रीवा ईको पार्क बवाल:  प्रमोद शर्मा बने बराती, मीडिया बनी घराती, ठेकेदार बने अपराधी 

 
dfdf

Rewa Eco Park में एंट्री फीस और पार्किंग अवैध वसूली पर हंगामा। AAP नेता Pramod Sharma पर मामला दर्ज, पुलिस जांच में जुटी। देखें वायरल वीडियो का सच।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। शहर के हृदय स्थल में स्थित ईको पार्क इन दिनों पर्यटन के लिए कम और कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने के लिए ज्यादा जाना जा रहा है। रविवार को यहाँ जो कुछ भी हुआ, उसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम को देखकर स्थानीय लोग तंज कस रहे हैं कि "प्रमोद शर्मा बने बराती, मीडिया बनी घराती और ईको पार्क के ठेकेदार बने अपराधी।"

dgfdg

लंबे समय से शांत दिख रहा यह मुद्दा अब पूरी तरह से सुलग चुका है। आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता प्रमोद शर्मा ने अपने समर्थकों के साथ पार्क में प्रवेश शुल्क (एंट्री फीस) और पार्किंग के नाम पर की जा रही कथित अवैध वसूली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। लेकिन जनहित की यह लड़ाई अब थाने की चौखट तक पहुंच चुकी है, जहां राजनीति, प्रशासन और ठेकेदारों का त्रिकोण साफ दिखाई दे रहा है।

dfg

  • ईको पार्क विवाद: क्या कोर्ट और आरटीआई (RTI) के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं?
  • आरटीआई (RTI) में ईको पार्क की फीस को लेकर क्या लिखा है और इसका पालन क्यों नहीं हो रहा है?

इस पूरे विवाद की जड़ में सूचना का अधिकार (RTI) और माननीय न्यायालय के दिशा-निर्देश हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जब आरटीआई के दस्तावेजों में साफ तौर पर दर्ज है कि ईको पार्क के भीतर प्रवेश और अन्य सुविधाओं के लिए एक निश्चित और सीमित शुल्क ही लिया जा सकता है, तो फिर नियमों को ताक पर रखकर प्रति व्यक्ति 100 रुपये की भारी-भरकम राशि क्यों वसूली जा रही है?

एक बड़ा सवाल यह उठता है: क्या ईको पार्क का प्रबंधन और ठेकेदार खुद को देश की न्याय व्यवस्था से भी ऊपर समझते हैं? जब कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं, तो उनका खुला उल्लंघन करने का साहस इन ठेकेदारों को कहाँ से मिल रहा है? जनता अब प्रशासनिक मौन पर भी सवाल उठा रही है कि आखिर किसके संरक्षण में यह सब चल रहा है।

वीडियो साक्ष्य: लाठी लेकर दौड़ती महिला और पार्किंग में अवैध वसूली का सच
रीवा ईको पार्क विवाद का वायरल वीडियो क्या है और इसमें क्या दिख रहा है?

रविवार को हुए इस बवाल के कई वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि ईको पार्क परिसर के भीतर किस कदर अफरा-तफरी का माहौल था।

  • महिला का लाठी लेकर दौड़ना: वीडियो में एक महिला हाथ में लाठी लेकर आक्रामक रूप से दौड़ती हुई दिखाई दे रही है, जिसे मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी बड़ी मुश्किल से रोकते और समझाते नजर आ रहे हैं।
  • पार्किंग में अवैध वसूली का आरोप: प्रत्यक्षदर्शियों और प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ईको पार्क की पार्किंग में निर्धारित शुल्क से कई गुना ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं, जो सीधे-सीधे रंगदारी की श्रेणी में आता है।
  • मारपीट के पुख्ता सबूत: आप नेता प्रमोद शर्मा ने दावा किया है कि उनके पास पार्क प्रबंधन और ठेकेदार के गुर्गों द्वारा आम जनता और प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट करने का पूरा वीडियो साक्ष्य मौजूद है, जिसे वह जांच एजेंसी और अदालत के सामने पेश करेंगे।

प्रमोद शर्मा पर एफआईआर क्यों हुई और रीवा सिटी कोतवाली पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
जनता की आवाज उठाने और अवैध वसूली का भंडाफोड़ करने का दावा करने वाले प्रमोद शर्मा पर अब खुद पुलिस का कानूनी हंटर चल गया है। सोमवार को सिटी कोतवाली पुलिस ने पार्क प्रबंधन की शिकायत को आधार बनाते हुए आम आदमी पार्टी के नेता के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया।

