रीवा के विकास में अड़ंगा? एक तरफ कलेक्टर के कड़े तेवर, दूसरी तरफ पंचायत कर्मियों की हड़ताल की हुंकार, क्या थम जाएंगे विकास कार्य?
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में इन दिनों प्रशासनिक गलियारों में भारी तनाव देखा जा रहा है। रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने पदभार संभालते ही मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप "काम नहीं तो वेतन नहीं" और "समय की पाबंदी" का जो कड़ा रुख अपनाया है, उसने अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच खलबली मचा दी है। जहाँ एक ओर कलेक्टर जिले को रैंकिंग में शीर्ष पर लाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारियों ने इसे मानसिक प्रताड़ना बताते हुए मोर्चा खोल दिया है।

कलेक्टर की सख्ती और कड़ी कार्रवाई का सिलसिला
पिछले एक सप्ताह से कलेक्टर लगातार विभागीय बैठकों के माध्यम से विकास कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं। कलेक्टर का स्पष्ट संदेश है—"कार्यालय समय पर आना होगा और काम करना होगा।"
वेतन पर रोक: लापरवाही पाए जाने पर APO, PO और AAO का वेतन रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
निलंबन और नोटिस: सेमरिया तहसील के सहायक वर्ग-3 प्रशांत तिवारी को नामांतरण में लापरवाही पर निलंबित किया गया। वहीं, गंगेव जनपद सीईओ प्राची चौबे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
संविदा समाप्ति: मनरेगा पीओ (PO) की संविदा समाप्त करने तक की कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं।

किन योजनाओं पर धीमी प्रगति बनी विवाद की जड़?
कलेक्टर की नाराजगी का मुख्य कारण शासन की प्रमुख योजनाओं में जिले की पिछड़ती रैंकिंग है। बैठक में निम्नलिखित योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया:
जल गंगा संवर्धन अभियान: मुख्यमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में न्यूनतम प्रगति पर कलेक्टर ने सख्त नाराजगी जाहिर की और एफआईआर (FIR) तक की चेतावनी दी।
प्रधानमंत्री आवास योजना: सर्वे के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतों और पात्र हितग्राहियों को लाभ न मिलने पर जनपद सीईओ पर गाज गिरी।
मनरेगा: काम की धीमी गति और मस्टर रोल प्रबंधन में कमियों को लेकर सख्त निर्देश दिए गए।
कर्मचारियों का विरोध: संयुक्त मोर्चा और हड़ताल की चेतावनी
कलेक्टर की इस कार्यशैली को कर्मचारियों ने 'तानाशाही' करार दिया है। गुरुवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने संयुक्त मोर्चा बनाकर संभागायुक्त (कमिश्नर) को ज्ञापन सौंपा।

आरोप: कर्मचारियों का कहना है कि उन पर अनावश्यक मानसिक दबाव बनाया जा रहा है और उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है।
मांग: कर्मचारियों ने मांग की है कि कार्य का वातावरण सम्मानजनक होना चाहिए। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं।
विकास बनाम अनुशासन
रीवा में वर्तमान स्थिति यह है कि जिला प्रशासन विकास कार्यों में तेजी लाना चाहता है, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाला अमला इस दबाव से असहज है। अब देखना यह होगा कि कमिश्नर के हस्तक्षेप के बाद क्या बीच का रास्ता निकलता है या यह विरोध जिले के विकास कार्यों को ठप कर देगा।