रीवा GST Raid: करोड़ों के टर्नओवर में लाखों की सेंधमारी, रीवा के इस ज्वेलर की निकली हेकड़ी, फोर्ट रोड के बाद अब चाकघाट में 'सर्जिकल स्ट्राइक', 12 अफसरों ने खोली पोल
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य क्षेत्र के व्यापारिक केंद्र रीवा में इस समय जीएसटी (State Tax Department) विभाग की सक्रियता ने बड़े कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। फोर्ट रोड की बड़ी दुकानों पर हालिया कार्रवाई के बाद अब विभाग ने छोटे कस्बों की बड़ी दुकानों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। चाकघाट की एक ज्वेलरी शॉप में हुई ताजा कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि विभाग के पास डेटा का पुख्ता जाल है और टैक्स चोरी करने वालों के लिए अब बचना मुश्किल है।
चाकघाट में 'शंकर ज्वेलर्स' पर अचानक दबिश: 30 घंटे का पूरा घटनाक्रम
शुक्रवार की शाम करीब 5:30 बजे, जब बाजार अपनी पूरी रफ़्तार में था, तभी जीएसटी की 12 सदस्यीय टीम ने चाकघाट स्थित 'शंकर ज्वेलर्स' के प्रतिष्ठान पर धावा बोल दिया। दुकानदार सत्येंद्र सोनी को संभलने का मौका भी नहीं मिला। यह जांच शुक्रवार पूरी रात और शनिवार पूरे दिन चलती रही। करीब 30 घंटों तक चली इस मैराथन जांच में स्टॉक, सेल रजिस्टर और बिलों का मिलान किया गया।
अब तक की सबसे तेज कार्रवाई: रिकॉर्ड समय में बड़ी रकम की वसूली
रीवा में जीएसटी की यह कार्रवाई अपने आप में खास रही। आमतौर पर विभाग की जांच कई दिनों तक चलती है, लेकिन यहाँ टीम की तैयारी इतनी जबरदस्त थी कि मात्र 30 घंटों के भीतर दुकानदार ने घुटने टेक दिए। सत्येंद्र सोनी ने अपनी अनियमितताओं को स्वीकार करते हुए 50 लाख रुपये की राशि सरेंडर कर दी। फोर्ट रोड की कार्रवाई में जहाँ 85 लाख रुपये वसूलने में लंबा वक्त लगा था, वहीं यहाँ प्रति घंटा वसूली का औसत बहुत अधिक रहा।
दुकानदार की मुश्किलें अभी कम नहीं हुईं: एक महीने का नोटिस जारी
50 लाख रुपये जमा कराने के बाद भले ही टीम वापस लौट गई हो, लेकिन सत्येंद्र सोनी की फाइल अभी बंद नहीं हुई है। टीम ने जाते-जाते उन्हें एक महीने का कारण बताओ नोटिस थमाया है। दबिश के दौरान टीम को कई ऐसे संदिग्ध दस्तावेज हाथ लगे हैं जिनका रिकॉर्ड दुकानदार उपलब्ध नहीं करा पाया। इन कागजातों की बारीकी से जांच की जा रही है, जिससे सरेंडर की गई राशि और भी बढ़ सकती है। यह पूरी कार्रवाई जेडी राकेश साल्वी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
आईटीसी (ITC) का खेल: आखिर कहाँ हो रही है टैक्स चोरी?
जांच में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि ज्वेलर्स टैक्स चोरी के लिए 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' (ITC) का सहारा ले रहे हैं। दुकानदार माल खरीदते समय तो टैक्स चुकाते हैं और उसका क्रेडिट ले लेते हैं, लेकिन जब वही माल ग्राहकों को ऊंचे दाम (Profit) पर बेचा जाता है, तो उस बढ़े हुए मूल्य पर बनने वाला टैक्स सरकार को नहीं चुकाया जा रहा। टर्नओवर को कम करके दिखाना और कच्चे बिलों पर व्यापार करना अब आम हो गया है, जिसे जीएसटी का 'डेटा एनालिटिक्स' आसानी से पकड़ रहा है।
12 सदस्यीय टीम: इन अधिकारियों ने संभाला मोर्चा
इस बड़ी रेड को अंजाम देने के लिए विभाग ने अपने अनुभवी अधिकारियों की टीम उतारी थी। कार्रवाई का मुख्य नेतृत्व राज्य कर अधिकारी पीयूष तिवारी ने किया। टीम में उनके साथ राज्य कर अधिकारी प्रसून मिश्र और शैलेन्द्र पाण्डेय शामिल थे। इसके अलावा जमीनी जांच और स्टॉक मिलान में इंस्पेक्टर अनिल बनाफर, हरिहर तिवारी, रवि प्रकाश तिवारी, सुभाष सिंह और दीपक द्विवेदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आगामी कार्रवाई की आहट: अगला नंबर किसका?
चाकघाट की इस कार्रवाई के बाद रीवा और आसपास के जिलों के ज्वेलर्स में दहशत का माहौल है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अभी कई और बड़े नाम रडार पर हैं। जिन दुकानों का टर्नओवर उनके द्वारा भरे गए रिटर्न से मेल नहीं खा रहा है, वहां कभी भी टीम पहुंच सकती है।
निष्कर्ष: व्यापार में पारदर्शिता ही एकमात्र बचाव
चाकघाट की यह घटना उन सभी व्यापारियों के लिए सबक है जो टैक्स चोरी को एक आसान रास्ता समझते हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में हर लेनदेन ट्रैक हो रहा है। अंततः व्यापारियों को भारी जुर्माने और कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए अपनी लेखा प्रणाली को पारदर्शी बनाना ही होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: जीएसटी रेड में 'रकम सरेंडर' करने का क्या मतलब है? उत्तर: जब कोई व्यापारी जांच के दौरान अपनी टैक्स चोरी स्वीकार कर लेता है और स्वेच्छा से बकाया टैक्स व जुर्माना भरने को तैयार हो जाता है, तो उसे 'राशि सरेंडर करना' कहा जाता है।
प्रश्न 2: शंकर ज्वेलर्स पर किस आधार पर छापा मारा गया? उत्तर: स्टॉक में विसंगति, टर्नओवर छिपाने और आईटीसी के गलत इस्तेमाल की गोपनीय सूचनाओं के आधार पर विभाग ने यह कदम उठाया।
प्रश्न 3: क्या 50 लाख देने के बाद ज्वेलर पर कोई और जुर्माना लगेगा? उत्तर: फिलहाल यह प्राथमिक वसूली है। नोटिस की अवधि के बाद यदि दस्तावेजों में और गड़बड़ी मिलती है, तो अतिरिक्त टैक्स और ब्याज देना पड़ सकता है।
प्रश्न 4: जीएसटी की कार्रवाई से बचने के लिए क्या सावधानी बरतनी चाहिए? उत्तर: व्यापारियों को हमेशा पक्के बिल पर सामान बेचना चाहिए, स्टॉक रजिस्टर मेंटेन रखना चाहिए और समय पर सही जीएसटी रिटर्न फाइल करना चाहिए।