगा।

कार्यकर्ताओं में मायूसी: संगठन की नींव पर सवाल
नेताओं के इस्तीफे का सबसे बुरा असर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं पर पड़ता है। रीवा में पार्टी के समर्थक अब इस ऊहापोह में हैं कि आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा कौन तैयार करेगा। संगठन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर क्यों नियुक्तियों के तुरंत बाद इस्तीफों का दौर शुरू हो गया।

क्या पार्टी कर पाएगी डैमेज कंट्रोल?
अब गेंद आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पाले में है। क्या वे प्रमोद शर्मा और शेरा सिंह जैसे नेताओं को मना पाएंगे? या फिर नए चेहरों के साथ संगठन को दोबारा खड़ा करने की कोशिश करेंगे? फिलहाल, रीवा की राजनीति में 'आप' बैकफुट पर नजर आ रही है और विरोधियों के लिए यह एक सुनहरा मौका बन गया है।

Related Topics

Latest News