साहब के सख्त तेवर: नामांतरण और अनुकंपा नियुक्ति में ढिलाई पर 2 कर्मचारी निलंबित, भ्रष्ट और सुस्त सिस्टम पर कलेक्टर का प्रहार!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के लिए नवागत कलेक्टर ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में आयोजित जन सुनवाई के दौरान कलेक्टर ने न केवल जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुना, बल्कि लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर 'ऑन द स्पॉट' कार्रवाई भी की। यह पहली बार है जब रीवा में जन सुनवाई के दौरान इतनी सख्ती और त्वरित निर्णय देखने को मिले हैं।

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लापरवाही पर भारी पड़ा कलेक्टर का गुस्सा: 2 निलंबित, 2 की वेतन कटौती
कलेक्टर ने जन सुनवाई में अनुपस्थित रहने और काम में देरी करने वाले अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

  • निलंबन की कार्रवाई: कलेक्टर ने दो सरकारी कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इनमें से एक कर्मचारी नामांतरण प्रकरण में अत्यधिक विलंब के लिए जिम्मेदार था, जबकि दूसरा अनुकंपा नियुक्ति से संबंधित मामले में ढिलाई बरत रहा था।
  • वेतन में कटौती: जन सुनवाई जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में अनुपस्थित रहने वाले दो अन्य कर्मचारियों के वेतन में कटौती के आदेश दिए गए।
  • अधिकारियों को फटकार: संबंधित डीपीसी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई और जिला पंचायत अध्यक्ष के पति को भी कलेक्टर की नाराजगी का सामना करना पड़ा।

सरकारी हैंडपंप और जमीन कब्जे पर सख्त रुख: "शाम तक चाहिए कार्रवाई"
गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के कनौजा ग्राम से आए एक मामले ने कलेक्टर को विशेष रूप से नाराज कर दिया। राम शिरोमणि मिश्रा नामक शिकायतकर्ता ने बताया कि स्थानीय दबंगों ने सरकारी हैंडपंप को अपने घर के अंदर कर दीवार खड़ी कर ली है, जिससे ग्रामीण पानी के लिए तरस रहे हैं।

अल्टीमेटम: कलेक्टर ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार को फटकार लगाते हुए निर्देश दिया कि सूरज ढलने से पहले (शाम तक) उस दीवार को तोड़कर हैंडपंप को मुक्त कराया जाए।
निलंबन की चेतावनी: उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि शाम तक कार्रवाई की रिपोर्ट नहीं मिली, तो संबंधित अधिकारियों को निलंबन का सामना करना पड़ सकता है।

पेंशन और भविष्य निधि का लंबित समाधान
जन सुनवाई में जितेंद्र सिंह नामक व्यक्ति ने अपनी पेंशन की समस्या रखी। शिकायतकर्ता ने बताया कि भविष्य निधि (PF) खाते में राशि जमा नहीं होने के कारण उन्हें पेंशन नहीं मिल रही है, जबकि वे पांच बार आवेदन दे चुके हैं। कलेक्टर ने इस लंबित मामले पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और तुरंत समाधान के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता: जन सुनवाई का संकल्प
कलेक्टर ने अधिकारियों को याद दिलाया कि जन सुनवाई माननीय मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • त्वरित निराकरण: नवागत कलेक्टर ने जन सुनवाई प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने का संकल्प लिया है, जिसके तहत लगभग 52 आवेदनों का तत्काल निराकरण किया गया।
  • संवैधानिक जवाबदेही: उन्होंने निर्देश दिया कि सभी कार्य संवैधानिक रूप से और समय सीमा के भीतर किए जाएं ताकि जनता को भटकना न पड़े।

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