"कसाई बन गए डॉक्टर! ₹50 हजार वसूलने के बाद भी रीवा नेशनल हॉस्पिटल के स्टाफ ने बीमार महिला और परिवार को लाठियों से सूता; वीडियो वायरल

 
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रीवा नेशनल हॉस्पिटल में आग के दौरान संकरे रास्ते पर कबाड़ होने से मची भगदड़, ₹50 हजार जमा कराने के बाद भी स्टाफ ने मरीज और महिलाओं को लाठियों से पीटा।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा से एक रूह कंपा देने वाला और इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। मंगलवार की शाम समान चौराहा स्थित नेशनल हॉस्पिटल में शॉर्ट सर्किट के बाद भड़की आग ने बुधवार को एक नया और हिंसक मोड़ ले लिया। सोशल मीडिया पर एक दर्दनाक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें अस्पताल के कई रसूखदार कर्मचारी एक लाचार मरीज और उसके तीमारदारों को जानवरों की तरह लाठी-डंडों से पीटते दिख रहे हैं। पीड़ित परिवार लहूलुहान और गंभीर हालत में न्याय की भीख मांगने समान थाने पहुंचा है। इस पूरी घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था के नाम पर चल रही गुंडागर्दी का पर्दाफाश कर दिया है।

इमरजेंसी द्वार में कबाड़ से रास्ता बंद था।

इमरजेंसी द्वार में कबाड़ से रास्ता बंद था।

संकरे एग्जिट गेट पर कबाड़ और आग का तांडव 
संकरे रास्ते और कबाड़ के कारण कैसे फंसी मरीजों की जान?
मंगलवार शाम जब नेशनल नर्सिंग होम में शॉर्ट सर्किट से धुआं उठना शुरू हुआ, तो अंदर भर्ती मरीजों के फेफड़ों में दम घुटने लगा। अस्पताल में वैसे तो कहने के लिए आपातकालीन निकास (Emergency Exit) द्वार था, लेकिन असलियत बेहद भयावह थी:

  • रास्ते में पड़ा था कबाड़: अस्पताल प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण एग्जिट द्वार के संकरे रास्ते पर भारी मात्रा में कबाड़ और फालतू सामान ठूंस कर रखा गया था।
  • रास्ता ब्लॉक होने से मची भगदड़: जब सुनीता मिश्रा नाम की महिला मरीज और उनके परिजनों ने उस रास्ते से बाहर भागने की कोशिश की, तो वे कबाड़ में उलझ गए।
  • कर्मचारियों की बदतमीजी: रास्ता खाली करने और बाहर जाने देने की गुहार लगाने पर वहां मौजूद स्टाफ ने मरीजों को सहूलियत देने के बजाय उन्हें रोकना शुरू कर दिया। इसी बात को लेकर जब पीड़ितों ने विरोध जताया, तो अस्पताल के गुंडा तत्वों ने गाली-गलौज करते हुए हिंसक रुख अख्तियार कर लिया।

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₹50,000 वसूले और बदले में दी लाठियां: सुनीता मिश्रा का दर्द 
इलाज के नाम पर लूट और महिलाओं पर अत्याचार
लहूलुहान हालत में पुलिस स्टेशन पहुंची पीड़ित महिला मरीज सुनीता मिश्रा ने रोते हुए अस्पताल के क्रूर चेहरे को बेनकाब किया। उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के नाम पर उनके परिवार से ₹50,000 से ज्यादा की मोटी रकम पहले ही जमा करवा ली थी।

"आग लगने के बाद जब हमारी जान दांव पर थी, तब हमें बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा था। जब हमने अपनी जान बचाने के लिए जिद की, तो मोटी रकम ऐंठने वाले इन कसाइयों ने हमारे पूरे परिवार पर लाठी-डंडों और सरियों से हमला कर दिया। मैं एक महिला हूँ, बीमार हूँ, लेकिन उन दरिंदों ने मुझ पर भी तरस नहीं खाया और बेरहमी से पीटा।" - सुनीता मिश्रा (पीड़िता)

बुधवार को सामने आया वीडियो सुनीता मिश्रा के आरोपों पर मुहर लगाता है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि आधा दर्जन से अधिक भारी-भरकम कर्मचारी मिलकर अकेले मरीज और उसके लड़कों को दौड़ा-दौड़ा कर पीट रहे हैं।

पुलिसिया जांच और नेशनल अस्पताल प्रबंधन का यू-टर्न 
समान थाना पुलिस की कार्रवाई
मामला तूल पकड़ते ही समान थाना प्रभारी विजय सिंह ने मोर्चा संभाला। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित परिवार की हालत वाकई गंभीर थी और उनके शरीर पर डंडे के गहरे जख्म थे। पुलिस ने पीड़ितों का मेडिकल टेस्ट करवाकर शिकायती आवेदन पत्र ले लिया है। थाना प्रभारी ने आश्वासन दिया है कि वायरल वीडियो में जितने भी चेहरे लाठियां भांजते नजर आ रहे हैं, उन सभी को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।

अस्पताल प्रबंधन के झूठे दावे और डॉ. अखिलेश पटेल की सफाई
इतने पुख्ता वीडियो साक्ष्य सामने आने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन अपनी खाल बचाने में जुटा है। अस्पताल के डॉ. अखिलेश पटेल ने मीडिया के सामने आकर यह तो माना कि उनके यहाँ आग लगी थी और शॉर्ट सर्किट हुआ था, लेकिन उन्होंने मारपीट की बात से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया। डॉक्टर का दावा है कि महिला मरीज और उनके बेटों द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और झूठे हैं। हालांकि, वायरल वीडियो ने डॉक्टर के इन दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।

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खुलासा: बिना फायर NOC के यमराज घर बने रीवा के अस्पताल 
इस खूनी वारदात ने रीवा शहर के भीतर चल रहे अवैध और असुरक्षित निजी अस्पतालों के काले कारोबार को भी उजागर कर दिया है।

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अस्पतालों की मनमानी और प्रशासनिक लापरवाही की हकीकत:

  • बिना फायर NOC के धड़ल्ले से संचालन: आंतरिक सूत्रों और जांच में यह बात सामने आई है कि रीवा के अधिकांश बड़े और छोटे निजी अस्पताल आज भी बिना फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (फायर NOC) के मरीजों को भर्ती कर रहे हैं।
  • मौत का कुआं बने इमरजेंसी गेट: नामी अस्पतालों में भी आपातकालीन द्वार इतने संकरे हैं कि अगर कोई बड़ी आपदा आ जाए, तो एम्बुलेंस तो दूर, दो लोग भी एक साथ बाहर नहीं निकल सकते। ऊपर से इन रास्तों को कबाड़ घर बना दिया गया है।
  • नो पार्किंग, सिर्फ जाम: इन अस्पतालों के पास अपनी खुद की कोई अंडरग्राउंड पार्किंग व्यवस्था नहीं है। मरीजों के परिजनों के वाहन सड़कों पर खड़े होते हैं, जिससे अस्पताल के सामने चौबीसों घंटे जाम की स्थिति बनी रहती है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों का समय पर पहुंचना नामुमकिन हो जाता है।

अगर रीवा प्रशासन ने इन अवैध और मानक विहीन अस्पतालों पर तुरंत ताला नहीं लगाया, तो नेशनल हॉस्पिटल जैसा छोटा हादसा कल किसी बड़े श्मशान घाट में तब्दील हो सकता है।

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