रीवा में खनन माफिया का नंगा नाच: सरकारी जमीन पर 60 फीट गहरे 'मौत के कुएं', दलाल और अफसर सब मौन : मकानों में दरारें, सड़कों के उड़े परखच्चे, क्या किसी बड़ी लाश का इंतजार कर रहा प्रशासन?
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले में प्रशासनिक नाक के नीचे खनन माफिया किस कदर बेखौफ हो चुका है, इसका सबसे भयावह उदाहरण वैजनाथ ग्राम पंचायत का हिनौती गांव है। यहाँ कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए न केवल सरकारी जमीनों को सरेआम लूटा जा रहा है, बल्कि बिना किसी वैधानिक अनुमति के बारूद का ऐसा खेल खेला जा रहा है जिससे पूरा इलाका थर्रा उठा है। हिनौती और उसके आसपास के गांवों में भारी अवैध उत्खनन और खतरनाक ब्लास्टिंग के कारण स्थानीय लोक-जीवन पूरी तरह से दहशत के साये में जीने को मजबूर है। दिन हो या रात, यहाँ भारी विस्फोटों की गूंज सुनाई देती है, जिससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि इंसानी जिंदगियां भी दांव पर लगी हुई हैं।
शासकीय भूमि पर डाका: खसरा नंबर 44 और 46 में 60 फीट गहरे मौत के कुएं
हिनौती गांव में चल रहे इस अवैध कारोबार की सबसे हैरान करने वाली सच्चाई यह है कि यह किसी निजी भूमि पर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर शासकीय भूमि (सरकारी जमीन) पर संचालित हो रहा है। गांव के खसरा क्रमांक 44 और 46 की सरकारी जमीन पर माफिया ने पूरी तरह कब्जा कर लिया है।
खनन माफिया ने इस सरकारी चारागाह और पहाड़ी भूमि को खोदकर लगभग 60 फीट से ज्यादा गहरा कर दिया है। यह गहरे गड्ढे अब राहगीरों और मवेशियों के लिए साक्षात 'मौत के कुएं' बन चुके हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि यह उत्खनन मुख्य सड़क के बिल्कुल किनारे किया जा रहा है, जिससे यहाँ से गुजरने वाले वाहनों के किसी भी दिन इस गहरी खाई में गिरने और एक बड़ी दुर्घटना होने की शत-प्रतिशत संभावना बनी हुई है।
कागजों में बंद, मौके पर चालू: क्रेशर संचालन और लाखों के फर्जी बिलों का बड़ा खेल
इस पूरे अवैध उत्खनन के पीछे जो सबसे बड़ा प्रशासनिक और आर्थिक घोटाला सामने आया है, वो है क्रेशर का अवैध संचालन। ग्रामीणों के गंभीर आरोपों के अनुसार, खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन के दस्तावेजों में इस स्टोन क्रेशर को पूरी तरह से 'बंद' और सील दिखाया गया है। लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
"कागजों में जिसे प्रशासन बंद बताकर अपनी पीठ थपथपा रहा है, वह क्रेशर मौके पर हर दिन चालू रहता है। वहाँ न केवल पत्थरों की पिसाई हो रही है, बल्कि हर महीने लाखों रुपये के फर्जी बिल जारी कर भारी आर्थिक लेनदेन को अंजाम दिया जा रहा है।" यह सीधे तौर पर खनिज विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों और माफिया के बीच की तगड़ी जुगलबंदी को उजागर करता है, जहां कागजों पर कानून का राज है और मौके पर सिर्फ और सिर्फ माफिया का सिक्का चल रहा है।
नरौगरा-हिनोती मार्ग पर सुरक्षा संकट: मकानों में दरारें, सड़कों के उड़ रहे परखच्चे
वीडियो और ग्राउंड रिपोर्ट से साफ हुआ है कि प्रभावित क्षेत्र की जो मुख्य सड़क नरौगरा और हिनोती गांव को आपस में जोड़ती है, उसकी हालत अब चलने लायक नहीं बची है। बरसों से हो रहे गहरे होल्स और भारी कमर्शियल ब्लास्टिंग के कारण पूरी सड़क के परखच्चे उड़ चुके हैं।
