बघेलखंड मा हड़कंप: कलेक्टर सूर्यवंशी के तेवर देख सहमे लापरवाह अधिकारी, "जब जनता परेशान है तो आप कुर्सी पर कैसे बैठे हैं?" भरी सभा में महिला अधिकारी के कांपे हाथ

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले के प्रशासनिक मुखिया, कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी इन दिनों अपने 'एक्शन मोड' के लिए चर्चा में हैं। मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान नजारा कुछ अलग ही था। आम जनता की शिकायतों का अंबार और उस पर अधिकारियों का ढुलमुल रवैया देखकर कलेक्टर का पारा चढ़ गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यालयों में बैठकर समय काटना अब बंद करना होगा और जनता के प्रति जवाबदेही तय करनी होगी।

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मत्स्य विभाग की महिला अधिकारी के कांपे हाथ: विभागीय लापरवाही पर जवाब तलब
जैसे ही जनसुनवाई शुरू हुई, मत्स्य विभाग के खिलाफ शिकायतों की झड़ी लग गई। फरियादियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाए। कलेक्टर ने जब संबंधित महिला अधिकारी को स्पष्टीकरण के लिए बुलाया, तो संतोषजनक उत्तर न मिलने पर उन्होंने कड़ी फटकार लगाई।

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कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा, "जनता अपनी उम्मीदें लेकर यहाँ आती है, और आप लोग फाइलें दबाकर बैठे हैं। यह लापरवाही बर्दाश्त के बाहर है।" बताया जा रहा है कि कलेक्टर के तेवर इतने तीखे थे कि कक्ष में मौजूद अधिकारी सहम गए।

"अतिक्रमण क्यों नहीं हटा?": नगर निगम अधिकारियों को लगाई क्लास
शहर में बढ़ते अतिक्रमण और यातायात की बदहाली को लेकर भी कलेक्टर ने मोर्चा खोला। नगर निगम के अधिकारियों को निशाने पर लेते हुए उन्होंने पूछा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद सड़कों से कब्जा क्यों नहीं हट रहा है। उन्होंने मौके पर ही अधिकारियों से कार्ययोजना मांगी और चेतावनी दी कि यदि सड़कों पर फिर से अव्यवस्था दिखी, तो संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारी पर गाज गिरेगी।

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बुजुर्ग की पेंशन पर सीओ की गलत जानकारी: कलेक्टर ने खोली पोल
जनसुनवाई का सबसे भावुक और गंभीर मामला बुजुर्ग मथुरा प्रसाद साकेत का था। वह अपनी रुकी हुई पेंशन के लिए महीनों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। जब कलेक्टर ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीओ) से इस बारे में पूछा, तो अधिकारी ने दावा किया कि "मामला सुलझ गया है।"

तभी कलेक्टर ने पलटवार करते हुए पूछा— "अगर निराकरण हो गया है, तो बुजुर्ग को पैसे क्यों नहीं मिल रहे? कागजों पर निराकरण करना बंद करें।" उन्होंने आदेश दिया कि बुजुर्ग के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और तत्काल उनके खाते में पेंशन की राशि सुनिश्चित की जाए।

प्रशासनिक अमले में मची खलबली: कार्यशैली में बदलाव के संकेत
रीवा के नए कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने पदभार ग्रहण करने के बाद से ही अपनी प्राथमिकताएं साफ कर दी हैं। औचक निरीक्षण हो या दफ्तरों में समय की पाबंदी, उन्होंने हर मोर्चे पर कसावट शुरू कर दी है। जनसुनवाई में हुई इस हालिया कार्रवाई ने यह संदेश दे दिया है कि अब फाइलों में 'खानापूर्ति' नहीं चलेगी।

क्या अब बदलेगी रीवा की प्रशासनिक तस्वीर?
जनसुनवाई केवल आवेदनों को जमा करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र में जनता और प्रशासन के बीच की कड़ी है। कलेक्टर की इस कड़ाई से जनता में विश्वास जागा है, वहीं अधिकारियों के बीच इस बात का खौफ है कि अब काम की चोरी नहीं चलेगी। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फटकार का असर धरातल पर कितना दिखता है।

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