रसूख पर भारी पड़ा कानून: सेमरिया में अवैध माइनिंग करते पकड़ी गई BJP विधायक की कंपनी, SDM की रिपोर्ट से मचेगा हड़कंप
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां रसूखदार राजनीतिज्ञ और खनिज कारोबारी संजय पाठक की कंपनियों पर अवैध उत्खनन के गंभीर आरोप लगे हैं। कटनी से लेकर हाईकोर्ट तक चर्चा में रहने वाले विधायक अब विंध्य के रीवा क्षेत्र में भी प्रशासनिक जांच के दायरे में आ गए हैं। जिले के सेमरिया विधानसभा क्षेत्र के उत्तरी इलाकों में संचालित माइनिंग साइट्स पर तहसीलदार और खनिज विभाग की टीम ने औचक निरीक्षण किया, जिसमें प्रथम दृष्टया भारी अनियमितताएं और लीज क्षेत्र के बाहर खुदाई के प्रमाण मिले हैं।

सायना स्टील और एमपी मिनरल के खिलाफ शिकायत: क्या है पूरा मामला?
रीवा जिले की ग्राम पंचायत देवगांव के अंतर्गत आने वाले ग्राम चित्ती और सलैया में दो प्रमुख कंपनियां—'सायना स्टील प्राइवेट लिमिटेड' और 'एमपी मिनरल प्राइवेट लिमिटेड'—लेटराइट (Laterite) के उत्खनन का कार्य कर रही हैं।
- नियमों का उल्लंघन: शुरुआती जांच में यह पाया गया है कि कंपनियों को जितनी जमीन लीज पर दी गई थी, उन्होंने उस सीमा को लांघकर सरकारी और निजी क्षेत्र की अन्य जमीनों पर भी खुदाई शुरू कर दी।
- बस्ती के करीब खतरा: माइनिंग नियमों के अनुसार, किसी भी रिहायशी बस्ती से कम से कम 200 मीटर की दूरी तक उत्खनन प्रतिबंधित है। लेकिन यहाँ आरोप है कि विधायक की कंपनी ने रिहायशी इलाकों के ठीक बगल में माइनिंग कर ग्रामीणों के जीवन और घरों को खतरे में डाल दिया है।

पूर्व सरपंच ने खोली पोल: जान से मारने की धमकी और अवैध माइनिंग के आरोप
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम दुवारी के पूर्व सरपंच रघुनंदन कोल ने हिम्मत दिखाते हुए सिरमौर एसडीएम दृष्टि जायसवाल के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के मुख्य बिंदु: रघुनंदन कोल ने न केवल अवैध माइनिंग का मुद्दा उठाया, बल्कि यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस अवैध कार्य को रोकने की कोशिश की, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई।
प्रशासनिक संज्ञान: एसडीएम सिरमौर ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक संयुक्त जांच टीम का गठन किया और मौके पर जाकर स्थल निरीक्षण के आदेश दिए।
तहसीलदार और खनिज निरीक्षक की छापेमारी: मौके पर मिले अवैध उत्खनन के साक्ष्य
गुरुवार को एसडीएम के निर्देश पर सेमरिया तहसीलदार राजेश तिवारी और खनिज निरीक्षक वीर सिंह ने भारी पुलिस बल और शिकायतकर्ता की मौजूदगी में प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। टीम ने ग्राम सलैया, चित्ती, कुम्हरा, जुड़वानी और डोंगरिहा में चल रही खदानों का बारीकी से निरीक्षण किया।
- पंचनामा तैयार: जांच के दौरान टीम ने पाया कि उत्खनन लीज क्षेत्र से काफी आगे निकल चुका था। अधिकारियों ने तत्काल मौके पर पंचनामा तैयार किया और उपलब्ध साक्ष्यों को जब्त किया।
- नोटिस जारी: प्रशासन ने दोनों लीज धारक कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनकी 'प्रोजेक्ट रिपोर्ट' तलब की है। रिपोर्ट के मिलान के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि कुल कितनी मात्रा में और कितने क्षेत्रफल में अवैध उत्खनन किया गया है।
ग्रामीणों में आक्रोश: धूल और धमाकों से बेहाल हुआ जनजीवन
अवैध माइनिंग का असर केवल कागजों तक सीमित नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि खदानों में होने वाले भारी ब्लास्टिंग और दिन-रात चलने वाले डंपरों के कारण क्षेत्र में धूल का गुबार छाया रहता है। घरों की दीवारों में दरारें आ रही हैं और खेती की जमीन बंजर होती जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल जुर्माना लगाकर मामले को रफा-दफा न किया जाए, बल्कि अवैध माइनिंग को पूरी तरह बंद कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

आगे की राह: एसडीएम के माध्यम से कलेक्टर तक पहुँचेगी रिपोर्ट
तहसीलदार द्वारा तैयार की गई प्रारंभिक रिपोर्ट अब सिरमौर एसडीएम के पास भेजी जाएगी। एसडीएम इस रिपोर्ट की समीक्षा कर अपना अभिमत रीवा कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। चूंकि यह मामला एक वर्तमान विधायक की कंपनी से जुड़ा है, इसलिए पूरे जिले की निगाहें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। राजनीतिक हलकों में भी इस कार्रवाई को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है।
कानून से ऊपर कोई नहीं
रीवा में हुई यह कार्रवाई एक संदेश है कि चाहे कितना भी बड़ा रसूख क्यों न हो, प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नियमों के विरुद्ध जाकर नहीं किया जा सकता। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती से जुर्माना वसूलता है और क्या अवैध माइनिंग को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।