रीवा RTO वसूली कांड: जब दलाल बोले 'दादा छोड़ दो', तब ड्राइवरों ने कहा 'हिसाब तो होकर रहेगा, RTO की नेमप्लेट लगाकर वसूली कर रहे दलालों को ड्राइवरों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित रीवा जिले का सोहागी पहाड़ एक बार फिर सुर्खियों में है। शुक्रवार की काली रात यहाँ किसी आम रात जैसी नहीं थी। नेशनल हाईवे-30 पर ट्रकों की गड़गड़ाहट के बीच अचानक चीख-पुकार और हंगामे की आवाजें गूंजने लगीं। यह गुस्सा उन ट्रक ड्राइवरों का था, जो सालों से आरटीओ (RTO) चेकिंग के नाम पर होने वाली अवैध वसूली से त्रस्त हो चुके थे। ड्राइवरों का धैर्य तब जवाब दे गया जब उनसे जबरन हजारों रुपयों की मांग की गई।
वसूली का खेल: कैसे भड़का ड्राइवरों का गुस्सा?
प्रत्यक्षदर्शियों और ड्राइवरों के अनुसार, कुछ लोग आरटीओ की नेम प्लेट लगी गाड़ियों में सवार होकर आए और ट्रकों को बीच रास्ते में रोकना शुरू कर दिया। चेकिंग के नाम पर कागजात मांगे गए और फिर शुरू हुआ 'एंट्री' के नाम पर पैसों का खेल। एक ड्राइवर ने बताया, "मुझसे 1000 रुपये ले लिए गए, जबकि मेरे पास सारे कागज पूरे थे।" जब कई ड्राइवरों के साथ ऐसा ही हुआ, तो उन्होंने अपनी गाड़ियां सड़क के बीचों-बीच खड़ी कर दीं। देखते ही देखते पूरा हाईवे जाम हो गया और एक संगठित विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया।






सोहागी पहाड़ का दंगल: जब ड्राइवरों के सब्र का बांध टूटा
MP-UP बॉर्डर पर उस रात की आंखों देखी...
जैसे ही ट्रक MP की सीमा में दाखिल हुए, 'आरटीओ' लिखी गाड़ी ने रास्ता रोक लिया। लेकिन इस बार मंजर कुछ अलग था। ड्राइवरों की आँखों में डर नहीं, गुस्सा था।
भीड़ का गर्जना: "कौन हो तुम? और किस हक से यहाँ सरेआम वसूली कर रहे हो?" (वसूली कर रहा दलाल हक्का-बक्का रह गया, जुबान जैसे तालू से चिपक गई। भीड़ ने उसे कॉलर से पकड़ा और घसीटते हुए सड़क के बीचों-बीच खड़ा कर दिया।)
पीड़ित ड्राइवर की दहाड़: "साहब, इसने अभी-अभी डरा-धमका कर मुझसे 1000 रुपये छीने हैं!" दूसरा ड्राइवर: "हाँ! मुझसे भी हजार की मांग कर रहा था, कह रहा था पैसा नहीं दोगे तो गाड़ी खड़ी करवा दूंगा।"
भीड़ का कड़ा सवाल: "आरटीओ की फर्जी नेम प्लेट लगाकर तुम यहाँ गुंडागर्दी कर रहे हो? जवाब दो, किसकी शह पर यह लूट मची है?" (दलाल थर-थर कांपने लगा, जवाब देने की हिम्मत ही नहीं बची थी।)
एक्शन मोड में जनता: इसी बीच भीड़ की नजर गाड़ी में बैठे दूसरे साथी पर पड़ी। उसे भी किसी अपराधी की तरह कमर से पकड़कर बाहर निकाला गया। दूसरा दलाल (घबराते हुए): "अरे भाई, धक्का-मुक्की मत करो, तमीज से बात करो।" भीड़ का पलटवार: "तमीज? लूटते वक्त तमीज कहाँ गई थी? पकड़ो इसे भी!"
