रीवा कमिश्नर का अल्टीमेटम: 4थी-5वीं के बच्चे को पढ़ना नहीं आया तो सीधे नपेंगे टीचर, 'कागजी खेल' बंद

 
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मध्य प्रदेश के रीवा संभाग में सरकारी शिक्षा व्यवस्था के ढर्रे को पूरी तरह बदलने के लिए प्रशासनिक स्तर पर एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। रीवा संभाग के कमिश्नर (संभागायुक्त) शीलेन्द्र सिंह ने स्कूल शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और बच्चों की पढ़ाई के गिरते स्तर पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने संभाग के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि अब स्कूलों में केवल बच्चों का नामांकन (एडमिशन) करवा लेना ही कर्तव्य की इतिश्री नहीं माना जाएगा।

कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि शासन का मुख्य उद्देश्य हर बच्चे को केवल स्कूल की चौखट तक लाना नहीं, बल्कि उसे गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा प्रदान करना है। यदि किसी शासकीय प्राथमिक या माध्यमिक विद्यालय में बच्चे सिर्फ कागजों पर दर्ज हैं और उन्हें बुनियादी ज्ञान नहीं मिल रहा है, तो ऐसी स्थिति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रीवा संभाग के सभी शासकीय विद्यालयों में अब बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक योग्यता का मूल्यांकन किया जाएगा, जिससे यह साफ हो सके कि स्कूल में प्रतिदिन दी जाने वाली शिक्षा का धरातल पर क्या असर हो रहा है।

कागजी आंकड़ों का खेल खत्म: जमीनी हकीकत परखेंगे संभागायुक्त
अब तक शिक्षा विभाग में अक्सर यह देखा जाता रहा है कि शत-प्रतिशत नामांकन और कागजी रिपोर्ट पेश करके वरिष्ठ अधिकारियों को संतुष्ट कर दिया जाता है। लेकिन रीवा कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने इस परिपाटी को पूरी तरह से बंद करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि "शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल फाइलों और कागजी आंकड़ों को चमकाने से नहीं आएगा, इसके लिए धरातल पर कड़ा परिश्रम करना होगा।"

प्रशासनिक बैठक में यह बात उभरकर सामने आई कि कई स्कूलों में कागजों पर तो उपस्थिति बेहतर दिखाई जाती है और पाठ्यक्रम पूरा होने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब धरातल पर बच्चों से सामान्य सवाल पूछे जाते हैं, तो वे निरुत्तर हो जाते हैं। कमिश्नर ने निर्देश दिया है कि अब किसी भी प्रकार की झूठी या भ्रामक रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जाएगी। जो भी अधिकारी या शिक्षक केवल आंकड़ों की बाजीगरी में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ धोखाधड़ी और कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही की धाराओं के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर कैसे सुधारें: क्या हैं निर्देश?
संभागायुक्त ने रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली और मऊगंज सहित पूरे संभाग के लिए एक विशेष गाइडलाइन जारी की है। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए निम्नलिखित कदम तत्काल प्रभाव से लागू किए जाएं:

  • नियमित क्लास और समयबद्धता: सभी शिक्षकों को निर्धारित समय पर स्कूल आना होगा और पूरे कालखंड (पीरियड्स) में बच्चों को पूरी लगन के साथ पढ़ाना होगा।
  • बुनियादी साक्षरता पर जोर: कक्षा पहली से लेकर पांचवीं तक के बच्चों में अक्षरों की पहचान, शब्द निर्माण, शुद्ध लेखन और बुनियादी गणितीय गणनाओं (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित किया जाए।
  • दैनिक मूल्यांकन: शिक्षक प्रतिदिन पढ़ाए गए पाठ का बच्चों से फीडबैक लें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जो पढ़ाया गया है, वह छात्र को समझ में आया है या नहीं।
  • अधिकारियों द्वारा मॉनिटरिंग: ब्लॉक और जिला स्तर के शिक्षा अधिकारी केवल दफ्तरों में न बैठें, बल्कि हर सप्ताह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के स्कूलों का सघन दौरा करें।

कमजोर छात्रों के लिए क्या करें और एक्स्ट्रा क्लास कैसे संचालित करें?
इस नए प्रशासनिक आदेश का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बच्चों की सीखने की क्षमता पर आधारित है। कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने विशेष रूप से रेखांकित किया है कि हर बच्चे की सीखने की गति एक जैसी नहीं होती। कुछ छात्र तीव्र बुद्धि के होते हैं, तो कुछ को समझने में अधिक समय लगता है। ऐसी स्थिति में शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।

शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी कक्षा के बच्चों का एक आंतरिक मूल्यांकन करें और ऐसे छात्रों की पहचान करें जो पढ़ाई में पीछे छूट रहे हैं। कमजोर छात्रों के लिए स्कूलों में अनिवार्य रूप से 'एक्स्ट्रा क्लास' (अतिरिक्त कक्षाएं) संचालित की जाएं। इन अतिरिक्त कक्षाओं में बच्चों को बहुत ही सरल और खेल-कूद की पद्धतियों (Activity-Based Learning) के माध्यम से वर्णमाला, मात्राओं का ज्ञान और पढ़ना सिखाया जाए। यदि शिक्षक नियमित रूप से कमजोर बच्चों को अलग से समय देंगे, तो कोई भी छात्र अनुत्तीर्ण या अनपढ़ नहीं रहेगा।

लापरवाही पर कार्रवाई: निलंबन और विभागीय जांच की चेतावनी
रीवा कमिश्नर ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि वे खुद कभी भी, किसी भी स्कूल का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कर सकते हैं। इस निरीक्षण के दौरान यदि कक्षा चौथी या पांचवीं का कोई छात्र अपनी पाठ्यपुस्तक की हिंदी या अंग्रेजी की सामान्य लाइनें भी पढ़ने में असमर्थ पाया गया, या उसे अपना नाम तक लिखना नहीं आया, तो इसे संबंधित शिक्षक और संस्था के प्राचार्य (प्रिंसिपल) की अक्षमता माना जाएगा।

कमिश्नर की दो टूक चेतावनी:
"अगर चौथी-पांचवीं के बच्चे को पढ़ना-लिखना नहीं आता, तो इसके लिए सीधे तौर पर वहां का स्टाफ जिम्मेदार है। ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार का स्पष्टीकरण स्वीकार नहीं होगा। लापरवाही मिलने पर दोषी शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) किया जाएगा और उनके खिलाफ विभागीय जांच (Departmental Enquiry) शुरू कर दी जाएगी।"

इस सख्त रुख से पूरे संभाग के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रशासन की इस कड़ाई का उद्देश्य सरकारी स्कूलों के प्रति आम जनता के विश्वास को बहाल करना और गरीब वर्ग के बच्चों को एक उज्जवल और सुरक्षित भविष्य प्रदान करना है।

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