रीवा न्यूज़ एक्सक्लूसिव : अस्पताल है या 'यमलोक'? रीवा SGMH में जिंदा मरीज को मर्चुरी भेजा, पोस्टमार्टम से ठीक पहले चल पड़ी सांसें! डॉक्टरों पर कब होगी FIR?

 
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रीवा के संजय गांधी अस्पताल में जीवित मरीज को मृत बताकर पोस्टमार्टम की तैयारी, परिजनों के हंगामे के बाद मेडिसिन वार्ड में दोबारा भर्ती | Rewa Hospital Negligence

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) रीवा। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले रीवा के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को शर्मसार कर देने वाली एक और सनसनीखेज घटना सामने आई है। अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि डॉक्टरों ने इस बार एक जीवित मरीज को कागजों पर मृत घोषित कर उसका 'शव' परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

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गनीमत यह रही कि पोस्टमार्टम की पर्ची समय खत्म होने के कारण नहीं कट सकी थी, वरना अस्पताल के चिकित्सक जीवित व्यक्ति का पोस्टमार्टम तक कर देते। मर्चुरी में मरीज के शरीर में हलचल दिखने के बाद उसे तुरंत वापस चौथे तल के मेडिसिन वार्ड में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज जारी है।

सीधी से रीवा इलाज कराने आए थे 66 वर्षीय गिरजा प्रसाद गुप्ता

मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित मरीज की पहचान गिरजा प्रसाद गुप्ता (उम्र 66 वर्ष) के रूप में हुई है। वह सीधी जिले के सिटी कोतवाली थाना अंतर्गत वार्ड नंबर 9, थानहवन टोला के रहने वाले हैं।

गिरजा प्रसाद गुप्ता को तबीयत बिगड़ने पर 4 सितंबर को देर रात 11:25 बजे संजय गांधी अस्पताल रीवा में भर्ती कराया गया था। भर्ती के समय डॉ. अनुराग चौरसिया एडमिशन डॉक्टर थे। मरीज को अस्पताल की चौथी मंजिल पर स्थित 4B सेक्शन, जनरल वार्ड (मेडिसिन) के बेड नंबर 33 पर भर्ती किया गया था।

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डॉक्टरों के साइन-सील से थमाई 'शव सुपुर्दगी' पर्ची, मर्चुरी भेजा गया मरीज

इलाज के दौरान ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने 66 वर्षीय गिरजा प्रसाद गुप्ता को मृत घोषित कर दिया। हद तो तब हो गई जब कागजी प्रक्रिया पूरी करते हुए मरीज का 'शव' परिजनों के हवाले कर दिया गया।

  • डॉक्टर की सील और साइन: शव देने की रिसीविंग पर्ची पर डॉ. निवेश सविता के हस्ताक्षर और सील लगे हुए हैं।

  • परिजनों के दस्तखत: परिजनों से भी यह लिखकर हस्ताक्षर करवा लिए गए कि "उन्हें शव प्राप्त हो गया है।"

  • मर्चुरी ट्रांसफर: कागजी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मरीज को सीधे अस्पताल की मर्चुरी (शवगृह) भेज दिया गया।

समय खत्म होने से बची जान, मर्चुरी से वापस वार्ड में शिफ्ट

मर्चुरी में परिजन जब पोस्टमार्टम (PM) कराने की कागजी कार्रवाई में जुटे थे, तभी पता चला कि समय समाप्त हो जाने के कारण पीएम की पर्ची नहीं कट पाई है। इसी दौरान मर्चुरी में रखे मरीज गिरजा प्रसाद गुप्ता के शरीर में अचानक हलचल हुई और उनकी सांसें चलती दिखाई दीं।

यह देखते ही परिजनों के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत हंगामा शुरू किया और अस्पताल स्टाफ को सूचना दी। जब डॉक्टरों ने मौके पर पहुंचकर जांच की, तो गिरजा गुप्ता जीवित पाए गए। इसके तुरंत बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया और मरीज को मर्चुरी से निकालकर आनन-फानन में दोबारा चौथी मंजिल के मेडिसिन विभाग के बेड नंबर 33 में भर्ती कराया गया।

डिप्टी सीएम के गृह जिले में वेंटिलेटर पर स्वास्थ्य व्यवस्था: कल्पना मिश्रा कांड के बाद नया बवाल

रीवा में स्वास्थ्य सुविधाओं का यह हाल तब है जब यह प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का गृह जिला है। हाल ही में हुए कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के मामले ने काफी तूल पकड़ा था, जिसमें कई डॉक्टरों को निलंबित किया गया था और तत्कालीन अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को कुर्सी गंवानी पड़ी थी।

डिप्टी सीएम जिस डीन का बचाव कर रहे थे, अब उन्हीं के पसंदीदा अधीक्षक डॉ. प्रियंक शर्मा के पद संभालते ही यह ऐतिहासिक लापरवाही सामने आ गई है। स्थानीय जानकारों और मीडिया का कहना है कि इसे महज 'मानवीय भूल' कहकर टाला नहीं जा सकता। यह सीधे तौर पर ड्यूटी के दौरान सीनियर डॉक्टरों की गैर-मौजूदगी और लापरवाही का नतीजा है।

सीनियर डॉक्टरों की अनुपस्थिति और व्यवस्था पर गंभीर सवाल

इस रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना ने संजय गांधी अस्पताल की पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं:

  1. बिना वाइटल्स जांचे मृत्यु की पुष्टि: क्या मरीज को मृत घोषित करने से पहले ECG या अन्य प्राथमिक वाइटल टेस्ट किए गए थे?

  2. जूनियर डॉक्टरों के भरोसे अस्पताल: क्या रात में सीनियर डॉक्टर ड्यूटी से गायब थे, जिसके कारण जूनियर डॉक्टरों ने बिना जांचे डेथ सर्टिफिकेट जारी कर दिया?

  3. डॉ. निवेश सविता की भूमिका: जिस पर्ची पर डॉ. निवेश सविता की सील और साइन हैं, क्या उन्होंने खुद मरीज की जांच की थी?

  4. जिम्मेदारी तय होगी या लीपापोती? क्या इस अक्षम्य अपराध के लिए दोषी डॉक्टरों पर निलंबन और एफआईआर (FIR) जैसी सख्त कार्रवाई होगी?

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