"अमहिया रोड का 'ऑपरेशन क्लीन': व्यापारियों में हड़कंप, 200 दुकानों के अस्तित्व पर संकट! निगमायुक्त का सीधा अल्टीमेटम- खुद हटाओ कब्जा वरना चलेगा निगम का पंजा
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर की धड़कन कहे जाने वाले अमहिया मार्ग की सूरत अब पूरी तरह बदलने वाली है। शहर के मास्टर प्लान को जमीन पर उतारने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। लंबे समय से ट्रैफिक जाम और अतिक्रमण की मार झेल रहे इस मार्ग को अब 'फोरलेन' जैसी भव्यता देने की तैयारी है। लेकिन इस विकास की कीमत सड़क किनारे दशकों से व्यापार कर रहे 200 दुकानदारों को चुकानी पड़ सकती है।
200 दुकानों पर संकट: निगमायुक्त की अंतिम चेतावनी
नगर निगम आयुक्त डॉ. सौरभ सोनावणे और एडिशनल एसपी अनुराग द्विवेदी ने मंगलवार को भारी पुलिस बल के साथ अमहिया मार्ग का सघन निरीक्षण किया। अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि सड़क की जमीन पर एक इंच का भी कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सर्वे के मुताबिक, लगभग 200 दुकानें और मकान इस चौड़ीकरण की जद में आ रहे हैं। प्रशासन ने व्यापारियों को दो-टूक शब्दों में 'अंतिम मोहलत' देते हुए कहा है कि वे स्वयं अपना अतिक्रमण हटा लें, अन्यथा निगम का बुलडोजर बिना किसी रियायत के चलेगा।
जाम से मुक्ति या व्यापारियों की बर्बादी? प्रशासन का बड़ा तर्क
अमहिया मार्ग केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि यह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, संजय गांधी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज को जोड़ने वाली लाइफलाइन है। यहाँ हर मिनट एम्बुलेंस और गंभीर मरीजों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन बेतरतीब अतिक्रमण और संकरी सड़क के कारण यहाँ घंटों जाम लगा रहता है। प्रशासन का तर्क है कि शहर के व्यापक हित और मरीजों की जान बचाने के लिए सड़क का चौड़ा होना अनिवार्य है।
सिरमौर चौक से अस्पताल तक 'सर्जिकल स्ट्राइक' की तैयारी
निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि सिरमौर चौक से लेकर अस्पताल चौक और गलगोंडी मोड़ तक सबसे बुरा हाल है। कई रसूखदारों और व्यापारियों ने 8 से 10 फीट तक सड़क दबा रखी है। दुकानों के शेड और पक्के निर्माण सड़क के बीचों-बीच आ चुके हैं। निगमायुक्त ने स्पष्ट किया है कि अमहिया नाले से लेकर हाईवे से जुड़े हर उस हिस्से को मुक्त कराया जाएगा जहाँ सड़क की चौड़ाई मास्टर प्लान के अनुरूप नहीं है।
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट: व्यापारियों में खौफ और सहमति का मिला-जुला असर
Dainik Rewa News Media की टीम ने जब व्यापारियों से बात की, तो माहौल में तनाव और मजबूरी दोनों दिखी। कुछ व्यापारियों ने शहर के विकास के लिए खुद ही शेड हटाने की सहमति दी है, तो वहीं छोटे दुकानदारों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। उनका कहना है कि व्यापार पहले से मंदा है और अब दुकान टूटने से उनकी रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा। हालांकि, प्रशासन का रुख इस बार काफी सख्त नजर आ रहा है और किसी भी राजनीतिक दबाव के आगे झुकने के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
क्या बदलेगी रीवा की सूरत?
अमहिया मार्ग का चौड़ीकरण रीवा के आधुनिक स्वरूप के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यदि प्रशासन बिना किसी भेदभाव के यह कार्रवाई पूरी करता है, तो निश्चित रूप से शहरवासियों को ट्रैफिक के नरक से मुक्ति मिलेगी। अब देखना यह है कि नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद निगम का 'पीला पंजा' कितनी तेजी से चलता है।