MP Crime Files : सत्ता की हनक और रसूख का नंगा नाच! सरकारी गेस्ट हाउस में कैसे सजी थी हिस्ट्रीशीटर और ढोंगी बाबा की अय्याशी वाली महफिल? पढ़िए पूरी कुंडली!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र का केंद्र 'रीवा' जिसे सफेद शेरों की भूमि कहा जाता है, मार्च 2022 में एक ऐसे कलंक से जुड़ गया जिसने पूरे देश को झकझोर दिया। शहर के सबसे सुरक्षित और वीआईपी माने जाने वाले सर्किट हाउस (राजभवन) के कमरा नंबर 4 में जो कुछ हुआ, उसने धर्म, राजनीति और प्रशासन के गठजोड़ को पूरी तरह नंगा कर दिया।

28 मार्च की वह खौफनाक रात: जब रक्षक ही भक्षक बन गए
28 मार्च 2022 की रात करीब 11 बजे, जब शहर सोने की तैयारी कर रहा था, तब एक नाबालिग लड़की (काजल - बदला हुआ नाम) बदहवास हालत में सड़क पर दौड़ रही थी। वह अपनी अस्मत लुटाकर उन दरिंदों से जान बचाकर भाग रही थी, जिन्हें समाज 'आदरणीय' कहता था। महाराजा होटल के पास जब उसे दो युवाओं (अंकित और सौरभ) ने देखा, तो उसकी आंखों में मौत का खौफ था। उसने बताया कि कैसे उसे आशीर्वाद देने के बहाने बुलाया गया और फिर नशे की हालत में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया।

कौन है आरोपी महंत सीताराम दास उर्फ समर्थ त्रिपाठी?
इस पूरी घटना का मुख्य चेहरा था सीताराम दास जिसे समर्थ त्रिपाठी के नाम से भी जाना जाता था। वह खुद को एक बड़ा कथावाचक और संत बताता था। सफेद दाढ़ी, लंबे बाल और भगवा चोला पहनकर वह लोगों को ज्ञान की बातें सिखाता था। उसके प्रवचनों में हजारों की भीड़ उमड़ती थी। लेकिन उस रात रीवा के सर्किट हाउस में उसका असली चेहरा सामने आया। वह न केवल शराब पी रहा था, बल्कि गांजे के नशे में धुत होकर एक नाबालिग बच्ची की जिंदगी तबाह कर रहा था।

सर्किट हाउस में शराब और शबाब की पार्टी: सुरक्षा पर बड़े सवाल 
सर्किट हाउस वह जगह है जहाँ कलेक्टर, एसपी और मंत्रियों का डेरा होता है। यहाँ विनोद पांडे जैसे हिस्ट्रीशीटर बदमाश का कब्जा होना और वहाँ शराब पार्टी का आयोजन होना, प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा थी। कमरे में चाऊमीन, मंचूरियन और महंगी शराब के बीच एक मासूम बच्ची को जबरदस्ती शराब पिलाई गई। सरकारी रजिस्टर में एंट्री न होना और वीआईपी प्रोटोकॉल का उल्लंघन होना यह बताता है कि अपराधियों को रसूखदारों का खुला संरक्षण प्राप्त था।

पीडिता की बहादुरी: कैसे दरिंदों के चंगुल से भागकर थाने पहुँची काजल? 
काजल को जब लगा कि अब वह यहाँ से जीवित नहीं निकल पाएगी, तो उसने साहस का परिचय दिया। रेप के बाद जब आरोपी उसे नीचे खाना खिलाने ले गए, तो वह मौका पाकर वहाँ से भाग निकली। उसने शोर मचाया और सड़क पर भागते हुए मदद मांगी। सिविल लाइन थाने पहुँचकर उसने जो बयान दर्ज कराए, उससे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया क्योंकि आरोपी कोई आम इंसान नहीं, बल्कि सत्ता के करीबी माने जाने वाले लोग थे। 

