कलेक्टर का 'हंटर': रीवा के गैस गोदामों पर पुलिस का पहरा, दलालों का खेल खत्म; सुबह 8 बजे से तहसीलदार खुद संभालेंगे कमान!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर में रसोई गैस सिलेंडर की मांग ने इस कदर जोर पकड़ा है कि वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। हालात यह हैं कि अजगरहा स्थित गैस गोदाम के बाहर उपभोक्ताओं की 1 किलोमीटर लंबी कतार देखी जा रही है। शहर के मैदानी इलाकों से लेकर बाहरी गोदामों तक, लोग सुबह की पहली किरण के साथ खाली सिलेंडर लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। इस भीड़ और बढ़ते तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन को अब कड़े कदम उठाने पड़े हैं।
कलेक्टर का बड़ा फैसला: अब 'अफसरों की मौजूदगी' में बँटेगा गैस
भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए कलेक्टर प्रतिभा पाल ने वितरण प्रणाली को अपने हाथ में ले लिया है। अब शहर के प्रमुख एलपीजी गोदामों पर केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि राजस्व और पुलिस अधिकारी मुस्तैद रहेंगे। कलेक्टर ने साफ कर दिया है कि जनता को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए और दलालों का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तैनात किए गए 'निगरानी दल' – किसे कहाँ मिली जिम्मेदारी?
प्रशासन ने शहर के विभिन्न गैस गोदामों के लिए नोडल अधिकारियों की सूची जारी की है:
सुबह 8 बजे से 'फील्ड' पर रहेंगे तहसीलदार, 5 कर्मचारी देंगे साथ
आदेश के अनुसार, नियुक्त किए गए राजस्व अधिकारी रोजाना सुबह 8 बजे अपने आवंटित गोदामों पर पहुँच जाएंगे। उनके साथ 5 कर्मचारियों की टीम होगी जो सिलेंडरों की अनलोडिंग से लेकर उनके वितरण तक की निगरानी करेगी। हर दिन की रिपोर्ट सीधे उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी ताकि स्टॉक और सप्लाई में पारदर्शिता बनी रहे।
"दलालों से रहें सावधान" – कलेक्टर की अपील और पुलिस को अल्टीमेटम
कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जिले के नागरिकों से भावुक और सख्त अपील की है। उन्होंने कहा है कि उपभोक्ता किसी भी दलाल या बिचौलिए के झांसे में आकर अधिक दाम न चुकाएं। कलेक्टर ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सादी वर्दी में भी फील्ड पर रहें और जहाँ भी कालाबाजारी की सूचना मिले, तुरंत एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करें।
क्यों बिगड़े हालात? मैदानी और अजगरहा में भारी दबाव
रीवा के मैदानी क्षेत्र और अजगरहा में मांग अचानक बढ़ने से एजेंसियों के पास स्टॉक का प्रबंधन मुश्किल हो गया था। घंटों इंतजार के बाद भी सिलेंडर न मिलने से लोगों में आक्रोश था, जिसे शांत करने के लिए अब 'खाकी' और 'प्रशासन' को मैदान में उतरना पड़ा है।
क्या सुधरेगी व्यवस्था?
राजस्व अधिकारियों की इस तैनाती से उम्मीद जताई जा रही है कि कतारें कम होंगी और पात्र उपभोक्ताओं को समय पर गैस मिल सकेगी। हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह व्यवस्था कितने दिनों तक प्रभावी रहती है और क्या दलालों के सिंडिकेट को वाकई तोड़ा जा पाएगा।