सिस्टम शर्मसार! जिस दफ्तर में की 4 साल नौकरी, उसी के बाबू ने वेतनवृद्धि के लिए मांग ली ₹7000 की रिश्वत

 
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रीवा लोकायुक्त ने सिंगरौली में जनजातीय कार्य विभाग के बाबू मुन्नालाल वर्मा को 5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा। 

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा लोकायुक्त संगठन ने एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की है। प्रशासनिक महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सिंगरौली जिले में पदस्थ जनजातीय कार्य विभाग के एक सीनियर क्लर्क (बाबू) को लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए दबोच लिया। आरोपी बाबू अपने ही विभाग के एक छोटे कर्मचारी (भृत्य) का जायज काम करने के बदले पैसों की डिमांड कर रहा था। लोकायुक्त की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

वेतनवृद्धि और एरियर के बदले मांगी थी घूस 
पूरा मामला सिंगरौली जिले के देवसर क्षेत्र का है। पीड़ित श्रवण तिवारी (उम्र 46 वर्ष), जो ग्राम नौढिया वीरान (थाना जियावन, तहसील देवसर) के निवासी हैं, वह एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना देवसर में साल 2020 से भृत्य (peon) के पद पर सेवाएं दे रहे हैं।

साल 2024 से 2026 के बीच उनका नियमानुसार वेतनवृद्धि (Salary Increment) और एरियर का भुगतान होना था। इस सरकारी लाभ को चालू करवाने के लिए वे सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग सिंगरौली के कार्यालय में चक्कर काट रहे थे। वहां उनकी मुलाकात विभाग के बाबू मुन्नालाल वर्मा (पिता अनसुइया वर्मा, उम्र 61 वर्ष) से हुई। बाबू मुन्नालाल वर्मा मूल रूप से मऊगंज जिले के हनुमना तहसील अंतर्गत ग्राम कोठार के रहने वाले हैं।

बाबू मुन्नालाल वर्मा ने भृत्य श्रवण तिवारी की फाइल आगे बढ़ाने, वेतनवृद्धि लगाने और एरियर की राशि बैंक खाते में भिजवाने के एवज में ₹7,000 की रिश्वत (Bribe) मांग ली। पीड़ित अपनी गाढ़ी कमाई में से घूस नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने कानून का रास्ता चुना।

लोकायुक्त एसपी ने ऐसे बिछाया जाल 
जब पीड़ित श्रवण तिवारी ने रिश्वत देने से मना कर दिया, तो उन्होंने इसकी लिखित शिकायत रीवा लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक (SP) सुनील कुमार पाटीदार से की। भ्रष्टाचार की शिकायत मिलते ही एसपी ने मामले को गंभीरता से लिया और सबसे पहले शिकायत की सत्यता की जांच (सत्यापन) करवाई।

लोकायुक्त की टीम ने एक गुप्त रिकॉर्डिंग और सत्यापन योजना के जरिए यह पुख्ता किया कि बाबू मुन्नालाल वर्मा वास्तव में काम के बदले ₹7,000 की मांग कर रहा है। मोलभाव के बाद मामला ₹5,000 में तय हुआ।

शिकायतकर्ता को विशेष केमिकल (फिनोलफ्थलीन पाउडर) लगे हुए ₹5,000 के नोट देकर बाबू के पास भेजा गया। वहीं 12 सदस्यीय लोकायुक्त टीम सादे कपड़ों में दफ्तर के आसपास तैनात हो गई। जैसे ही श्रवण तिवारी ने मुन्नालाल वर्मा के केबिन में जाकर उसे ₹5,000 सौंपे और बाबू ने पैसे अपनी जेब में रखे, वैसे ही इशारा मिलते ही लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। इसके बाद जब बाबू के हाथ कैमिकल युक्त पानी से धुलवाए गए, तो पानी का रंग गुलाबी हो गया, जो रिश्वत लेने का वैज्ञानिक प्रमाण है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज 
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी बाबू मुन्नालाल वर्मा को हिरासत में लेकर उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। इस पूरी सफल कार्रवाई का नेतृत्व ट्रैपकर्ता अधिकारी निरीक्षक एस. राम मरावी और निरीक्षक संदीप भदौरिया ने किया। उनके साथ इस पूरी कार्रवाई में 12 अन्य पुलिसकर्मी और स्वतंत्र गवाह शामिल रहे।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, आरोपी बाबू की उम्र 61 वर्ष है और वह सेवानिवृत्ति (Retirement) के बेहद करीब था, लेकिन इस कृत्य के बाद अब उसे सस्पेंशन (निलंबन) और जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

प्रशासनिक महकमे में रिश्वतखोरी की गंभीर समस्या 
यह कोई पहला मामला नहीं है जब रीवा लोकायुक्त ने किसी लोकसेवक को इस तरह घूस लेते पकड़ा हो। मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक भ्रष्टाचार की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं। अक्सर देखा जाता है कि कर्मचारियों के एरियर, पेंशन, जीपीएफ और वेतनवृद्धि जैसे बुनियादी हकों के लिए भी बाबू और अधिकारी पैसों की मांग करते हैं।

जनजातीय कार्य विभाग सिंगरौली के इस मामले में भी एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को अपने हक की राशि के लिए प्रताड़ित होना पड़ रहा था। लोकायुक्त की इस बड़ी कार्रवाई से उन सभी भ्रष्ट अधिकारियों को कड़ा संदेश गया है जो अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करते हैं, साथ ही इससे आम जनता का कानून पर भरोसा और मजबूत होगा।

रिश्वतखोरी के खिलाफ शिकायत कैसे दर्ज करें? 
यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी आपका जायज काम करने के बदले पैसों या किसी अन्य अनुचित लाभ की मांग करता है, तो आप चुप बैठने के बजाय इन तरीकों से शिकायत कर सकते हैं:

  • लोकायुक्त कार्यालय से संपर्क करें: अपने संभाग के लोकायुक्त पुलिस कार्यालय में जाकर लिखित शिकायत दें।
  • एंटी-करप्शन हेल्पलाइन: मध्य प्रदेश सरकार और लोकायुक्त के टोल-फ्री नंबरों पर शिकायत दर्ज कराएं।
  • सबूत इकट्ठा करें: यदि संभव हो, तो रिश्वत मांगने वाले अधिकारी की वॉयस रिकॉर्डिंग या वीडियो बना लें (हालांकि लोकायुक्त खुद भी सत्यापन रिकॉर्डिंग करवाता है)।
  • गोपनीयता: शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाती है, इसलिए बिना किसी डर के आगे आएं।

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