रेफर करने का नहीं था वक्त, तो रीवा के डॉक्टर ने दिल्ली से बुला लिए एक्सपर्ट्स; मिनर्वा हॉस्पिटल ने फिर रचा चिकित्सा का नया इतिहास! डॉ. शिरीष मिश्रा की सूझबूझ से टला बड़ा खतरा

 
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रीवा के मिनर्वा हॉस्पिटल में डॉ. शिरीष मिश्रा की सूझबूझ से बची मरीज कमल कुमार की जान। दिल्ली के सर्जन्स ने 24 घंटे में रीवा पहुंचकर की जटिल बायपास सर्जरी।

ऋतुराज द्विवेदी, रीवा/भोपाल। विंध्य क्षेत्र के चिकित्सा इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। रीवा के प्रसिद्ध मिनर्वा हॉस्पिटल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि गंभीर से गंभीर और जटिल कार्डियक मामलों में उनका कोई सानी नहीं है। अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी त्वरित सूझबूझ और अत्याधुनिक तकनीकों के बल पर एक ऐसे मरीज की जान बचाई है, जो मौत के बिल्कुल मुहाने पर खड़ा था। मरीज कमल कुमार सूरी को जब अस्पताल लाया गया था, तब उनकी हालत बेहद नाजुक थी, लेकिन मिनर्वा की टीम के लिए यह चुनौती एक नए मेडिकल चमत्कार की वजह बन गई।

एंजियोग्राफी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा: धमनियों में 90% से ज्यादा ब्लॉकेज 
मामले की शुरुआत तब हुई जब मरीज कमल कुमार सूरी को अचानक सीने में तेज दर्द (Chest Pain) की शिकायत हुई। परिजनों ने बिना समय गंवाए उन्हें रीवा के मिनर्वा हॉस्पिटल में भर्ती कराया। अस्पताल के वरिष्ठ और ख्यातिप्राप्त हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. शिरीष मिश्रा ने मरीज की गंभीर स्थिति को भांपते हुए तत्काल उनकी 'कोरोनरी एंजियोग्राफी' (Coronary Angiography) करने का निर्णय लिया।

जब एंजियोग्राफी की रिपोर्ट सामने आई, तो डॉक्टरों के भी होश उड़ गए। मरीज के हृदय की तीनों मुख्य धमनियों (Arteries) में 90 प्रतिशत से भी अधिक का भयंकर ब्लॉकेज था। इसका सीधा मतलब यह था कि कमल कुमार सूरी के दिल तक खून की सप्लाई लगभग बंद होने की कगार पर थी और उन्हें किसी भी सेकंड एक बड़ा और जानलेवा हार्ट अटैक (Massive Heart Attack) आ सकता था।

डॉ. शिरीष मिश्रा का मास्टरस्ट्रोक: 24 घंटे में दिल्ली से रीवा बुलाई गई स्पेशल टीम 
स्थिति इतनी नाजुक थी कि मरीज को रीवा से बाहर दिल्ली या मुंबई रेफर करना बेहद जोखिम भरा था; रास्ते में ही उनकी जान जा सकती थी। ऐसे में डॉ. शिरीष मिश्रा ने एक अभूतपूर्व और साहसिक फैसला लिया। उन्होंने मरीज को मिनर्वा हॉस्पिटल के ही आईसीसीयू (ICCU) में कड़ी निगरानी में रखा और परिजनों को ढांढस बंधाया कि वे मरीज को रीवा में ही सर्वश्रेष्ठ इलाज देंगे।

डॉ. मिश्रा ने तुरंत दिल्ली के शीर्ष कार्डियक सेंटर्स से संपर्क साधा। उनकी साख और त्वरित नेटवर्क का नतीजा यह रहा कि महज 24 घंटे के भीतर देश की राजधानी दिल्ली से विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक स्पेशल टीम चार्टर्ड व्यवस्था के जरिए रीवा पहुंच गई। इस हाई-प्रोफाइल टीम में देश के जाने-माने कार्डियक सर्जन डॉ. प्रीतम पाल और प्रख्यात कार्डियक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल थे।

6 घंटे चला जिंदगी और मौत का संघर्ष: अत्याधुनिक ओटी में सफल बायपास 
दिल्ली की टीम के रीवा पहुंचते ही मिनर्वा हॉस्पिटल के अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर (Operation Theatre) को पूरी तरह से एक्टिव कर दिया गया। डॉक्टरों की संयुक्त टीम की निगरानी में मरीज कमल कुमार सूरी की 'ओपन हार्ट बायपास सर्जरी' (Open Heart Bypass Surgery) शुरू हुई।

यह ऑपरेशन बेहद पेचीदा था क्योंकि धमनियां बहुत कमजोर हो चुकी थीं। लगभग 6 घंटे तक चले इस मैराथन और अत्यंत जटिल ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखा। अंततः, डॉक्टरों की विशेषज्ञता रंग लाई और यह जटिल बायपास सर्जरी शत-प्रतिशत सफलतापूर्वक संपन्न हो गई। अस्पताल प्रबंधन ने बुलेटिन जारी कर बताया है कि मरीज अब पूरी तरह से खतरे से बाहर है और उनकी सेहत में तेजी से सुधार (Fast Recovery) हो रहा है।

पारदर्शिता और विश्वास: वीडियो और इमेज के जरिए परिजनों को दी गई जानकारी 
मिनर्वा हॉस्पिटल के इस पूरे ऑपरेशन की सबसे खास बात रही—डॉक्टरों और मरीज के परिजनों के बीच का पारदर्शी संवाद। अमूमन बड़े ऑपरेशनों में परिजन डरे और संशय में रहते हैं, लेकिन सर्जरी से पहले डॉ. शिरीष मिश्रा ने कमल कुमार के परिवार के साथ एक विस्तृत बैठक की। उन्होंने एंजियोग्राफी रिपोर्ट की हाई-डेफिनिशन वीडियो और इमेजेस को स्क्रीन पर दिखाकर समझाया कि ब्लॉकेज कहाँ-कहाँ हैं और बायपास सर्जरी क्यों एकमात्र रास्ता है।

इस ईमानदारी और पारदर्शिता ने परिजनों के भीतर डॉक्टरों के प्रति विश्वास को और मजबूत किया। आज कमल कुमार सूरी को नया जीवन मिलने के बाद उनका पूरा परिवार मिनर्वा हॉस्पिटल और डॉ. शिरीष मिश्रा की टीम का आभार जताते नहीं थक रहा है।

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