क्योटी की गहराइयों में दफन हुई अंतिमा की सांसें: 4 दिन बाद पत्थरों के बीच से मिला 17 वर्षीय किशोरी का शव

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल क्योटी जलप्रपात (Kyoti Waterfall) से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। बीते मंगलवार को मौत की छलांग लगाने वाली 17 वर्षीय किशोरी का शव आखिरकार रविवार को बरामद कर लिया गया। चार दिनों तक पानी की लहरों और विशाल पत्थरों के बीच फंसी लाश को बाहर निकालने में बचाव दल को पसीने छूट गए। यह घटना सिरमौर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले राजगढ़ इलाके की है।

शव को नदी से बाहर निकालकर ले जाते हुए कर्मचारी।

शव को नदी से बाहर निकालकर ले जाते हुए कर्मचारी।

मौत के मुहाने पर 6 घंटे का संघर्ष: SDERF का मेगा रेस्क्यू 
रविवार की सुबह जब एसडीईआरएफ (SDERF) की छह सदस्यीय टीम घटनास्थल पर पहुँची, तो उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा था। जलप्रपात का निचला हिस्सा जितना खूबसूरत है, उतना ही खतरनाक भी। टीम ने स्पाइन बोर्ड और लाइफ रिंग की मदद से एक 'देसी बोट' (Improvised Boat) तैयार की। पानी के तेज बहाव के बीच जवान करीब 330 मीटर अंदर तक गए, जहाँ शव फंसा हुआ था। करीब 5 से 6 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद टीम शव तक पहुँचने में सफल रही।

क्योटी जलप्रपात से शव को चार दिन बाद निकाला जा सका।

क्योटी जलप्रपात से शव को चार दिन बाद निकाला जा सका।

8 डिग्री ज्यादा गर्मी और पथरीली दीवारें: रेस्क्यू में बाधा 
यह रेस्क्यू ऑपरेशन सामान्य नहीं था। विशेषज्ञों के अनुसार, जलप्रपात के चारों ओर मौजूद विशाल पत्थरों की वजह से वहां का तापमान सामान्य से करीब 8 डिग्री सेल्सियस अधिक बना हुआ था। उमस और भीषण गर्मी के बीच दुर्गम रास्तों से होते हुए शव को ऊपर तक लाना किसी चुनौती से कम नहीं था। अंततः स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग और जवानों के साहस ने इस कठिन मिशन को पूरा किया।

राजगढ़ की अंतिमा के रूप में हुई पहचान 
पुलिस के अनुसार, मृतका की पहचान अंतिमा यादव (17 वर्ष), पिता संतोष यादव के रूप में हुई है, जो सिरमौर जिले के राजगढ़ की निवासी थी। मंगलवार की शाम उसने किन कारणों से जलप्रपात में छलांग लगाई, इसका खुलासा अभी नहीं हो पाया है। सिरमौर थाना प्रभारी ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और मर्ग कायम कर जाँच शुरू कर दी गई है।

पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा की अनदेखी कब तक?
क्योटी और पूर्वा जैसे जलप्रपात सुसाइड पॉइंट बनते जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से यहाँ रेलिंग और गार्ड्स की तैनाती के दावे तो किए जाते हैं, लेकिन हकीकत में सुरक्षा के इंतजाम नाकाफी हैं। 17 साल की एक बच्ची का इस तरह दुनिया छोड़ जाना पूरे समाज और सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा करता है।

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