अजब रीवा, गजब कोर्ट: दीवारों से झर-झर बह रहा पानी, पर प्यास बुझाने को बूंद नहीं; बार-बार फंसती लिफ्ट और गंदगी का अंबार : 100 करोड़ की बिल्डिंग में 'चाइना माल' वाली कुर्सियां

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा जिले का नवीन न्यायालय भवन, जिसे 100 करोड़ की भारी-भरकम लागत से जनता की सुविधा के लिए बनाया गया था, आज भ्रष्टाचार और लापरवाही की कहानी खुद बयां कर रहा है। गर्मी का मौसम दस्तक दे चुका है, लेकिन इस "हाई-टेक" बिल्डिंग में प्यासे पक्षकारों और वकीलों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। हैरानी की बात यह है कि जहाँ पानी होना चाहिए वहाँ सन्नाटा है, और जहाँ नल होने चाहिए वहाँ से पानी बर्बाद हो रहा है।

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अजब प्रशासन, गजब व्यवस्था: लोग प्यासे और दीवारों से बह रहा 'धाराप्रवाह' पानी!
तस्वीरें गवाह हैं कि सर्विस बिल्डिंग की दीवारों में छेद हैं लेकिन नल नदारद हैं। पानी लगातार बर्बाद हो रहा है, लेकिन इसे रोकने वाला कोई नहीं। दूसरी तरफ, पूरी बिल्डिंग में न तो वाटर कूलर काम कर रहे हैं और न ही RO सिस्टम लगाया गया है। 100 करोड़ की लागत के बावजूद आम आदमी को एक गिलास ठंडा पानी नसीब नहीं हो रहा है। यह सीधे तौर पर सार्वजनिक धन की बर्बादी और जनता के हक पर डकैती है।

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'चाइना माल' से भी बदतर क्वालिटी? उद्घाटन से पहले ही टूटने लगीं कुर्सियां!
नवीन न्यायालय भवन की कोर्ट बिल्डिंग में रखी कुर्सियों की हालत देखकर आप दंग रह जाएंगे। महज कुछ महीनों के इस्तेमाल में ही कुर्सियां टूटने लगी हैं। सवाल यह उठता है कि किस कंपनी को इसका ठेका दिया गया और किस "क्वालिटी" का सामान यहाँ सप्लाई हुआ? क्या 100 करोड़ की बिल्डिंग में इस्तेमाल हुआ फर्नीचर इतना घटिया है कि वह एक साल भी नहीं टिक पाया?

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दरकती दीवारें और 'फंसी' हुई लिफ्ट – मौत को दावत देता भ्रष्टाचार!
भवन की दीवारों में अभी से दरारें आने लगी हैं, जो इसके घटिया निर्माण की गवाही दे रही हैं। इतना ही नहीं, करोड़ों की लागत से लगी लिफ्ट आए दिन बीच रास्ते में ही बंद हो जाती है। बुजुर्गों, दिव्यांगों और वकीलों के लिए यह लिफ्ट सुविधा कम, जान का जोखिम ज्यादा बन गई है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?

सफाई व्यवस्था शून्य: गंदगी के बीच बैठने को मजबूर पक्षकार
स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बीच कोर्ट परिसर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। बाथरूम से लेकर गलियारों तक गंदगी का अंबार है। जिस भवन से लोगों को 'न्याय' मिलने की उम्मीद है, वहाँ की व्यवस्था खुद 'अन्याय' की शिकार है।

पीआईयू (PIU) और ठेकेदारों की मिलीभगत का संदेह?
सरकारी पैसे का ऐसा दुरुपयोग बिना अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है। निर्माण एजेंसी ने घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर करोड़ों के बजट को ठिकाने लगाया है। नलों का न होना, घटिया फर्नीचर की सप्लाई और लिफ्ट का बार-बार खराब होना, इस बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है।

जवाबदेही तय होनी चाहिए!
रीवा का नवीन न्यायालय भवन अब सुविधा नहीं, बल्कि असुविधा का केंद्र बन चुका है। क्या जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस पर कोई एक्शन लेगा? क्या घटिया निर्माण करने वाली कंपनी का लाइसेंस ब्लैकलिस्ट होगा? जनता अपने टैक्स के पैसों का हिसाब मांग रही है।

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