Rewa Collector Big Action : बैठक से गायब होना पड़ा महंगा! रीवा कलेक्टर ने जिला पंचायत अधिकारियों को दी सीधी चेतावनी– 'सुधरें या कार्रवाई झेलें'

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए कलेक्टर ने एक बेहद कड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अक्सर यह देखा जाता था कि जिला पंचायत के कई महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारी बिना किसी सूचना या पूर्व स्वीकृति के अपने मुख्यालय से गायब रहते थे। अब इस 'मनमर्जी' पर पूरी तरह से अंकुश लगा दिया गया है।

समीक्षा बैठक में खुलासा: 27 अप्रैल की घटना ने बढ़ाई सख्ती
प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा तब तेज हुई जब बीते 27 अप्रैल 2026 को आयोजित एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में कई वरिष्ठ अधिकारी अनुपस्थित पाए गए। इस बैठक का उद्देश्य शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति का जायजा लेना था, लेकिन अधिकारियों की गैर-मौजूदगी के कारण योजनाओं की समीक्षा नहीं हो सकी। कलेक्टर ने इस स्थिति को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

जिला पंचायत CEO को सख्त निर्देश: व्यवस्था में करें तत्काल सुधार
कलेक्टर ने इस संबंध में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को एक औपचारिक पत्र लिखकर कड़े निर्देश दिए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिला पंचायत में पदस्थ परियोजना अधिकारी (PO), एपीओ (APO), और मनरेगा से जुड़े अधिकारियों की कार्यशैली की निगरानी की जाए। यह सुनिश्चित करना अब CEO की जिम्मेदारी होगी कि कोई भी अधीनस्थ अधिकारी बिना लिखित अनुमति के कार्यस्थल न छोड़े।

शासन की योजनाओं पर पड़ रहा था प्रतिकूल प्रभाव
अधिकारियों के मुख्यालय से गायब रहने का सीधा असर जिले में चल रही विकास योजनाओं पर पड़ रहा था। जब जिम्मेदार अधिकारी ही समीक्षा बैठकों से नदारद रहेंगे, तो जमीनी स्तर पर काम की गुणवत्ता और समयसीमा का निर्धारण करना असंभव हो जाता है। विशेष रूप से मनरेगा और ग्रामीण विकास की अन्य योजनाओं में देरी देखी जा रही थी, जिसे देखते हुए प्रशासन ने यह सख्त रुख अपनाया है।

चेतावनी के साथ आदेश: अब होगी सीधी वैधानिक कार्रवाई
प्रशासन द्वारा जारी नए आदेश में केवल रोक ही नहीं लगाई गई है, बल्कि स्पष्ट चेतावनी भी दी गई है। आदेश के मुताबिक, यदि भविष्य में कोई भी अधिकारी बिना किसी ठोस कारण या पूर्व अनुमति के अपने कार्यालय या निर्धारित मुख्यालय से बाहर पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब अधिकारियों को अपनी उपस्थिति और फील्ड विजिट का पूरा रिकॉर्ड पारदर्शी रखना होगा।

प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की बड़ी कोशिश
यह फैसला रीवा जिले में सुशासन (Good Governance) की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली शिकायतों का निवारण इसलिए नहीं हो पाता था क्योंकि अधिकारी मुख्यालय पर उपलब्ध नहीं होते थे। कलेक्टर की इस सख्ती के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी विभागों में कार्य के प्रति गंभीरता बढ़ेगी और आम जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो सकेगा।

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