रीवा शराब नीलामी: समान नाका दुकान ने रचा इतिहास, ₹55 करोड़ की दुकान के लिए ठेकेदार ने लगा दी ₹65 करोड़ की बोली : अधिकारी रह गए दंग
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश की नई आबकारी नीति के तहत रीवा में शराब दुकानों की नीलामी का दूसरा चरण बेहद चौंकाने वाला रहा। जहाँ एक ओर शराब कारोबारी आरक्षित मूल्य (Base Price) बढ़ने का विरोध कर रहे हैं और नीलामी से दूरी बना रहे हैं, वहीं रीवा के एक बड़े ठेकेदार ने अपनी बोली से पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया है। 20% बढ़े हुए आरक्षित मूल्य के बावजूद रीवा की एक दुकान ने नीलामी के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
समान नाका का धमाका: ₹55 करोड़ की दुकान ₹65 करोड़ में पार
नीलामी के दूसरे चरण में गुरुवार को कुल 5 शराब समूहों के लिए ई-टेंडर आमंत्रित किए गए थे। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा समान नाका शराब समूह की रही। इस समूह के लिए सरकार ने 55.44 करोड़ रुपये का आरक्षित मूल्य तय किया था। लेकिन जब निविदा खुली, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। एक ठेकेदार ने इस दुकान को पाने के लिए 65 करोड़ रुपये की बोली लगा दी, जो सरकारी रेट से सीधा 10 करोड़ रुपये अधिक है।
कौन हैं रिकॉर्ड बनाने वाले ठेकेदार जितेंद्र सिंह?
समान नाका शराब समूह के लिए यह ऐतिहासिक बोली लगाने वाले व्यक्ति जितेंद्र सिंह हैं। जितेंद्र सिंह कोई नए खिलाड़ी नहीं हैं; वे वर्तमान में ट्रांसपोर्ट नगर शराब दुकान का भी संचालन कर रहे हैं। उनकी इस भारी-भरकम बोली ने साबित कर दिया है कि रीवा के प्राइम लोकेशन वाली दुकानों के लिए ठेकेदार बड़ा जोखिम लेने को तैयार हैं।
बरौली समूह की नीलामी और जायसवाल ग्रुप का कब्जा
नीलामी के इस दूसरे चरण में केवल दो ही समूहों को खरीदार मिल पाए। समान नाका के अलावा बरौली शराब समूह की भी नीलामी सफल रही। इस दुकान का आरक्षित मूल्य 12.22 करोड़ रुपये था, जिसे जायसवाल नाम के ठेकेदार ने 14 करोड़ रुपये की बोली लगाकर अपने नाम कर लिया। यहाँ भी विभाग को आरक्षित मूल्य से लगभग 1.78 करोड़ रुपये अधिक का राजस्व मिला है।
नीलामी का गणित: जहाँ आरक्षित मूल्य भी पड़ा छोटा
आबकारी विभाग को उम्मीद नहीं थी कि इस आर्थिक स्थिति में कोई ठेकेदार आरक्षित मूल्य से इतना ऊपर जाएगा। समान नाका (55.44 करोड़ बेस प्राइस) पर 65 करोड़ की बोली आना और बरौली (12.22 करोड़ बेस प्राइस) पर 14 करोड़ की बोली आना विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि, यह उत्साह केवल इन्हीं दो दुकानों तक सीमित रहा।
बाकी दुकानों का हाल: तीन समूहों को नहीं मिले खरीदार
जहाँ दो दुकानों ने रिकॉर्ड बनाया, वहीं दूसरी तरफ बैकुंठपुर (30.48 करोड़), डभौरा (16.67 करोड़) और देवतालाब (19.30 करोड़) शराब समूहों के लिए कोई भी ठेकेदार सामने नहीं आया। इन तीनों समूहों के लिए विभाग को अब तीसरे चरण की नीलामी करनी होगी। पहले चरण में भी रीवा की 7 में से केवल 4 दुकानों का ही फैसला हो पाया था।
नई आबकारी नीति का रीवा पर असर
रीवा का शराब बाजार इस समय दो हिस्सों में बँटा हुआ दिख रहा है। एक तरफ रसूखदार ठेकेदार प्राइम लोकेशंस के लिए करोड़ों लुटा रहे हैं, तो दूसरी तरफ ग्रामीण और बाहरी क्षेत्रों की दुकानों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। जितेंद्र सिंह की 65 करोड़ की यह बोली रीवा के इतिहास में अब तक की सबसे महंगी और चौंकाने वाली बोली बन गई है।