विकास या विनाश? 'कोरेक्स सिटी' से 'नशे का गढ़' बना रीवा: सरकार ने युवाओं के भविष्य का किया 527 करोड़ में सौदा!

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। अब तक रीवा को 'कोरेक्स सिटी' के कलंक से पहचान मिली थी, लेकिन अब सरकार ने इस पहचान को और गहरा करने की तैयारी कर ली है। रीवा और मऊगंज जिले में शराब के कारोबार ने इस साल जो रफ़्तार पकड़ी है, उसने विकास के सारे दावों को पीछे छोड़ दिया है। आबकारी विभाग ने इस बार राजस्व वसूली की ऐसी 'इबारत' लिखी है कि जानकार हैरान हैं। अकेले दुकानों की नीलामी से ही सरकार ने 527 करोड़ रुपये जुटा लिए हैं।

20% महंगी दुकानें, फिर भी ठेकेदारों में मची होड़

हैरानी की बात यह है कि सरकार ने इस बार आबकारी नीति के तहत दुकानों के आरक्षित मूल्य में 20 फीसदी की भारी बढ़ोतरी की थी। उम्मीद थी कि इतनी महंगी दरों पर ठेकेदार पीछे हटेंगे, लेकिन हुआ इसके उलट। रीवा और मऊगंज की लगभग सभी दुकानें हाथों-हाथ उठ गईं। ठेकेदारों ने न केवल बढ़ी हुई कीमतों को स्वीकार किया, बल्कि कई समूहों के लिए तो आरक्षित मूल्य से भी कई गुना अधिक बोली लगाई। यह इस बात का सीधा संकेत है कि रीवा में शराब की मांग और खपत किस कदर बढ़ चुकी है।

लक्ष्य से 21 करोड़ अधिक की 'बंपर' कमाई

आबकारी विभाग ने रीवा और मऊगंज के 17 समूहों से 505 करोड़ रुपये की कमाई का लक्ष्य रखा था। लेकिन जब बोलियां खुलीं, तो विभाग की बांछें खिल गईं। उम्मीद से 21 करोड़ रुपये ज्यादा यानी कुल 526.99 करोड़ रुपये में दुकानों का सौदा हुआ। पिछले साल यह आंकड़ा 420 करोड़ था, यानी एक ही साल में 100 करोड़ से ज्यादा का उछाल।

स्वास्थ्य बजट से बड़ा 'नशे का कारोबार'

यह आंकड़ा किसी को भी विचलित कर सकता है कि सरकार रीवा के लोगों के स्वास्थ्य पर जितना खर्च नहीं करती, उससे कहीं अधिक कमाई यहाँ शराब बेचकर करने जा रही है। दुकानों की नीलामी से 527 करोड़ और फिर साल भर की बिक्री से मिलने वाला टैक्स मिलाकर यह कारोबार 1000 करोड़ रुपये को पार कर जाएगा। सवाल यह है कि क्या यह 'विकास' युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने की कीमत पर जायज है?

अब 'होम डिलीवरी' जैसा होगा हाल!

इतनी ऊँची कीमतों पर दुकानें लेने के बाद अब ठेकेदार अपनी लागत वसूलने के लिए साम-दाम-दंड-भेद का सहारा लेंगे। आशंका जताई जा रही है कि अब गाँव-गाँव और घर-घर तक शराब पहुँचाने की कोशिश की जाएगी। पुलिस और प्रशासन जो अब तक अवैध शराब पर लगाम लगाने का दावा करते थे, उनके लिए इस वैध 'सिंडिकेट' को रोकना अब नामुमकिन सा होगा।

नीलामी का पूरा ब्यौरा: किसने, कितने में मारी बाजी?

शराब समूह आरक्षित मूल्य (करोड़) बिक्री मूल्य (करोड़) मुख्य ठेकेदार
समान (Saman) 55.44 65.16 आशीष बघेल
सिरमौर चौराहा 59.58 59.58 जय महाकाल
पीटीएस (PTS) 51.75 53.58 चंदेल ट्रेडर्स
ट्रांसपोर्ट नगर 51.11 53.68 जय महाकाल
मऊगंज (Mauganj) 28.44 32.44 बीकेडी ट्रेडर्स
इटौरा (Itaura) 36.32 38.38 जय महाकाल
सेमरिया 28.98 29.51 प्रकाश सिंह
बैकुंठपुर 30.48 29.27 माँ भगवती

(नोट: डभौरा, हनुमना और चाकघाट जैसे कुछ समूहों में आरक्षित मूल्य से कम बोली आई है, जिसे स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है।)

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