मकानों में आई दरारें: भारी विस्फोटों से होने वाले कंपन (Vibration) के कारण आसपास के गरीब ग्रामीणों के पक्के और कच्चे मकानों की दीवारों में चौड़ी-चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। कई मकान ढहने की कगार पर हैं।
सड़कों का क्रैकिंग: मुख्य मार्ग के बीचों-बीच बड़े-बड़े क्रैक्स (दरारें) आ चुके हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों का निकलना दूभर हो गया है।
उड़ते पत्थर: जब ब्लास्टिंग होती है, तो पत्थरों के टुकड़े हवा में उड़कर दूर-दूर तक गिरते हैं, जिससे खेत में काम करने वाले किसान और राहगीर हमेशा गंभीर रूप से घायल होने के डर से सहमे रहते हैं।
महिला की मौत भी न रोक सकी बारूद की गूंज: हत्या का आरोपी फरार, फिर भी चल रहा धंधा
खनन माफिया की क्रूरता और बेखौफ अंदाज़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी क्षेत्र में पहले भी एक महिला की दर्दनाक मृत्यु इस अवैध खनन की वजह से हो चुकी है। उस घटना के बाद भी बारूद की गूंज शांत नहीं हुई। हद तो यह है कि इस क्रेशर और उत्खनन को संचालित करने वाले मुख्य संचालक सचिन कुशवाहा के खिलाफ पहले से ही हत्या और हत्या के प्रयास जैसे कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।
वर्तमान में मुख्य आरोपी पुलिस रिकॉर्ड में 'फरार' चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद उसके गुर्गे ग्रामीणों के उग्र विरोध के बीच धड़ल्ले से अवैध उत्खनन को अंजाम दे रहे हैं। जो भी ग्रामीण इस अवैध काम के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, उसे जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं। ग्रामीणों को पूरी तरह से असहाय और भयभीत कर दिया गया है।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर गंभीर सवाल: रीवा कलेक्ट्रेट से न्याय की आस में बेबस ग्रामीण
स्थानीय पुलिस और खनिज विभाग की भूमिका इस पूरे मामले में शुरू से ही संदिग्ध और कमजोर दिखाई दे रही है। ग्रामीणों द्वारा तहसील से लेकर जिला स्तर तक दर्जनों शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन हर बार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी माफिया के हौसलों को और बढ़ा देती है।
अब थक-हारकर हिनौती और वैजनाथ पंचायत के पीड़ित ग्रामीण रीवा कलेक्ट्रेट का दरवाजा खटखटा रहे हैं। ग्रामीणों की साफ मांग है कि इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। कागजी धोखाधड़ी को बंद कर मौके पर चल रहे क्रेशर को तुरंत सील किया जाए और सरकारी जमीन को माफिया के चंगुल से मुक्त कराकर फरार आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाए।
क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा रीवा का खनिज और पुलिस महकमा?
ग्राम पंचायत वैजनाथ के हिनौती गांव की यह स्थिति चीख-चीखकर प्रशासनिक सड़न की कहानी बयां कर रही है। शासकीय भूमि खसरा 44, 46 पर हो रहा यह तांडव केवल पर्यावरण का विनाश नहीं है, बल्कि स्थानीय जनता के मानवाधिकारों का हनन है। यदि रीवा प्रशासन ने अब भी अपनी गहरी नींद से जागकर इस अवैध क्रेशर और ब्लास्टिंग को पूरी तरह बंद नहीं कराया, तो नरौगरा-हिनोती मार्ग पर किसी भी दिन एक ऐसा बड़ा और हृदयविदारक हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग की होगी।