स्कूलों की मरम्मत के पैसों से अधिकारियों की ऐश! रीवा के 47 स्कूलों में 'बड़ा खेल', रिकॉर्ड जब्त होते ही विभाग में मचा हड़कंप : दागी स्कूलों को छोड़ 'सुरक्षित' ठिकानों पर घूमे भोपाल के अधिकारी
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा और शहडोल संभाग में स्कूलों की मरम्मत के नाम पर हुए करोड़ों के 'बंदरबांट' ने पूरे प्रदेश के शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विडंबना देखिए कि जहां मैहर और सतना में ताबड़तोड़ एफआईआर हुईं, वहीं रीवा में कमिश्नर की 'सॉफ्ट कार्रवाई' ने कई गंभीर सवाल पैदा कर दिए हैं। अब इस मामले की आग भोपाल तक पहुंचने के बाद लोक शिक्षण संचालनालय की टीम रीवा पहुंची है।
जांच या डैमेज कंट्रोल? 47 स्कूलों के रिकॉर्ड जब्त
रीवा के पीजीबीटी कॉलेज में भोपाल से आए अधिकारियों ने रीवा और शहडोल संभाग के सभी बीईओ, डीईओ और जेडी की जमकर क्लास लगाई। टीम ने 47 स्कूलों का पूरा रिकॉर्ड, मरम्मत कार्यों के फोटोग्राफ्स और खर्च का हिसाब जब्त कर लिया है। हालांकि, कागजों को जब्त करने के बाद जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
दो टीमें, चार स्कूल और महज 'खानापूर्ति' का खेल
भोपाल से आई 4 सदस्यीय टीम की कार्रवाई जमीनी स्तर पर महज एक 'डैमेज कंट्रोल' की कवायद नजर आई। ऐसा प्रतीत हुआ जैसे ये अधिकारी भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचने के बजाय मामले पर पर्दा डालने आए हों। टीम ने दो गुटों में बंटकर केवल 4 सुरक्षित स्कूलों का दौरा किया, जबकि उन स्कूलों से पूरी तरह दूरी बनाए रखी जहां भ्रष्टाचार की सबसे ज्यादा शिकायतें थीं।
टीम 1: अपर संचालक मनीष वर्मा, स्टेट प्रोग्रामर सुमनकांत जैन और सहायक संचालक राजेश मिश्रा ने बालक गोविंदगढ़ विद्यालय और कन्या पाण्डेन टोला स्कूल का निरीक्षण किया।
टीम 2: सहायक संचालक अभिजीत पाण्डेय, हिमांशु और डीईओ रामराज ने सिरमौर के मझिगवां और रायपुर कर्चुलियान के सगरा स्कूल का दौरा किया।
सवाल यह उठता है कि जिन स्कूलों में करोड़ों का गबन हुआ, जांच टीम वहां क्यों नहीं गई? क्या यह महज विधानसभा में हुए हंगामे को शांत करने की एक सोची-समझी रणनीति है?
मैहर-सतना में FIR, तो रीवा में ढिलाई क्यों?
संभाग के अन्य जिलों में इसी घोटाले पर कड़ा एक्शन लिया गया है:
मैहर: कलेक्टर की जांच के बाद दो दर्जन अधिकारियों और ठेकेदारों पर सीधे एफआईआर दर्ज हुई।
सतना: मऊगंज के ठेकेदार समेत कई लोगों पर मुकदमा हुआ।
रीवा: यहां कमिश्नर ने केवल 2 को निलंबित किया और 4 पर मामूली विभागीय जांच बैठा दी। इसी 'लीपापोती' के कारण मामला विधानसभा पहुंचा और विपक्ष ने सरकार को घेरा।
भविष्य की रणनीति: अब उपयंत्री करेंगे निगरानी
भ्रष्टाचार के इस बड़े खेल को रोकने के लिए अब नियमों में बदलाव की बात कही जा रही है। बैठक में तय हुआ कि अब स्कूलों के निर्माण या मरम्मत की मॉनीटरिंग सिर्फ प्राचार्यों के भरोसे नहीं होगी। जिला शिक्षा केंद्र में पदस्थ उपयंत्री (Sub-Engineers) अब हर ईंट और हर बिल की निगरानी करेंगे।