MPRDC और KCC की लामबंदी ने शहर की सड़कों को बनाया नरक, केसीसी कंपनी का घटिया काम छिपाने के लिए बायपास को बनाया बंधक, 10 दिन का काम 38 दिन में भी अधूरा

 
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बीहर पुल की मरम्मत में जानबूझकर देरी, 38 दिन से शहर में भारी वाहनों का तांडव। कंपनी के फायदे के लिए बढ़ाई डेडलाइन।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर की सड़कें इस वक्त भ्रष्टाचार और लापरवाही के बोझ तले कराह रही हैं। जो काम मात्र 10 दिनों में पूरा हो सकता था, उसे 38 दिनों से खींचा जा रहा है। आरोप है कि मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) के अधिकारियों ने KCC कंपनी के साथ मिलकर एक ऐसा 'सिंडिकेट' बना लिया है, जिसने पूरे रीवा की जान जोखिम में डाल दी है। बीहर पुल का आवागमन बंद कर कंपनी को फायदा पहुँचाने का यह खेल अब जनता के सामने बेनकाब हो चुका है।

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10 दिन का काम और 38 दिन की 'साजिश': आखिर पुल क्यों नहीं हुआ शुरू?
बीहर पुल का बेयरिंग क्षतिग्रस्त होने के बाद आवागमन रोक दिया गया था। कायदे से इसे चंद दिनों में दुरुस्त किया जा सकता था, लेकिन MPRDC ने दिल्ली की कंपनी को हायर करने की लंबी और थकाऊ प्रक्रिया अपनाई। हैरानी की बात यह है कि बगल में ही KCC कंपनी नया पुल बना रही है, जिसके पास बेयरिंग और गर्डर उठाने के लिए भारी-भरकम क्रेनें पहले से मौजूद थीं। यदि विभाग चाहता तो KCC से काम कराकर 10 दिन में पुल चालू करा सकता था, लेकिन जानबूझकर 'डेडलाइन' बढ़ाई गई।

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कंपनी को फायदा पहुँचाने का 'मास्टर प्लान': क्या छिपाई जा रही है निर्माण की पोल?
इस देरी के पीछे एक बड़ा कारण बायपास सड़क चौड़ीकरण का कार्य है। बायपास पर भारी वाहनों के चलने से KCC कंपनी के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की पोल खुल रही थी। सड़कें गुणवत्ताहीन बन रही थीं और भारी ट्रैफिक के कारण कंपनी को काम करने में दिक्कत हो रही थी। इसी बाधा को हटाने के लिए पुल की मरम्मत का बहाना बनाकर बायपास का रास्ता बंद कर दिया गया, ताकि कंपनी शांति से अपना अधूरा और घटिया काम निपटा सके।

शहर की सड़कों का 'जनाजा': करोड़ों का नुकसान और जनता परेशान
बायपास बंद होने के कारण अब दिन-रात भारी ट्रक, हाइवा और केसीसी कंपनी के ट्रेलर शहर के बीचों-बीच से गुजर रहे हैं। इसके परिणाम स्वरूप:

  • शहर की करोड़ों रुपये की लागत से बनी सड़कें उखड़कर बर्बाद हो गई हैं।
  • गिट्टी, डस्ट और मलबे से लदे वाहनों के कारण शहर में धूल और प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है।
  • आम नागरिकों के लिए सड़क पर चलना जानलेवा साबित हो रहा है, क्योंकि भारी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

MPRDC की 'मेहरबानी': जनता की सजा और कंपनी का मजा
यह पहली बार नहीं है जब किसी सरकारी विभाग ने निजी कंपनी के आगे घुटने टेके हों, लेकिन रीवा में यह साठगांठ खुलेआम दिख रही है। पुल चालू होने का समय आते ही नई तकनीकी खराबी का बहाना बना दिया जाता है। अधिकारी एसी दफ्तरों में बैठकर फाइलों का खेल खेल रहे हैं, जबकि शहर की जनता टूटी सड़कों और जाम के नर्क में जीने को मजबूर है।

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