पुलिस का आधिकारिक रुख और लगाए गए आरोप:
सिटी कोतवाली पुलिस का कहना है कि प्रमोद शर्मा ने बिना किसी पूर्व प्रशासनिक स्वीकृति के भीड़ जुटाई, जिससे पार्क परिसर की शांति व्यवस्था पूरी तरह भंग हो गई। पार्क प्रबंधन ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज की गई, जिससे सरकारी और सार्वजनिक काम प्रभावित हुआ। इसके साथ ही, पार्क परिसर के भीतर घुसकर हंगामा खड़ा करने और तोड़फोड़ की कोशिश के चलते सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला भी दर्ज किया गया है।

प्रमोद शर्मा का कड़ा पलटवार:
इस कार्रवाई पर तीखा विरोध दर्ज कराते हुए 'आप' नेता प्रमोद शर्मा ने कहा कि आम जनता की जेब काटने वाले लुटेरों और भ्रष्ट ठेकेदारों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करना हमारा संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने दावा किया कि मारपीट की शुरुआत पार्क के ठेकेदार के पाले हुए गुंडों ने की थी, जिसका वीडियो सबूत उनके पास है, लेकिन पुलिस प्रशासन पूरी तरह से रसूखदारों से मिला हुआ है, इसलिए हमें जानबूझकर फंसाने के लिए यह एकतरफा कार्रवाई की गई है।

सिटी कोतवाली थाना प्रभारी निशा मिश्रा ने इस पूरे मामले पर बयान देते हुए कहा कि शिकायत दर्ज कर ली गई है और मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। पुलिस वर्तमान में पार्क के सभी सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। जांच के बाद जो भी दोषी होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।

महा-बहस: क्या रीवा ईको पार्क का ठेकेदार अदालत से भी ऊपर है? कब जागेगा प्रशासन?
रीवा की आम जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जिस जगह को परिवार के साथ सुकून के दो पल बिताने के लिए बनाया गया था, उसे पैसों की हवस में विवादों का अखाड़ा बना दिया गया है। यहाँ कुछ बुनियादी सवाल हैं जो व्यवस्था के मुंह पर तमाचा हैं:

  • अगर आरटीआई और कोर्ट के नियमों के मुताबिक 100 रुपये की एंट्री फीस पूरी तरह से अवैध है, तो जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी इस खुली लूट पर आंखें मूंदकर क्यों बैठे हैं?
  • क्या किसी Private Agency या ठेकेदार को इतनी खुली छूट दी जा सकती है कि वो पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के साथ गाली-गलौज और लाठियों से हमला करे?

भले ही पुलिसिया कार्रवाई के बाद प्रमोद शर्मा पर कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा हो, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि वे झुकेंगे नहीं। वीडियो सबूतों और आरटीआई के पक्के दस्तावेजों के साथ इस पूरे मामले को अब उच्च न्यायालय (High Court) में ले जाने की रणनीति बनाई जा रही है। अब देखना यह होगा कि रीवा पुलिस इस मामले में निष्पक्षता से न्याय करती है या रसूखदार ठेकेदारों के रसूख के आगे घुटने टेक देती है।

 

dfgg

जनता का सवाल: क्या रीवा ईको पार्क प्रशासन अदालत से भी ऊपर है?

क्या ईको पार्क प्रशासन कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहा है और आगे क्या होगा?

रीवा की जनता अब इस बात से बेहद आक्रोशित है कि जिस स्थान को पर्यटन और मानसिक शांति के लिए बनाया गया था, वह अब विवादों का अखाड़ा बन चुका है। मुख्य सवाल प्रक्रियात्मक और कानूनी है:

  • यदि कोर्ट और आरटीआई के नियमों के अनुसार 100 रुपये की वसूली गलत है, तो प्रशासन ने अब तक इस पर संज्ञान क्यों नहीं लिया?

  • क्या किसी निजी एजेंसी या ठेकेदार को यह छूट दी जा सकती है कि वह पर्यटकों के साथ अभद्रता और मारपीट करे?

मामला दर्ज होने के बाद भले ही प्रमोद शर्मा बैकफुट पर दिख रहे हों, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि वह इस लड़ाई को ठंडे बस्ते में नहीं जाने देंगे। वीडियो साक्ष्यों और आरटीआई के दस्तावेजों के साथ इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने की तैयारी की जा रही है। अब देखना यह होगा कि रीवा पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच कर पाती है या रसूखदार ठेकेदारों के दबाव में यह मामला भी दबा दिया जाएगा।

Related Topics

Latest News