करोड़ों की सरकारी जमीन और जनता का टैक्स... फिर भी अटल पार्क में घूमने के लिए क्यों दें पैसे? रीवा में मचा भारी आक्रोश!  5 साल के लिए हुआ करोड़ों का सौदा

 
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10 एकड़ में फैला सरकारी पार्क अब निजी हाथों में; 1 मार्च से शुरू होगी टिकट प्रणाली, सुबह टहलने वालों को बाहर निकाला।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। रीवा वासियों के लिए फुर्सत के पल बिताने और सुबह की ताजी हवा लेने का सबसे बड़ा ठिकाना अब 'महंगा' होने जा रहा है। सिविल लाइन स्थित शहर का सबसे बड़ा अटल पार्क अब सरकारी नहीं, बल्कि निजी हाथों की कठपुतली बन चुका है। पुर्नघनत्वीकरण योजना के तहत करोड़ों की सरकारी जमीन और जनता के टैक्स के पैसे से बने इस पार्क का संचालन अब एक प्राइवेट फर्म करेगी।

1 मार्च से लगेगा 'एंट्री टैक्स': जेब पर पड़ेगा बोझ
नगर निगम ने पार्क के रखरखाव और संचालन का जिम्मा स्काईलार्क कंपनी को सौंप दिया है। कंपनी और निगम के बीच 5 साल के लिए 5 करोड़ 21 लाख 5 हजार रुपये का अनुबंध हुआ है। कंपनी इस बड़ी राशि की भरपाई अब सीधे जनता की जेब से करेगी। 1 मार्च से पार्क में प्रवेश के लिए हर व्यक्ति को टिकट लेनी होगी।

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महज 5 हजार की अतिरिक्त बोली पर हुआ 'सौदा'
हैरानी की बात यह है कि इस बेशकीमती पार्क का ठेका बहुत ही मामूली अंतर से दिया गया। पहली टेंडर प्रक्रिया में अधिकतम बोली 5.21 करोड़ रुपये लगी थी, लेकिन वह निरस्त हो गई। दोबारा हुई टेंडरिंग में ऐश्वर्य सिंह परिहार के स्वामित्व वाली स्काईलार्क कंपनी ने पिछली बोली से महज 5 हजार रुपये अधिक का दांव खेलकर इस 10 एकड़ के पार्क पर 5 साल का अधिकार हासिल कर लिया।

सड़कों पर लौटे सैर सपाटा करने वाले लोग
पार्क के निजी हाथों में जाते ही अव्यवस्थाएं शुरू हो गई हैं। सुबह टहलने आने वाले नागरिकों का कहना है कि सुबह 8 बजते ही कर्मचारियों द्वारा उन्हें पार्क से बाहर निकाला जा रहा है। आलम यह है कि जो लोग सुकून से एक्सरसाइज करने आते थे, वे अब वापस सर्किट हाउस मार्ग, विवेकानंद पार्क और कॉलेज रोड की सड़कों पर टहलने को मजबूर हैं। पार्क की सुरक्षा और शांति अब व्यावसायिक लाभ की भेंट चढ़ गई है।

जनता में आक्रोश: "जमीन हमारी, पार्क हमारा, तो फीस क्यों?"
रीवा की जनता इस फैसले से खुद को ठगा महसूस कर रही है। लोगों का तर्क है कि सरकारी बंगले तोड़कर और सरकारी जमीन कुर्बान कर यह पार्क जनता की सुविधा के लिए बनाया गया था। अब इसे भी ठेके पर दे दिया गया, तो आम आदमी के लिए क्या बचा? सुबह की सैर पर निकले लोगों ने स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया है।

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