सावधान! आपकी जान 'फर्जी' हाथों में? SSMC के डीन की मेहरबानी या बड़ा घोटाला? टॉपर को धक्के मारकर निकाला, फर्जी सर्टिफिकेट वालों को थमाई कुर्सी! जांच कमेटी के सामने कापें प्रभारी

 
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फर्जी सर्टिफिकेट और अभद्रता मामले में घिरे प्रभारी और टेक्नीशियन।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा का गौरव कहे जाने वाले सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार मामला करोड़ों की मशीनों का नहीं, बल्कि उन मशीनों को चलाने वाले टेक्नीशियनों की 'नियम विरुद्ध' भर्ती का है। श्याम शाह मेडिकल कॉलेज (SSMC) प्रशासन द्वारा की गई नियुक्तियों में भारी धांधली और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, जिसकी जांच अब तेज हो गई है।

शिकायत के बाद जांच कमेटी का 'एक्शन मोड': कौन-कौन हुआ तलब?
भर्ती प्रक्रिया में हुए फर्जीवाड़े की गूंज अब प्रशासनिक गलियारों में साफ सुनाई दे रही है। मिली जानकारी के अनुसार, जांच कमेटी ने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सीटी स्कैन प्रभारी देवेश मिश्रा और एमआरआई सेंटर के टेक्नीशियन आशिष गौतम को नोटिस जारी कर तलब किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईएनटी विभाग के एचओडी डॉ. सुरेन्द्र मोपाचे की अध्यक्षता में चार सदस्यीय टीम गठित की गई है। इस टीम ने शिकायतकर्ता और आरोपियों के बयान दर्ज करना शुरू कर दिया है।

टॉपर को बाहर का रास्ता, सिफारिशी को मिली कुर्सी: अंजलि चौधरी का आरोप
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब एसएसएमसी की ही पूर्व छात्रा और दो बैच की टॉपर रही अंजलि चौधरी ने मोर्चा खोला। अंजलि का आरोप है कि उनका चयन सीटी-एमआरआई टेक्नीशियन के पद पर योग्यता के आधार पर हुआ था, उनकी केवाईसी और जॉइनिंग भी करा ली गई थी। लेकिन अचानक नई 'सिफारिशों' के आने पर उन्हें बिना किसी ठोस कारण के बाहर कर दिया गया।

अंजलि ने आरोप लगाया कि उन्हें न केवल नौकरी से निकाला गया, बल्कि सीटी स्कैन प्रभारी द्वारा उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग कर उन्हें अपमानित भी किया गया। न्याय की आस में उन्होंने कलेक्टर, कमिश्नर और सीएम हेल्पलाइन का दरवाजा खटखटाया है।

फर्जी सर्टिफिकेट का बड़ा खुलासा: कैसे मिली आशीष गौतम को नौकरी?
शिकायत में सबसे चौंकाने वाला दावा आशीष गौतम की नियुक्ति को लेकर है। आरोप है कि आशीष ने फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की है। अंजलि चौधरी का दावा है कि आशीष के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के हिंदी और अंग्रेजी नंबरों में भारी अंतर है, जो सीधे तौर पर धोखाधड़ी की ओर इशारा करता है। जांच टीम अब इन दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

20 करोड़ की मशीनों के नाम पर नियुक्तियों का 'बंदरबांट'
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ₹13 करोड़ की एमआरआई और संजय गांधी अस्पताल में ₹7 करोड़ की सीटी स्कैन मशीनें लगाई गई थीं। इन मशीनों के संचालन के लिए टेक्नीशियन की जरूरत थी। कार्यकारिणी की बैठक में भर्ती को मंजूरी तो मिली, लेकिन आरोप है कि डीन और प्रबंधन ने भर्ती नियमों को ताक पर रख दिया। योग्यता के बजाय सिफारिशों को प्राथमिकता दी गई, जिससे पात्र उम्मीदवारों का भविष्य अंधकार में डूब गया।

जांच टीम में शामिल प्रमुख चेहरे
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने निष्पक्ष जांच के लिए एक हाई-प्रोफाइल टीम बनाई है, जिसमें निम्नलिखित अधिकारी शामिल हैं:

  • अध्यक्ष: डॉ. सुरेन्द्र मोपाचे (HOD, ENT)
  • सदस्य: डॉ. हरिओम गुप्ता
  • सदस्य: डॉ. संतोष सिंह
  • प्रशासनिक सदस्य: रवि सिंह बघेल (सहायक अस्पताल प्रबंधक)

अभद्रता और अहंकार के घेरे में देवेश मिश्रा
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के सीटी स्कैन प्रभारी देवेश मिश्रा पर केवल गलत नियुक्ति के ही नहीं, बल्कि महिला उम्मीदवार के साथ दुर्व्यवहार के भी गंभीर आरोप हैं। जांच टीम ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है कि आखिर किस आधार पर उन्होंने एक नियुक्त कर्मचारी को बाहर किया और उनके साथ कैसा व्यवहार किया।

क्या दोषियों को मिलेगी सजा?
रीवा के स्वास्थ्य महकमे में फैला यह भ्रष्टाचार का दीमक अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। अगर जांच कमेटी ईमानदारी से काम करती है, तो कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। अंजलि चौधरी जैसे मेधावी छात्रों का संघर्ष यह तय करेगा कि रीवा के इन बड़े अस्पतालों में योग्यता की जीत होगी या फिर सिफारिशों का बोलबाला बना रहेगा।

FAQ - भर्ती फर्जीवाड़ा से जुड़े आपके सवाल
1. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रीवा में भर्ती घोटाला क्या है?
यह मामला सीटी स्कैन और एमआरआई टेक्नीशियन की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी, फर्जी सर्टिफिकेट का उपयोग और पात्र उम्मीदवारों को हटाकर सिफारिशी लोगों को रखने से जुड़ा है।

2. जांच कमेटी का नेतृत्व कौन कर रहा है?
जांच की कमान ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) डॉ. सुरेन्द्र मोपाचे के हाथों में है।

3. आशीष गौतम पर क्या आरोप लगे हैं?
आशीष गौतम पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी पैरामेडिकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के आधार पर टेक्नीशियन की नौकरी प्राप्त की है।

4. अंजलि चौधरी ने किन अधिकारियों से शिकायत की है?
अंजलि ने कलेक्टर, कमिश्नर, डीन, एसडीएम और सीएम हेल्पलाइन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

5. क्या आरोपियों के बयान दर्ज हो चुके हैं?
जी हां, जांच कमेटी ने प्रभारी देवेश मिश्रा और आशीष गौतम को नोटिस जारी कर उनके शुरुआती बयान दर्ज कर लिए हैं।

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