रीवा ग्राउंड रिपोर्ट: सार्वजनिक मार्ग पर अवैध कब्जे से कई गांवों का संपर्क टूटा, कलेक्टर ने दिए तत्काल सीमांकन के निर्देश
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के बहुरी बांध क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और ग्रामीणों की परेशानी से जुड़ा हुआ मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक सार्वजनिक मार्ग को कथित तौर पर निजी खेत में मिला देने (जोत देने) के कारण कई गांवों का मुख्य सड़क से संपर्क पूरी तरह कट गया है। इस मनमानी के चलते हजारों ग्रामीणों के सामने आवागमन का एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है। अपनी जायज मांग को लेकर मंगलवार को भारी संख्या में ग्रामीण रीवा कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने प्रशासनिक मुखिया के सामने अपनी आपबीती साझा की।

आम रास्ता जोतने से टूटा संपर्क: ग्रामीणों की बढ़ी मुश्किलें
बहुरी बांध क्षेत्र के स्थानीय निवासियों के मुताबिक, जिस मार्ग का उपयोग वे पीढ़ियों से मुख्य धारा से जुड़ने के लिए करते आ रहे थे, उसे अचानक एक पक्ष द्वारा अपने खेत का हिस्सा बताते हुए ट्रैक्टर से जोत दिया गया। इस भू-विवाद के कारण सड़क का नामोनिशान मिट चुका है और राहगीरों के पैदल निकलने तक की जगह नहीं बची है।
कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाने की मजबूरी
मुख्य मार्ग के इस तरह अचानक बंद हो जाने से ग्रामीणों के पास अब कोई सीधा रास्ता नहीं बचा है। अपने दैनिक कार्यों, बाजार और अस्पताल जाने के लिए लोगों को कई किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे उनके समय और धन दोनों की भारी बर्बादी हो रही है।
कीचड़ और लंबे चक्कर ने बढ़ाई आफत (स्कूली बच्चे और मरीज परेशान)
बरसात के इस मौसम में वैकल्पिक रास्तों की स्थिति भी बदतर हो चुकी है। खेतों के बीच से बने अस्थायी रास्ते पूरी तरह दलदल और कीचड़ में तब्दील हो गए हैं। इस वजह से सबसे अधिक परेशानी निम्नलिखित वर्गों को हो रही है:
- स्कूली बच्चे: कीचड़ से सने रास्तों और लंबे चक्कर के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
- किसान: अपने खेतों तक कृषि उपकरण और खाद-बीज ले जाने में असमर्थ हैं।
- बुजुर्ग और मरीज: आपातकालीन स्थिति में गांव के भीतर एम्बुलेंस या कोई अन्य वाहन नहीं आ पा रहा है, जिससे मरीजों की जान पर बन आई है।
कलेक्ट्रेट में गूंजी आवाज: जनसुनवाई में कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
इस समस्या से आजिज आ चुके सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मंगलवार को जिला मुख्यालय पहुंचे। साप्ताहिक जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से मुलाकात की और उन्हें एक लिखित ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई। ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि यदि इस मार्ग को जल्द ही अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
राजस्व विभाग से पैमाइश की मांग और पीड़ित ग्रामीणों का दर्द
शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि राजस्व विभाग की एक विशेष टीम को तुरंत मौके पर भेजा जाए। यह टीम विवादित भूमि का आधिकारिक सीमांकन (पैमाइश) करे, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और सार्वजनिक रास्ते को दोबारा बहाल किया जा सके।
इस दौरान मौके पर मौजूद प्रभावितों ने अपनी पीड़ा कुछ इस तरह व्यक्त की:
- सविता साकेत: "यह मार्ग हमारी सहूलियत के लिए बरसों से खुला था। इसके बंद होने से हमारी पूरी दिनचर्या ठहर गई है और घरों से निकलना दूभर हो गया है।"
- राजकुमारी साकेत: "छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल भेजने में डर लगता है। बरसात के दिनों में कीचड़ भरे लंबे रास्तों से जाना किसी सजा से कम नहीं है।"
- शिवनारायण कोल: "यह पूरे गांव के हक की लड़ाई है। हम सिर्फ अपना पुराना रास्ता वापस मांग रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि प्रशासन इसमें देर नहीं करेगा।"
कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी का सख्त रुख: जांच और कार्रवाई के निर्देश
ग्रामीणों की सामूहिक पीड़ा और शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए रीवा कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने तत्काल एक्शन लिया है। उन्होंने जनसुनवाई में प्राप्त आवेदन को संबंधित क्षेत्र के एसडीएम और राजस्व अधिकारियों को अग्रसारित करते हुए मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की जांच करने के आदेश दिए हैं।
कलेक्टर ने आश्वस्त किया है कि यदि जांच के दौरान सार्वजनिक भूमि या पारंपरिक रास्ते पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा, अवरोध या अतिक्रमण पाया जाता है, तो प्रशासन पूरी सख्ती के साथ कानून के दायरे में कार्रवाई करेगा। अतिक्रमण को हटाकर आम रास्ते को दोबारा जनता के लिए खोल दिया जाएगा।