लड़की की कहानी सुनकर हर किसी के होश उड़े
उसकी हालत देखकर अंकित समझ गया कि मामला गंभीर है। देर रात बस मिलने की कोई उम्मीद नहीं थी और लड़की को अकेला छोड़ना किसी अनहोनी को दावत देने जैसा था। अंकित ने उसे अपनी बाइक पर बैठाया और सीधे सिविल लाइन थाने ले गया। थाने पहुंचकर भी लड़की का डर कम नहीं हुआ। वह इतनी सहमी हुई थी कि पुलिस के सामने भी कुछ बोल नहीं पा रही थी।

पुलिस ने उसे पानी पिलाया और शांत कराने की कोशिश की, लेकिन उस रात वह कुछ भी बताने की हिम्मत नहीं जुटा सकी। अगले दिन, जब उसके घरवाले थाने पहुंचे और पुलिस ने उसे पूरी सुरक्षा का यकीन दिलाया, तब जाकर उसने जो कहानी सुनाई, उसे सुनकर वहां मौजूद हर शख्स के होश उड़ गए।

लड़की ने पुलिस को बताया कि शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले सर्किट हाउस में कुछ लोगों ने मिलकर उसे जबरदस्ती शराब पिलाई और फिर उसके साथ सामूहिक रेप किया। जब उसने आरोपियों के नाम बताए, तो एफआईआर लिखने बैठे पुलिस वालों के भी हाथ कांप गए। लड़की ने एक ऐसे मशहूर कथावाचक संत पर रेप का आरोप लगाया था, जिसके स्वागत में पूरा शहर पलकें बिछाए बैठा था।

राजनीतिक रसूख और अपराधी विनोद पांडे का गठजोड़
विनोद पांडे, इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड था। उसने काजल को कॉलेज की फीस जमा कराने का झांसा देकर फंसाया था। विनोद का आपराधिक रिकॉर्ड काफी पुराना था, फिर भी सर्किट हाउस के कर्मचारी उसे 'दादा' कहकर सलाम ठोकते थे। उसने संत सीताराम दास को खुश करने के लिए काजल की बलि चढ़ा दी। यह मामला उजागर होने के बाद कई राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ आरोपियों की तस्वीरें वायरल हुईं, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया।

पुलिसिया कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी का घटनाक्रम
FIR दर्ज होते ही पुलिस ने तत्परता दिखाई। तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। फरार महंत सीताराम दास को पकड़ने के लिए पुलिस ने तकनीकी निगरानी का सहारा लिया और उसे सिंगरौली के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने न केवल आरोपियों को जेल भेजा, बल्कि प्रशासन ने अपराधियों के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर एक कड़ा संदेश भी दिया।

समाज और कानून के लिए एक कड़ा सबक
रीवा का सर्किट हाउस कांड हमें याद दिलाता है कि अपराधियों का कोई धर्म नहीं होता। संत के भेष में भेड़िया बनकर घूमने वाले लोग समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। इस घटना ने यह भी साबित किया कि अगर समाज के जागरूक युवा (अंकित और सौरभ जैसे) समय पर मदद के लिए आगे न आते, तो शायद काजल को कभी इंसाफ नहीं मिलता।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • रीवा सर्किट हाउस कांड कब हुआ था? यह घटना 28 मार्च 2022 की रात को रीवा के सर्किट हाउस में हुई थी।
  • मुख्य आरोपी महंत सीताराम दास को कहाँ से गिरफ्तार किया गया था? उसे सिंगरौली जिले से पुलिस ने गिरफ्तार किया था जब वह भागने की कोशिश कर रहा था।
  • विनोद पांडे कौन है? विनोद पांडे रीवा का एक हिस्ट्रीशीटर बदमाश है, जिसने नाबालिग लड़की को सर्किट हाउस बुलाकर संत के हवाले किया था।
  • इस मामले में पुलिस ने क्या सख्त कदम उठाए? पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजने के साथ-साथ उनके अवैध संपत्तियों और घरों पर बुलडोजर चलवाकर उन्हें जमींदोज कर दिया था।

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