रीवा बना 'उड़ता पंजाब'? जिम्मेदार 'मस्त', माफिया 'जबरदस्त': मां-बहनें कैसे निकलें बाहर? रात भर शराब की बिक्री और ओवररेटिंग का खेल, अपराध का बढ़ा ग्राफ
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। जिसे कभी अपनी संस्कृति और सादगी के लिए जाना जाता था, आज वह शराब माफियाओं और लापरवाह प्रशासन की भेंट चढ़ चुका है। शहर का हृदय स्थल कहा जाने वाला जय स्तंभ चौराहा (Jay Stambh) अब आधी रात के बाद "अवैध मधुशाला" में तब्दील हो जाता है। नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए यहाँ रात भर शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।

VIDEO: आधी रात को लगती है कतारें, शटर के नीचे से चलता है 'काला खेल'
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने रीवा पुलिस और आबकारी विभाग की पोल खोल कर रख दी है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दुकान का शटर गिरा हुआ है, लेकिन उसके पीछे से अवैध रूप से शराब की बोतलें बेची जा रही हैं। आधी रात को जय स्तंभ जैसे व्यस्त इलाके में पियक्कड़ों की लंबी लाइन लगी रहती है। सड़क किनारे खड़े होकर लोग जाम छलकाते हैं, शोर-शराबा करते हैं और राहगीरों के साथ अभद्रता करते हैं।
अधिवक्ता बी.के. माला का तीखा सवाल: अपराध के ग्राफ का जिम्मेदार कौन?
इस मामले पर रीवा के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.के. माला ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, "इन्हें रात भर शराब बेचने की अनुमति किसने दी? जब नियम सूर्यास्त के बाद एक निश्चित समय पर दुकान बंद करने के हैं, तो पुलिस की नाक के नीचे यह सब कैसे हो रहा है?" माला का तर्क है कि शहर में हाल के दिनों में बढ़ी चोरी, लूट और मारपीट की घटनाओं का सीधा संबंध इस अवैध शराब की बिक्री से है। जब अपराधियों को रात भर नशा उपलब्ध होगा, तो शहर की शांति भंग होना निश्चित है।

ओवररेटिंग और अवैध पैकारी: गरीब की जेब पर डाका
शिकायतें सिर्फ समय की नहीं हैं, बल्कि लूट की भी हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि यहाँ हर बोतल पर प्रिंट रेट से 20 से 50 रुपये ज्यादा वसूले जाते हैं। इसे 'ओवररेटिंग' का संगठित खेल कहा जा रहा है। अगर कोई ग्राहक विरोध करता है, तो दुकान पर मौजूद करिंदे मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। आखिर आबकारी विभाग इन दुकानों पर कार्रवाई करने के बजाय आँखों पर पट्टी क्यों बांधे बैठा है? क्या हर महीने पहुँचने वाला 'हफ्ता' उनकी जुबान बंद कर देता है?
रीवा का ट्रैफिक चौपट: बीच बाजार में शराब की दुकानें और अराजकता
शहर के मुख्य बाजारों की स्थिति बदतर हो चुकी है। जय स्तंभ से लेकर अस्पताल चौराहा तक, शराब की दुकानों के कारण ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। दुकानों के बाहर बेतरतीब खड़े वाहन और शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि शाम के बाद महिलाएं इस रास्ते से निकलने में डरती हैं। बीच बाजार शराब की दुकानें खोलकर प्रशासन ने जनता की सुरक्षा को ताक पर रख दिया है।
आबकारी विभाग का रटा-रटाया जवाब: "जांच करेंगे और कार्रवाई होगी"
जब भी मीडिया इन मुद्दों को उठाता है, आबकारी विभाग का एक ही घिसा-पिटा जवाब आता है— "मामला संज्ञान में आया है, टीम गठित कर जांच की जाएगी।" सवाल यह है कि जांच कब होगी? क्या वीडियो साक्ष्य काफी नहीं हैं? स्थानीय लोगों का खुला आरोप है कि ऊपर से नीचे तक सबको हिस्सा जाता है, इसीलिए यह अवैध कारोबार सीना ठोक कर चल रहा है। रीवा न्यूज़ मीडिया लगातार ऐसे मुद्दों को उठा रहा है, लेकिन रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?
प्रशासन की 'दिखावटी' सख्ती: क्या वाकई बदलेंगे हालात?
वीडियो वायरल होने के बाद अब पुलिस और आबकारी की संयुक्त टीम ने दबिश देने की बात कही है। लेकिन यह सख्ती सिर्फ कुछ दिनों की हेडलाइन बनकर न रह जाए, इसकी गारंटी कौन लेगा? रीवा की जनता अब खोखले आश्वासनों से ऊब चुकी है। उन्हें ठोस कार्रवाई चाहिए— उन अधिकारियों के खिलाफ भी जो अपनी ड्यूटी में कोताही बरत रहे हैं और उन ठेकेदारों के खिलाफ भी जो कानून को अपनी जेब में लेकर घूमते हैं।