नौनिहालो के निवाले पर डाका डालने वाले सेंट्रल किचन रीवा पर विभाग मेहरबान, शिक्षा विभाग एवं जिला पंचायत के आला अधिकारी की मिली भगत से प्रति माह लाखों का गोलमाल

 
gvhgh

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। सफेद शेरों की धरती अब उन 'आदमखोरों' का अड्डा बन गई है जो मासूम बच्चों के निवाले पर डाका डाल रहे हैं। रीवा शहर के स्कूलों में मध्याह्न भोजन सप्लाई करने वाला सेंट्रल किचन आज की तारीख में भ्रष्टाचार, संवेदनहीनता और कमीशनखोरी की सबसे बड़ी प्रयोगशाला बन चुका है। यहाँ परीक्षाओं और फंड का फर्जी रोना रोकर बच्चों को भूखा मारा जा रहा है, जबकि शिक्षा विभाग और जिला पंचायत के 'सफेदपोश' अधिकारी इस महापाप में बराबर के भागीदार बने हुए हैं।

लाखों का गोलमाल: 'एसी' कमरों में बैठकर बंट रहा है बच्चों का राशन
अंदरुनी सूत्रों का दावा है कि सेंट्रल किचन के ठेकेदार और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के बीच प्रति माह लाखों रुपये का लेन-देन होता है। यही वजह है कि रीवा कलेक्टर की नाक के नीचे चल रहे इस काले खेल पर आज तक कोई बड़ा एक्शन नहीं हुआ। अधिकारी सिर्फ कागजों पर 'सब ठीक है' की मुहर लगाकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, जबकि हकीकत में गरीब बच्चों की थाली से दाल-रोटी गायब है।

संवेदनहीनता की पराकाष्ठा: "बच्चे नहीं आए तो क्या पशुओं को खिलाएं?"
हैरानी तो तब होती है जब अपनी नाकामी छिपाने के लिए ये लोग तर्क देते हैं कि "बच्चे नहीं आए तो खाना क्या पशुओं को खिलाएं?"। यह बयान रीवा के समूचे प्रशासनिक तंत्र के मुँह पर तमाचा है। यह सवाल उन अधिकारियों से है जो मॉनिटरिंग के नाम पर सरकारी गाड़ियों में घूमते हैं— क्या आपको बच्चों और पशुओं के बीच का फर्क नहीं पता, या भ्रष्टाचार के पैसे ने आपकी संवेदनाएं मार दी हैं?

जहर जैसा खाना: दाल नहीं, पीला पानी और कच्ची रोटियां
अभिभावकों का गुस्सा अब फूटने लगा है। सेंट्रल किचन से आने वाला खाना किसी 'जहर' से कम नहीं है:

  • मेनू की धज्जियां: शासन की मीनू डायरी यहाँ कूड़े के ढेर में पड़ी है। बच्चों को कभी भरपेट और पोषणयुक्त खाना नहीं मिला।
  • फ्रॉड की हद: दाल के नाम पर हल्दी वाला पीला पानी और अधपकी रोटियां परोसी जा रही हैं।
  • भूख से बेहाल नौनिहाल: कक्षा 6वीं और 7वीं के छात्र स्कूल में पढ़ाई के बजाय भूख से तड़प रहे हैं। मध्याह्न भोजन प्रभारी की संदिग्ध भूमिका ने यह साफ कर दिया है कि 'ऊपर से नीचे तक' सबकी सेटिंग टाइट है।

कलेक्टर रीवा और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी! अब तो आंखें खोलिए!
यह सीधे तौर पर एक संगठित अपराध है।

  • मुख्यमंत्री जी: आपके 'भांजों' की सेहत से खिलवाड़ करने वाले इन अधिकारियों पर बुलडोजर कब चलेगा? क्या रीवा के बच्चों का हक माफियाओं की तिजोरी भरने के लिए है?
  • कलेक्टर महोदय: शिकायतों के अंबार के बाद भी सेंट्रल किचन के ठेकेदार और भ्रष्ट प्रभारी पर FIR क्यों नहीं हुई? क्या आपका अमला भी इस 'लूट' की मलाई में हिस्सा ले रहा है?
  • चेतावनी: अगर अगले 48 घंटों में सेंट्रल किचन का अनुबंध निरस्त कर लापरवाह अधिकारियों को निलंबित नहीं किया गया, तो यह जन-आक्रोश सड़कों पर उतरेगा।

Related Topics

Latest News