डीईओ कार्यालय के 28 लाख अनुरक्षण मद घोटाले में कमिश्नर की पहली कार्यवाही, 2 विकेट गिरे

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा के स्कूल शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है। स्कूलों के रंगाई-पुताई, कायाकल्प और मरम्मत के लिए सरकार द्वारा भेजे गए बजट को डकारने के लिए अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर एक बड़ी साजिश रची. इस 28 लाख रुपये के घोटाले में कमिश्नर ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए दो मुख्य चेहरों को निलंबित कर दिया है. जिसे रीवा न्यूज़ मीडिया दैनिक समाचार ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था. 

मामला उजागर होने के बाद न सिर्फ दोषी अधिकारी-कर्मचारियों के हाथ-पांव फूलने लगे बल्कि वह नेता, विधायक, सांसद से लेकर मंत्री तक के दरवाजे पर दस्तक देने लगे. लेकिन शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक से लेकर प्रशासनिक अधिकारी इन किसी बातों को तवज्जों नहीं दिये एवं शासकीय राशि को हजम करने वाले ठेकेदार, प्राचार्य एवं अन्य अधिकारियों के खिलाफ पटाक्षेप करने का फैसला लिया. 

घोटाले की पृष्ठभूमि: बताया गया है कि लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल के पत्र क्रमांक/भवन/अ/9545/03/2025/3 दिनांक 24.4.2025 द्वारा समस्त शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों के अधोसंरचना के अनुरक्षण संबंधित निर्देश जारी कर रीवा जिले के लिये 50,00,000 (पचास लाख) अनुरक्षण मद में आवंटित किये गये थे. पत्र क्रमांक/उत्कृष्ट/56/9545/2025/128 भोपाल दिनांक 9.6.25 द्वारा जिले के 43 उत्कृष्ट विद्यालयों के लिये वित्तीय स्वीकृति प्रदान की जाकर राशि का व्यय सभी नियम/प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्य करने के निर्देश जारी किये गये थे. 

जांच में हुआ खुलासा: उक्त अनुरक्षण मद में रीवा जिले के लिए प्राप्त आवंटन राशि में अनियमित भुगतान संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर संयुक्त संचालक लोक शिक्षण रीवा संभाग रीवा नीरव दीक्षित द्वारा तीन सदस्यीय जांच दल का गठन कर जांच कराई गई. जांच प्रतिवेदन में पाया गया कि श्री विनय मिश्रा प्राचार्य शाउमावि गुढ़ जिला रीवा द्वारा निर्माण/मरम्मत तथा अन्य कार्य ठेकेदार श्री सत्यव्रत तिवारी निवासी ग्राम देवरा पो. खटखरी जिला मऊगंज को दिया गया था. जांच दल द्वारा स्थल परीक्षण करने पर पाया गया कि प्राचार्य श्री मिश्रा द्वारा शासन के दिशा निर्देशों के विपरीत भंडार एवं क्रय 2015 यथा संशोधित नियम 2022 का पालन न करते हुए ठेकेदार एवं स्वयं को लाभ पहुँचाने के हिसाब से अधूरा कार्य होने के बावजूद कार्य का पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया तथा देयक का सत्यापन कर राशि का भुगतान करवाया गया. 

कार्यवाही की जद में आए अधिकारी: प्राचार्य के उक्त कृत्यों का परीक्षण एवं सत्यापन संयुक्त संचालक लोक शिक्षण द्वारा कराने पर प्रथम दृष्टया प्राचार्य श्री विनय मिश्रा दोषी एवं जालसाज पाये गये。 साथ ही प्राचार्य का उक्त कृत्य गंभीर वित्तीय अनियमितता एवं शासकीय धनराशि के गवन की श्रेणी में पाया गया जो म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 का स्पष्ट उल्लंघन है。संयुक्त संचालक रीवा संभाग रीवा के प्रस्ताव एवं प्राप्त जांच रिपोर्ट/अभिमत के आधार पर श्री विनय मिश्रा प्राचार्य शाउमावि गुढ़ जिला रीवा को कमिश्नर बी.एस. जामोद द्वारा पत्र क्रमांक/123/6/बी/2026 दिनांक 26.02.26 द्वारा तत्काल प्रभाव से निलंबित कर मुख्यालय जिला शिक्षा अधिकारी नियत किया गया. 

इसी प्रकार, अनुरक्षण राशि घोटाले/भुगतान के कार्यों की नस्ती एवं रखरखाव तथा प्रस्तुतीकरण का दायित्व जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रीवा में संलग्न श्री सुधाकर तिवारी (उच्च माध्यमिक शिक्षक) शाउमावि बदरांव जो कि एडीपीसी में एपीसी के पद पर तैनात थे, उनके द्वारा शासकीय नियम निर्देशों के प्रतिकूल कार्य करते हुए दस्तावेजों का परीक्षण किये बिना नस्ती तैयार कर भुगतान हेतु देयक प्रस्तुत किये गये. जो न केवल शासन को वित्तीय क्षति पहुँचाने के हिसाब से किया गया बल्कि स्वयं एवं ठेकेदार सत्यव्रत तिवारी के लाभार्थ प्रयोजन से किया गया. कमिश्नर बी.एस. जामोद ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर एपीसी सुधाकर तिवारी का मुख्यालय जेडी कार्यालय नियत किया. 

कमिश्नर रीवा बी.एस. जामोद की छोटी मछली पकड़ने पर उठे सवाल, इन पर कब होगी कार्यवाही?

घोटाले की जांच में कई और बड़े नाम शामिल हैं जिन पर अभी कार्यवाही होना शेष है:

  • पुष्पा पुसाम: तत्कालीन लेखा अधिकारी
  • नवीन श्रीवास्तव: तत्कालीन रमसा प्रभारी डीईओ कार्यालय रीवा
  • प्राचार्य खैरा व प्राचार्य दुआरी सहित तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी सुदामा लाल गुप्ता शामिल हैं

फाइल दबाने के आदी हो चुके हैं कमिश्नर रीवा

अप्रैल माह में होना है सेवानिवृत्त: रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद की वर्तमान स्थिति की तुलना पूर्व एवं निलंबन से बहाल बने प्राचार्य सुदामा लाल गुप्ता मार्तण्ड क्रमांक 2 से की जा रही है. जैसे सुदामा लाल गुप्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के फर्जीवाड़े की जांच खुद ही बैठाई और अपने आपको पाक साफ बताने के लिए स्वयं सिविल लाइन थाना में जाकर जिनके हस्ताक्षर से अनुकंपा नियुक्ति की एवं जिस अटैच बाबू रमाप्रसन्नधर द्विवेदी जिनके इशारे पर (लक्ष्मी नारायण प्राप्त करने के बाद) आंख मूंदकर हस्ताक्षर करते थे खुद उनके ही खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी.

लेकिन जांच के बाद अपने ही बिछाये जाल में सुदामा लाल गुप्ता फंसे और निलंबित हुए. कमिश्नर की आवभगत कर छोटे पद से बड़े पद पर आसीन हुये थे. 

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