रीवा के भगवती अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड ठुकराया, 7 लाख वसूले और अब परिजनों से मांगी एक-एक किडनी, बोले- अस्पताल में करो झाड़ू-पोंछा!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र का सबसे बड़ा जिला कहा जाने वाला रीवा इन दिनों लगातार स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और प्राइवेट अस्पतालों की बेलगाम मनमानी के कारण सुर्खियों में बना हुआ है। शहर की चिकित्सा व्यवस्था पर से आम जनता का भरोसा लगातार उठता जा रहा है। हाल ही में एक महिला मरीज की मौत के मामले से उभरा आक्रोश अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि उससे भी अधिक चौंकाने वाला और अमानवीय प्रकरण सामने आ गया है। पीटीएस चौक के पास स्थित भगवती अस्पताल एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। इस निजी अस्पताल के एक चिकित्सक पर आरोप लगा है कि उन्होंने इलाज का पूरा भुगतान न कर पाने की स्थिति में मरीज के परिजनों से उनके शरीर के अंग यानी किडनी की मांग कर डाली। इस सनसनीखेज घटना ने पूरे प्रदेश के चिकित्सा जगत को झकझोर कर रख दिया है और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
मरीज के परिजनों से पैसे के बदले एक-एक किडनी मांगने का आरोप
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए मरीज को इलाज के लिए भगवती अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मरीज के साथ अस्पताल में उसके परिजन, मामा और भांजा लगातार देखभाल के लिए मौजूद रहे। इलाज के नाम पर अस्पताल प्रबंधन द्वारा भारी-भरकम बिल बनाया गया। पीड़ित परिजनों के अनुसार वे अब तक विभिन्न माध्यमों से लगभग 7 लाख 61 हजार से अधिक की रकम अस्पताल को चुका चुके हैं, जिसमें शासन स्तर से मिली कुछ आर्थिक सहायता भी शामिल है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन द्वारा चार लाख तीस हजार रुपये की अतिरिक्त राशि की मांग की जा रही है। जब गरीब परिजन इतनी बड़ी रकम चुकाने में असमर्थता जताने लगे, तो अस्पताल के संचालक एवं चिकित्सक डॉ. दिनेश पटेल ने सारी सीमाओं को लांघते हुए एक अमानवीय प्रस्ताव रख दिया। आरोप है कि डॉक्टर ने परिजनों से कहा कि यदि वे पैसे नहीं दे सकते हैं, तो वे अपनी एक-एक किडनी दान कर दें ताकि पैसों की भरपाई की जा सके।
अस्पताल में झाड़ू-पोंछा लगाने और कर्मचारियों को हटाने की धमकी का वायरल ऑडियो
इस पूरे सनसनीखेज मामले का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर डॉक्टर और परिजनों के बीच हुई बातचीत की भयावह सच्चाई सामने आ रही है। ऑडियो में स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है कि किस तरह डॉक्टर द्वारा पैसों के लिए मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है। डॉक्टर ने न केवल अंगों की मांग की, बल्कि यह तक कह दिया कि वे अस्पताल के मौजूदा सफाई कर्मचारियों को नौकरी से हटा देंगे और मरीज के परिवार के लोग ही अब अस्पताल में झाड़ू-पोंछा लगाएंगे। इस प्रकार की भाषा और धमकियों ने यह साबित कर दिया है कि कुछ निजी क्लीनिकों और अस्पतालों में मरीजों की जान और उनकी गरिमा का कोई मूल्य नहीं बचा है, बल्कि उन्हें केवल मुनाफे का साधन समझा जा रहा है। यह ऑडियो सामने आने के बाद रीवा के नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है।
आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद इलाज के नाम पर भारी भरकम वसूली और कैद जैसी स्थिति
पीड़ित परिजनों ने मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने यह भी खुलासा किया कि उनके पास आयुष्मान कार्ड उपलब्ध था, जिसके माध्यम से वे सरकारी योजना का लाभ ले सकते थे, परंतु भगवती अस्पताल के प्रबंधकों ने किसी भी स्थिति में आयुष्मान कार्ड स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। इसके कारण गरीब परिवार को निजी स्रोतों से कर्ज लेकर पैसा जुटाना पड़ा। जब वे पूरी तरह कंगाल हो गए और शेष राशि देने में असमर्थ हो गए, तो अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को डिस्चार्ज करने से ही मना कर दिया। मरीज को जबरन अस्पताल के कमरे में रोककर रखा गया, जिसे एक प्रकार से बंधक बनाए जाने जैसा कृत्य माना जा रहा है। डॉक्टर और प्रबंधन द्वारा लगातार बनाए जा रहे मानसिक दबाव के कारण परिजन पूरी तरह टूट चुके हैं।
कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में पीड़ित परिजनों की गुहार और प्रशासनिक जांच
इस अमानवीयता और प्रताड़ना से त्रस्त होकर पीड़ित परिजन मंगलवार को सीधे रीवा कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता श्रीलाल सोंधिया ने विस्तार से पूरी आपबीती अधिकारियों को सुनाई और वायरल ऑडियो के साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार डॉ. दिनेश पटेल ने उन्हें अपने पास बुलाकर किडनी की मांग की और अस्पताल में मजदूरी करने की बात कही। परिजनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे बेलगाम और संवेदनहीन डॉक्टर के खिलाफ तुरंत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए, अस्पताल का लाइसेंस रद्द किया जाए और उनके मरीज को सुरक्षित बाहर निकालकर उचित सरकारी अस्पताल में इलाज दिलाया जाए। प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठते बड़े सवाल और जनता में आक्रोश
इस घटना के सामने आने के बाद रीवा की स्थानीय जनता और सामाजिक संगठनों में जबरदस्त गुस्सा देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि शहर के बड़े सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में पदस्थ डॉक्टर यदि अपने निजी अस्पतालों में इस तरह की अवैध वसूली, धमकियां और अंगों की मांग करने लगेंगे, तो आम और गरीब आदमी का इस दुनिया में कोई रखवाला नहीं बचेगा। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस तरह के नर्सिंग होम बिना किसी डर के कैसे संचालित हो रहे हैं। जनता अब मांग कर रही है कि इस मामले में लीपापोती करने के बजाय दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी चिकित्सक इस तरह की घिनौनी हरकत करने की हिम्मत न जुटा सके।