रीवा में सूर्यवंशी का सूर्योदय: पदभार संभालते ही डभौरा के जंगलों में पहुंचे कलेक्टर, ग्राउंड जीरो पर बैठकर सुनी ग्रामीणों की फरियाद
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले के प्रशासनिक गलियारे में एक नया अध्याय शुरू हो गया है। 2012 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने रविवार को रीवा के नए कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। इससे पहले वे बैतूल जिले में अपनी सेवाएं दे रहे थे। अपनी तेजतर्रार कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले सूर्यवंशी ने पूर्व कलेक्टर प्रतिभा पाल का स्थान लिया है, जिनका स्थानांतरण सागर जिले में हुआ है।

पदभार ग्रहण और पहली प्राथमिकताएं
रविवार को सर्किट हाउस पहुँचते ही कलेक्टर सूर्यवंशी ने औपचारिकताएं पूरी कीं। मीडिया से चर्चा में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य मुख्यमंत्री और शासन की जनहितैषी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा, "मैं पहली बार रीवा आया हूँ और यहाँ एक लंबी पारी खेलने के इरादे से आया हूँ।" उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं:
- सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन।
- आम जनता की शिकायतों का त्वरित निराकरण।
- प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक।
एक्शन मोड: ट्रेवलर बस से सुदूर गांवों का दौरा
सोमवार का दिन रीवा प्रशासन के लिए ऐतिहासिक रहा। आमतौर पर कलेक्टर अपनी लग्जरी गाड़ियों में दौरा करते हैं, लेकिन सूर्यवंशी ने ट्रेवलर बस में बैठकर अधिकारियों की पूरी टीम के साथ जिले के अंतिम छोर के गांवों का रुख किया। यह कदम यह संदेश देने के लिए पर्याप्त था कि अब प्रशासन एयर-कंडीशन्ड कमरों से नहीं बल्कि जमीन से चलेगा।

जतरी ग्राम पंचायत में जन-संवाद
कलेक्टर सूर्यवंशी डभौरा अनुभाग के जतरी ग्राम पंचायत पहुँचे। यहाँ उन्होंने किसी प्रोटोकॉल की चिंता किए बिना सीधे ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने लोगों से पूछा कि क्या उन्हें राशन, पेंशन और आवास योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं।

मुख्य घटनाक्रम:
- जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर के साथ स्थिति का जायजा लिया।
- स्कूल और अन्य सार्वजनिक भवनों की मरम्मत (DPC कार्य) के निर्देश दिए।
- ग्रामीणों को जागरूक बनने के लिए प्रेरित किया।
भ्रष्टाचार और प्रशासनिक चुनौतियों पर प्रहार
रीवा जिला लंबे समय से भ्रष्टाचार और शिकायतों के 'गढ़' के रूप में चर्चित रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और पीएचई (PHE) विभागों में अनियमितताओं के पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कलेक्टर ने संकेत दिया कि वे भ्रष्ट सिस्टम को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि फाइलों में काम दिखाने के बजाय धरातल पर परिणाम दिखना चाहिए।

सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और निर्देश
कलेक्टर ने अधिकारियों को कड़ी हिदायत दी है कि योजनाओं के लाभ में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने "विशेष अभियान" चलाने की बात कही है ताकि पात्र हितग्राही योजनाओं से वंचित न रहें। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान सिस्टम में कुछ कमियां हैं, जिन्हें वे अपनी सक्रियता से दुरुस्त करेंगे।

कलेक्टर निरीक्षण के दौरान मध्यान भोजन की जांच तो की लेकिन भवन का जो बारजा गिरा था उस पर ध्यान नहीं गया
तकनीकी समाधान: जल संकट और न्यूट्रॉन पाइप
रीवा में पेयजल और बोरवेल की समस्या पर भी कलेक्टर ने ध्यान केंद्रित किया है। क्षेत्र में बोरवेल के लिए इस्तेमाल होने वाले हल्के पाइप (30 किलो) के टूटने की समस्या आम है। प्रशासन अब न्यूट्रॉन 40 किलो के मजबूत केसिंग पाइप के उपयोग को प्रोत्साहित कर रहा है ताकि ग्रामीणों का पैसा और पानी दोनों बच सकें। यह तकनीकी सुधार कृषि और पेयजल व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है।
रीवा में प्रशासनिक बदलाव की लहर
नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी का पहला ही दिन यह बताने के लिए काफी था कि रीवा की जनता को अब एक सक्रिय और संवेदनशील नेतृत्व मिला है। सीधे संवाद और औचक निरीक्षण की उनकी शैली ने लापरवाह अधिकारियों में हड़कंप मचा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि रीवा की 'शिकायतों के गढ़' वाली छवि कितनी बदलती है।