रीवा कलेक्टर का एक्शन: गड़रिया में कटना शुरू हुए खेत तो 12 लोगों पर FIR, लेकिन नदी सुखाने वालों पर क्यों मेहरबान है सिस्टम?

 
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रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने गड़रिया में बिना अनुमति खेत बेचने पर 12 लोगों पर केस दर्ज कराने के निर्देश दिए, जबकि बीहर नदी को सुखाने वाले बड़े कॉलोनाइजरों की फाइलें ठंडे बस्ते में पड़ी हैं।

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर और ग्रामीण इलाकों में अवैध तरीके से बसाई जा रही कॉलोनियों पर नकेल कसने के नाम पर प्रशासन का दोहरा रवैया साफ नजर आ रहा है। एक तरफ जहां बीहर नदी का प्राकृतिक बहाव रोककर, ग्रीन बेल को पाटकर और जल-स्रोतों का अस्तित्व खतरे में डालकर आलीशान अवैध कॉलोनियां और मैरिज गार्डन बनाने वाले बड़े रसूखदार कॉलोनाइजरों पर प्रशासनिक कार्रवाई पर ब्रेक लगा हुआ है, वहीं दूसरी ओर अपनी व्यक्तिगत व पारिवारिक जरूरतों के चलते अपनी कृषि भूमि के छोटे-छोटे टुकड़े बेचने वाले सामान्य नागरिकों पर पुलिस प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के कड़े आदेश दे दिए गए हैं।

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गड़रिया गांव में 12 भू-स्वामियों पर एफआईआर दर्ज कराने का आदेश
तहसील हुजूर नगर अंतर्गत वृत्त कोठी के पटवारी हल्का नंबर 33 स्थित ग्राम गड़रिया में अवैध प्लॉटिंग का मामला सामने आने के बाद रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कड़ी कार्रवाई की है। हुजूर एसडीएम द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर न्यायालय ने ग्राम गड़रिया के 12 भू-स्वामियों के खिलाफ संबंधित पुलिस थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने का स्पष्ट आदेश जारी किया है। प्रशासन का मानना है कि इन भू-स्वामियों ने बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति, बिना डायवर्सन और बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNCP) की स्वीकृति के कृषि योग्य जमीनों को अवैध रूप से बेचकर अनधिकृत कॉलोनी स्थापित की है।

सीएम हेल्पलाइन की शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
गड़रिया क्षेत्र में बिना किसी योजना के बसाई गई इस बस्ती में नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। कॉलोनी में नाली, सड़क और जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण वहां निवास कर रहे परिवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। जब परेशान रहवासियों ने अपनी समस्याओं को लेकर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई, तब प्रशासनिक अमला हरकत में आया। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचे थे और पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करने के पश्चात एसडीएम हुजूर को विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे।

पारिवारिक जरूरतों और इलाज के लिए बेचे थे खेत के टुकड़े
जांच प्रक्रिया के दौरान कलेक्टर न्यायालय द्वारा संबंधित सभी 12 भू-स्वामियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। इसमें देवेंद्र कुमार तिवारी को छोड़कर शेष सभी भू-स्वामियों ने अपने लिखित जवाब प्रस्तुत किए। भू-स्वामियों ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि उनकी मंशा कोई व्यावसायिक अवैध कॉलोनी बसाने की नहीं थी, बल्कि अपनी बेटियों की शादी, पारिवारिक कर्ज चुकाने और गंभीर बीमारियों के इलाज का खर्च उठाने के लिए उन्होंने समय-समय पर अपने खेत के छोटे-छोटे टुकड़े बेचे थे। हालांकि, कलेक्टर ने इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी भू-स्वामी के पास कॉलोनी विकास या भू-परिवर्तन (डायवर्सन) की कोई वैध अनुमति नहीं थी, इसलिए उनके जवाब असंतोषजनक पाए गए।

