बीहर नदी का 'कत्ल' करने की नई साजिश: शांति विला संचालक की गुंडागर्दी, क्या फिर डूबेगा रीवा? डिप्टी सीएम के आदेशों को ठेंगा दिखाकर खड़ी की अवैध दीवार

 
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उपेन्द्र सिंह द्वारा बीहर नदी के ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माण की शिकायत पर महापौर ने कमिश्नर को दिए जांच के आदेश। | Mayor orders probe into illegal construction by Upendra Singh in Beehar River's Green Belt area.

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर की जीवनदायिनी बीहर नदी एक बार फिर भू-माफियाओं के निशाने पर है। शांति विला के संचालक उपेन्द्र सिंह पर नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बिगाड़ने और एनजीटी (NGT) के नियमों का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। पहले अपनी अवैध कॉलोनियों के लिए चर्चा में रहे सिंह ने अब नदी के किनारे कांक्रीट की एक विशाल दीवार खड़ी कर दी है। इस निर्माण का मुख्य उद्देश्य नदी के बहाव क्षेत्र को पाटकर वहां व्यावसायिक लाभ उठाना बताया जा रहा है।

महापौर का हस्तक्षेप और कमिश्नर को सख्त निर्देश
इस अवैध निर्माण की गूँज अब नगर निगम के गलियारों में सुनाई दे रही है। सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता बीके माला ने इस मामले की लिखित शिकायत महापौर से की थी। शिकायत में बताया गया कि वार्ड क्रमांक 6, करही क्षेत्र में चिन्मय आश्रम के समीप बीहर नदी के सतही भाग और ग्रीन बेल्ट एरिया में अनाधिकृत तरीके से एक विवाह घर या होटल का निर्माण किया जा रहा है। इस पर संज्ञान लेते हुए महापौर ने नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

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ग्रीन बेल्ट और एनजीटी नियमों की खुलेआम अवहेलना
अधिवक्ता बीके माला के अनुसार, यह निर्माण पूरी तरह से गैर-कानूनी है क्योंकि यह उस क्षेत्र में किया जा रहा है जिसे पर्यावरण संरक्षण के लिए 'ग्रीन बेल्ट' घोषित किया गया है। नदी के तल तक कांक्रीट का कार्य करना न केवल जल प्रदूषण को बढ़ावा देता है, बल्कि एनजीटी के दिशा-निर्देशों का भी सीधा उल्लंघन है। शिकायत में स्पष्ट किया गया है कि भूमि स्वामी भले ही कोई और हो, लेकिन निर्माण कार्य उपेन्द्र सिंह द्वारा ही कराया जा रहा है।

क्या रीवा को फिर डुबोने की तैयारी है?
बीहर और बिछिया नदियों के किनारों को पाटकर बनाए जा रहे फार्म हाउस, विवाह घर और अन्य स्थायी ढांचे रीवा शहर के लिए टाइम बम की तरह हैं। जब नदियों का प्राकृतिक बहाव क्षेत्र कम हो जाता है, तो बारिश का पानी शहर की बस्तियों में घुसने लगता है। पिछले अनुभवों को देखें तो रीवा लगातार जलमग्न हो रहा है, जिसका मुख्य कारण यही अवैध निर्माण हैं। अधिवक्ता माला ने मांग की है कि ऐसे सभी निर्माणों को तुरंत जमींदोज किया जाए ताकि शहर को डूबने से बचाया जा सके।

डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के कड़े रुख के बाद भी सुस्ती क्यों?
इस वर्ष मानसून के दौरान रीवा के कई हिस्सों, जैसे बोदाबाग और गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह के आवास तक नदी का पानी पहुँच गया था। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने सर्किट हाउस में कलेक्टर और कमिश्नर की आपात बैठक ली थी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि नदी किनारे के सभी अवैध अतिक्रमणों को चिन्हित कर उन्हें ढहा दिया जाए। हालांकि, जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई का अभाव अभी भी बना हुआ है।

प्रशासनिक खींचतान: जब कलेक्टर के आदेश पर कमिश्नर ने लगाया स्टे
यह मामला केवल एक दीवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रशासनिक मिलीभगत के भी संकेत मिलते हैं। पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर प्रतिभा पाल ने आईएएस वैशाली जैन की रिपोर्ट के आधार पर मेसर्स शांति इंफ्रास्ट्रक्चर और शांति विलास इन्फ्रा प्रोजेक्ट के संचालक उपेन्द्र सिंह के खिलाफ FIR दर्ज करने और कॉलोनियों को सरकारी कब्जे में लेने का आदेश दिया था। कलेक्टर ने अवैध निर्माण के कारण नदी के बहाव को रोकने के प्रयास को अपराध माना था। लेकिन, खबरों के मुताबिक, नगर निगम के कमिश्नर स्तर पर इस कार्रवाई को रोक दिया गया और आदेश पर स्टे मिल गया, जिससे माफियाओं के हौसले फिर बुलंद हो गए हैं।

क्या अब होगा न्याय?
बीहर नदी के किनारे फिर से खड़ी की गई यह दीवार प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है। क्या नगर निगम कमिश्नर इस बार महापौर के आदेशों का पालन करेंगे या फिर पुराना इतिहास दोहराया जाएगा? रीवा की जनता अब कार्रवाई का इंतजार कर रही है।

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