जंगल की ओर भागमभाग: तभी शोर मचा— "वो देखो! पहला वाला अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल की तरफ भाग रहा है!" (दर्जनों लोग टॉर्च लेकर जंगल की ओर दौड़ पड़े। पूरे इलाके में 'पकड़ो-पकड़ो' की गूंज सुनाई देने लगी।)
सफ़ाई और गिड़गिड़ाहट: पकड़ा गया दूसरा शख्स पैंतरा बदलने लगा— "दादा, मैं तो बस ड्राइवर हूँ, मुझे कुछ नहीं पता।" आंध्रा से आया ड्राइवर (गुस्से में): "झूठ बोलता है! मैं हजारों किलोमीटर का सफर तय करके हाथरस से यहाँ पहुँचा हूँ, और MP में घुसते ही इस लुटेरे ने मुझे रोक लिया। यही पैसे मांग रहा था।"
अंतिम प्रहार: "छोड़ना मत इसे! इसका वीडियो बनाओ, सबूत इकट्ठा करो और सीधा FIR करवाओ। आज इन लुटेरों का खेल खत्म होगा!"
'दलाल' की घेराबंदी और जंगल की तरफ भागमभाग
जैसे ही भीड़ जमा हुई, वसूली कर रहे कथित 'अधिकारी' और उनके दलाल घबरा गए। भीड़ ने एक व्यक्ति को पकड़ लिया जो खुद को आरटीओ विभाग का बता रहा था, लेकिन जब उससे आईडी कार्ड मांगा गया, तो उसके पास कोई जवाब नहीं था। इसी बीच, मौका पाकर 4-5 दलाल अंधेरे का फायदा उठाते हुए जंगल की ओर भागने लगे। स्थानीय लोगों और ड्राइवरों ने टॉर्च की रोशनी में उनका पीछा किया। पकड़े गए दलाल गिड़गिड़ाने लगे, "दादा मुझे छोड़ दो, मैं तो बस गाड़ी चलाता हूं।" लेकिन ट्रक ड्राइवरों का आरोप था कि यही लोग लाठियों के दम पर अवैध वसूली कर रहे थे।
रिटायर्ड कमांडो अरुण गौतम की एंट्री: अन्याय के खिलाफ मोर्चा
इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम मोड़ तब आया जब स्थानीय कांग्रेस नेता और रिटायर्ड आर्मी कमांडो अरुण कुमार गौतम मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि उन्हें एक ट्रक ड्राइवर का फोन आया था जो फोन पर रो रहा था। गौतम ने तुरंत ग्रामीणों को इकट्ठा किया और मौके पर पहुंचे।
गौतम का आरोप: "यहाँ गरीब ड्राइवरों को न केवल लूटा जाता है, बल्कि पैसे न देने पर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की जाती है। पुलिस की नाक के नीचे यह धंधा फल-फूल रहा है।"
पुलिस की कार्रवाई और यातायात की स्थिति
हंगामे की सूचना मिलने के बाद सोहागी पुलिस मौके पर पहुंची। करीब दो घंटे तक चले इस ड्रामे के कारण हाईवे के दोनों ओर ट्रकों की कई किलोमीटर लंबी कतार लग गई थी। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद भीड़ को शांत कराया और एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे गाड़ी की जांच कर रहे हैं जिस पर आरटीओ की प्लेट लगी थी और यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ये लोग असली कर्मचारी थे या निजी गुंडे।
क्या प्रशासन अब भी मौन रहेगा?
सोहागी पहाड़ की यह घटना केवल एक रात का हंगामा नहीं है, बल्कि उस भ्रष्ट सिस्टम की पोल खोलती है जो नेशनल हाईवे पर 'वसूली तंत्र' के रूप में काम कर रहा है। ड्राइवरों की हिम्मत ने इस बार दलालों को भागने पर मजबूर कर दिया, लेकिन सवाल यह है कि क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगेगी? क्या गरीब ट्रक ड्राइवरों को बिना डरे सफर करने का अधिकार मिलेगा?