रीवा में बिजली विभाग के प्रभारी कार्यपालन अभियंता पर लटकी तलवार: एक साल में करोड़ों की संपत्ति और आलीशान बंगले के निर्माण से मचा हड़कंप
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य की राजधानी रीवा में इन दिनों बिजली विभाग के भीतर चल रहे कथित खेल की चर्चा शहर के हर कोने में है। मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के पश्चिम संभाग में बतौर प्रभारी कार्यपालन अभियंता पदस्थ भूपेश विक्रम सिंह अपनी कार्यशैली के साथ-साथ अकूत संपत्ति अर्जित करने को लेकर गंभीर विवादों के घेरे में आ गए हैं। विंध्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन द्वारा किए गए खुलासे और जमीनी पड़ताल के बाद यह सामने आया है कि अधिकारी ने रीवा में पदस्थापना के महज एक साल के भीतर ही महंगी पॉश कॉलोनी में बेशकीमती जमीन खरीदकर उसपर आलीशान बंगला खड़ा करना शुरू कर दिया है।
शांति विला कॉलोनी में करोड़ों की जमीन और आलीशान निर्माण
विद्युत कंपनी के पश्चिम संभाग की कमान संभालने वाले भूपेश विक्रम सिंह द्वारा रीवा के पॉश इलाके शांति विला करहिया में जमीन खरीदने के दस्तावेज सामने आने के बाद से प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
रिकॉर्ड के अनुसार, 5 जनवरी 2026 को रमाकांत विश्वकर्मा (निवासी करहिया) से यह जमीन भूपेश विक्रम सिंह के नाम पर दर्ज कराई गई। कागजों में सरकारी मूल्यांकन के आधार पर इस 3363 वर्गफीट प्लॉट की कीमत करीब 39 लाख रुपए दर्शाई गई है। स्थानीय जानकारों के मुताबिक शांति विला जैसी विकसित और महंगी कॉलोनी में जमीन का वास्तविक भाव प्रति वर्गफीट काफी ऊंचा है।
बाजार दर के हिसाब से इस भूखंड की कीमत एक करोड़ रुपए के आसपास बैठती है। इतनी महंगी जमीन खरीदने के बाद अब उस पर आधुनिक और लग्जरी बंगले का निर्माण करवाया जा रहा है, जिसमें डिजाइन और मटीरियल पर ही करोड़ों रुपए खर्च होने का अनुमान है।
सीमित वेतन और बेहिसाब निवेश: आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोप
एक सरकारी अधिकारी की मासिक सैलरी और उसके द्वारा किए जा रहे भारी-भरकम निवेश के बीच का यह भारी अंतर कई तीखे सवाल खड़े कर रहा है। कार्यपालन अभियंता का मासिक वेतन लगभग एक लाख दस हजार रुपए के आसपास है। इस आय के दायरे में किसी भी वित्तीय संस्थान या बैंक द्वारा इतने बड़े पैमाने पर संपत्तियां खरीदने के लिए लोन मिलना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं माना जाता।
अधिकारी की सेवा का कार्यकाल भी अभी बहुत लंबा नहीं हुआ है, ऐसे में रीवा में पोस्टिंग मिलते ही इतने कम समय में विला और प्लॉट जैसी संपत्तियां बनाना सीधे तौर पर आय से अधिक संपत्ति के दायरे में आता है। चर्चा इस बात की भी है कि इस पूरी संपत्ति खरीद-फरोख्त प्रक्रिया में जुड़े कुछ लोग भी विभाग के कामकाज से जुड़े रहे हैं, जिससे मिलीभगत की आशंका और पुख्ता हो जाती है।
आउटसोर्स कर्मचारियों की मनमानी छंटनी और नियुक्ति घोटालों के आरोप
विभागीय जानकारों और कर्मचारियों का आरोप है कि संपत्ति का यह साम्राज्य केवल वेतन की बचत से नहीं, बल्कि पश्चिम संभाग में हुए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल और अवैध वसूली का नतीजा है। रीवा में कार्यभार संभालते ही प्रभारी कार्यपालन अभियंता द्वारा सबसे ज्यादा संख्या में पुराने आउटसोर्स कर्मचारियों को सेवा से बाहर का रास्ता दिखाया गया।
निकाले गए कर्मियों की जगह पर नए लोगों को रखने को लेकर कथित तौर पर ऑडियो वायरल हुए हैं, जिनमें कंपनी के स्तर पर पदों के सौदे होने और एक-एक लाख रुपए तक वसूले जाने की बात सामने आई थी। क्षेत्र में कागजों पर विकास कार्य स्वीकृत दिखाए गए, लेकिन मैदानी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत रही। बनकुइयां क्षेत्र में ग्रीन ट्रिब्यूनल के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अवैध रूप से चल रहे क्रशर्स की बिजली न काटने जैसे मामलों ने भी उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में शिकायत की सुगबुगाहट
बिजली विभाग के इस चर्चित अधिकारी के खिलाफ अब भ्रष्टाचार रोधी एजेंसियों का दरवाजा खटाखट्ठाए जाने की पूरी तैयारी हो चुकी है। स्थानीय स्तर पर मजदूर संगठनों और जागरूक नागरिकों द्वारा उनके कार्यकाल की संपत्तियों, तबादलों और वित्तीय लेन-देन के पुख्ता दस्तावेजों को जुटाया जा रहा है। यदि इन आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हुई, तो विंध्य क्षेत्र के ऊर्जा विभाग में अब तक का यह सबसे बड़ा प्रशासनिक घोटाला साबित हो सकता है।