रीवा में खाकी का खौफ खत्म! बिछिया में खुलेआम चल रहा सट्टे का 'बाजार', आखिर थाना प्रभारी क्यों हैं मेहरबान?

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा। विंध्य की राजधानी कहे जाने वाले रीवा शहर में इन दिनों अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। सुशासन और जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली रीवा पुलिस के दावों की हवा बिछिया थाना क्षेत्र से आए एक वीडियो ने निकाल दी है। इस वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी अब पुलिस से डरते नहीं, बल्कि शायद उनकी छत्रछाया में अपना काला साम्राज्य फैला रहे हैं।

बिछिया थाना अंतर्गत अहिरान टोला क्षेत्र में इन दिनों सट्टे का कारोबार किसी किराना दुकान की तरह खुलेआम संचालित हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में एक व्यक्ति, जिसकी पहचान स्थानीय लोगों ने झल्लू यादव के रूप में की है, बेखौफ होकर लोगों के बीच सट्टे की पर्चियां काट रहा है और रुपयों का लेन-देन कर रहा है।

अहिरान टोला बना अवैध गतिविधियों का केंद्र
स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि अहिरान टोला इलाका अब सट्टेबाजों की सुरक्षित शरणस्थली बन चुका है। यहां सुबह से लेकर देर रात तक संदिग्धों का जमावड़ा लगा रहता है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे बिना किसी डर के सट्टे का नेटवर्क चलाया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि जिस इलाके में परिंदा भी पर मारने से पहले पुलिस की नजर में होना चाहिए, वहां इतना बड़ा सिंडिकेट कैसे फल-फूल रहा है?

थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली के घेरे में: क्या पुलिस की मिलीभगत है?
एक बड़ा सवाल बिछिया थाना प्रभारी की कार्यक्षमता पर खड़ा होता है। कानूनन, थाना क्षेत्र के भीतर होने वाली हर अवैध गतिविधि की जिम्मेदारी सीधे तौर पर थाना प्रभारी की होती है।

  • क्या थाना प्रभारी को जानकारी नहीं है? यदि नहीं, तो यह उनकी खुफिया विफलता  है।
  • क्या जानकारी होने के बाद भी चुप्पी साधी गई है? यदि हां, तो यह भ्रष्टाचार और अपराधियों को संरक्षण देने का सीधा मामला प्रतीत होता है।

क्षेत्र की जनता अब सीधे तौर पर पुलिस की नीयत पर शक कर रही है। लोगों का कहना है कि बिना "ऊपरी आशीर्वाद" के कोई भी व्यक्ति बीच सड़क पर बैठकर सट्टा नहीं चला सकता। आखिर थाना प्रभारी इस खुलेआम चल रहे अवैध धंधे पर बुलडोजर क्यों नहीं चला रहे?

युवाओं का भविष्य दांव पर, समाज में बढ़ रहा अपराध
सट्टे का यह धीमा जहर रीवा के युवाओं की नसों में घोला जा रहा है। अहिरान टोला और आसपास के मोहल्लों के दिहाड़ी मजदूर और कम उम्र के लड़के अपनी मेहनत की कमाई इस जुए में गंवा रहे हैं। जब जेब खाली होती है, तो यही युवा चोरी और लूट जैसी वारदातों को अंजाम देते हैं। बिछिया पुलिस की यह लापरवाही केवल एक 'जुए' का मामला नहीं है, बल्कि यह भविष्य के अपराधियों की पौध तैयार करने जैसा है।

Rewa News Media की तीखी मांग
हम प्रशासन और रीवा पुलिस अधीक्षक से मांग करते हैं कि केवल छोटे प्यादों पर कार्रवाई कर खानापूर्ति न की जाए। बिछिया थाना प्रभारी की भूमिका की जांच हो और दोषी सटोरियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाए। अगर पुलिस सक्रिय होती, तो आज यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होकर खाकी की किरकिरी नहीं करा रहा होता।

अब कार्रवाई का इंतजार
वीडियो साक्ष्य के रूप में पूरे शहर के सामने है। अब देखना यह है कि रीवा पुलिस इस "खुले चैलेंज" को कैसे स्वीकार करती है। क्या झल्लू यादव जैसे गुर्गों पर शिकंजा कसा जाएगा या फिर कागजी कार्रवाई कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

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