रीवा में सोए हुए सिस्टम पर करारा तमाचा : मुआवजा शून्य, दादागिरी फुल! सड़कों पर तड़प रहा अनशनकारी, क्या भोपाल तक पहुंचेगी चीख?
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य अंचल के रीवा जिले अंतर्गत गुढ़ तहसील का ग्राम बेला इन दिनों बड़े औद्योगिक और प्रशासनिक विवाद का केंद्र बन गया है। अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस द्वारा बिछाई जा रही हाईटेंशन पावर ट्रांसमिशन लाइन परियोजना के खिलाफ स्थानीय किसानों का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिला प्रशासन और प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद जब जमीनी स्तर पर कोई हल नहीं निकला, तो प्रभावित किसान परिवार का एक युवक सोमवार को 5वें दिन दोबारा आमरण अनशन पर बैठ गया।
लगातार भोजन न करने और मानसिक तनाव के कारण युवक का शारीरिक स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है। धरना स्थल पर मौजूद अन्य ग्रामीण युवाओं ने अचेत हो रहे आंदोलनकारी के हाथ-पैर की मालिश कर उसे संभालने का प्रयास किया। इसके बावजूद पीड़ित युवक ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उसकी कृषि भूमि का सही मूल्य और उचित मुआवजा तय नहीं हो जाता, तब तक वह अपना सत्याग्रह समाप्त नहीं करेगा।

पानी भरे गड्ढे में बैठकर विरोध: पिता का संदेश– 'हक के लिए शहीद हो जाना'
विरोध प्रदर्शन का यह दौर बेहद संवेदनशील और भावुक मोड़ पर पहुंच चुका है। बेला गांव में खेतों के बीच से होकर गुजर रही इस पावर लाइन के विरोध में युवक अनोखे तरीकों से अपना आक्रोश जता रहा है। कभी वह जेसीबी मशीन द्वारा खोदे गए पानी भरे गड्ढों में जल-सत्याग्रह करने को मजबूर है, तो कभी भीषण गर्मी और धूप के बीच जमीन पर लेटकर तंत्र को जगाने की कोशिश कर रहा है।
सोमवार को दोबारा अनशन की शुरुआत करते समय युवक का धैर्य जवाब दे गया और वह फूट-फूट कर रो पड़ा। अत्यंत भावुक होकर उसने बताया कि उसके पिता ने उसे हिम्मत देते हुए कहा है— "चाहे अपने हक के लिए शहीद होना पड़े तो हो जाना, लेकिन अन्याय के आगे झुकना मत।" युवक ने यह भी साझा किया कि पिछले पांच दिनों से उसके भूखे रहने के कारण उसकी मां और पूरा परिवार गहरे सदमे व भुखमरी के मुहाने पर है, किंतु अधिकारों की रक्षा के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी।
मुआवजे की फाइल अटकी, कलेक्टर के आश्वासन के बाद भी नहीं निकला समाधान
यह संपूर्ण विवाद 'एमपी पावर ट्रांसमिशन पैकेज-दो' योजना के तहत स्थापित किए जा रहे विशालकाय टावरों और हाईटेंशन तारों से जुड़ा हुआ है। गुढ़ क्षेत्र के बेला और आसपास के कई गांवों के किसानों का आरोप है कि कार्यदायी संस्था और निजी कंपनी द्वारा कृषि भूमियों पर बिना वैधानिक सहमति, बिना मुआवजा निर्धारण और बिना किसी ठोस लिखित दस्तावेज के जबरन निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है।
इससे पहले भी जब पीड़ित किसान ने पानी में उतरकर अपनी जान जोखिम में डालते हुए विरोध दर्ज कराया था, तब प्रशासनिक अमला और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। उस समय रीवा कलेक्टर द्वारा मामले के त्वरित निराकरण और न्यायसंगत मुआवजा दिलाए जाने का ठोस आश्वासन देकर अनशन तुड़वाया गया था। हालांकि, हफ्तों बीत जाने के बाद भी जब धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और कंपनी का काम जारी रहा, तो पीड़ित किसान को मजबूरन दोबारा धरने की राह चुननी पड़ी।
जीतू पटवारी ने फोन पर जाना हाल: कांग्रेस ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग
बेला गांव में किसान के अनशन और बिगड़ती तबीयत की खबर राज्य स्तर पर पहुंचते ही प्रदेश की राजनीति में भी हड़कंप मच गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अनशनकारी युवक से दूरभाष पर सीधा संपर्क साधा और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली। पटवारी ने किसान को सांत्वना देते हुए आश्वासन दिया कि मुख्य विपक्षी दल इस संकट की घड़ी में उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ा है।
कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य सरकार और रीवा जिला प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए मांग की है कि कॉरपोरेट कंपनियों के दबाव में किसानों की उपेक्षा तुरंत बंद की जाए। पार्टी ने मांग रखी है कि प्रशासन अविलंब हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य को रुकवाए और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए कृषि भूमि का उचित मुआवजा तय करे। वहीं, इस पूरे विवाद पर फिलहाल स्थानीय पुलिस-प्रशासन और संबंधित कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।