दोषी भू-स्वामियों की संपत्ति कुर्क करने और रजिस्ट्री पर रोक के निर्देश
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने भू-स्वामियों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाने के साथ-साथ कई कड़े निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि गड़रिया में निवास कर रहे लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए दोषी भू-स्वामियों की अन्य स्थानों पर स्थित अचल संपत्तियों और अविक्रीत भूमियों को तत्काल कुर्क कर कब्जे में लिया जाए। इसके अतिरिक्त, संबंधित जमीनों के खसरे में 'अवैध कॉलोनी' दर्ज करने, नामांतरण और नए विक्रय पत्रों (रजिस्ट्री) के पंजीयन पर पूर्ण रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। विद्युत मंडल को नए कनेक्शन न देने, ग्राम पंचायत को किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति न देने और कॉलोनी सेल को शासन को हुई आर्थिक क्षति की वसूली करने के कड़े आदेश जारी किए गए हैं।

बीहर नदी का बहाव रोकने वाले बड़े कॉलोनाइजरों की फाइलें हुई डंप
गड़रिया के छोटे भू-स्वामियों पर हुई इस त्वरित कार्रवाई के विपरीत, रीवा शहर की जीवनदायिनी बीहर नदी को पाटकर अवैध निर्माण करने वाले बड़े कॉलोनाइजरों के मामले में प्रशासन की चुप्पी पर नागरिक सवाल उठा रहे हैं। तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने बीहर नदी के प्राकृतिक बहाव को बाधित कर अवैध कॉलोनी बसाने पर मेसर्स शांति इंफ्रास्ट्रक्चर एवं शांति विलास इंफ्रा प्रोजेक्ट के संचालक उपेंद्र सिंह तथा करहिया में अवैध प्लॉटिंग करने वाली शाहीन बेगम और अमरीन अंसारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और उनकी संपत्तियों को शासकीय कब्जे में लेने के सख्त आदेश दिए थे। हालांकि, कमिश्नर न्यायालय द्वारा इस कार्रवाई पर स्थगन दिए जाने के बाद से यह पूरी फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है और अब उसी पाटे गए नदी क्षेत्र में धड़ल्ले से कमर्शियल मैरिज गार्डन तक बनाए जा रहे हैं।

इन 12 भू-स्वामियों के खिलाफ हुई दंडात्मक कार्रवाई
प्रशासनिक जांच में दोषी पाए जाने के बाद जिन 12 भू-स्वामियों के विरुद्ध पुलिस प्रकरण दर्ज कराने और कुर्का की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, उनके नाम इस प्रकार हैं:

  • गिरिवरधारी पिता गया प्रसाद दुबे (निवासी जिवला, तहसील रायपुर कर्चुलियान)
  • रामलली दुबे पिता चंद्रशेखर प्रसाद दुबे (निवासी बेलाऊहन टोला समान, रीवा)
  • गोमती प्रसाद पिता रामगोपाल दुबे (निवासी जिवला, तहसील रायपुर कर्चुलियान)
  • श्रीनिवास विश्वकर्मा पिता हजारीलाल विश्वकर्मा
  • श्रीमती प्रेमवती पत्नी हजारीलाल विश्वकर्मा
  • अनीता विश्वकर्मा पुत्री हजारीलाल विश्वकर्मा
  • संजू उर्फ अंजू पुत्री हजारीलाल विश्वकर्मा
  • चिड्डी पिता हजारीलाल विश्वकर्मा (निवासी गड़रिया, तहसील हुजूर नगर)
  • श्रीमती धनवंती रजक पत्नी मधुवन (निवासी रीवा, तहसील हुजूर)
  • श्रीमती पूनम पत्नी रामानुज विश्वकर्मा (निवासी मढ़ीकला, तहसील मनगवां)
  • सुरेश कुमार उपाध्याय पिता सूर्य प्रसाद उपाध्याय (निवासी रतहरी, तहसील हुजूर नगर)
  • देवेंद्र कुमार तिवारी पिता रुद्र प्रताप तिवारी (निवासी रायपुर कर्चुलियान)

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