नवीन न्यायालय बना चुनावी अखाड़ा: 10 बूथों पर वकीलों का जोश, हाईकोर्ट के कड़े पहरे में चुनी जा रही जिला अधिवक्ता संघ की नई टीम

 
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सुबह 10 से शाम 3 बजे तक चला मतदान; 10 पोलिंग बूथों पर वकीलों ने चुनी अपनी नई सरकार, हाईकोर्ट के कड़े पहरे में संपन्न हुई प्रक्रिया।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। शहर के नवीन न्यायालय परिसर में आज न्याय के रक्षकों ने अपनी 'सरकार' चुनने के लिए मताधिकार का प्रयोग किया। जिला अधिवक्ता संघ के विभिन्न पदों के लिए आयोजित यह चुनाव महज एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि हाईकोर्ट के कड़े अनुशासन और वकीलों की गरिमा का प्रतीक बन गया। सुबह 10 बजे से शुरू हुई वोटिंग शाम 3 बजे तक अनवरत जारी रही।

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आरक्षण का नया अध्याय: कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी में महिलाओं का दबदबा
इस बार का चुनाव ऐतिहासिक रहा क्योंकि इसमें महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी गई।

कोषाध्यक्ष पद: हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत इस पद पर 30% महिला आरक्षण प्रभावी किया गया।
कार्यकारिणी: पाँच सदस्यीय प्रबंध समिति में कम से कम दो महिला सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य रखी गई है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।

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10 पोलिंग बूथ और शांतिपूर्ण मतदान
मतदान को सुव्यवस्थित रखने के लिए चुनाव समिति ने 10 मतदान केंद्र (Polling Booths) स्थापित किए थे। वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र पांडे सहित सैकड़ों वकीलों ने कतारबद्ध होकर शांतिपूर्ण तरीके से वोट डाले। माहौल पूरी तरह से पेशेवर और गरिमामय रहा, जिसमें किसी भी प्रकार के व्यवधान की कोई जगह नहीं थी।

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इन पदों पर टिका है सबका भविष्य
अधिवक्ता संघ की इस जंग में कई दिग्गज मैदान में हैं। मुख्य रूप से अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, उप सचिव, कोषाध्यक्ष, ग्रंथपाल और सह सचिव जैसे अहम पदों के लिए वोट डाले गए। चुनाव के परिणाम अधिवक्ता हितों की रक्षा और बार-बाउंड्री के बीच समन्वय की नई दिशा तय करेंगे।

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