MP Nursing Scam की भेंट चढ़ा रीवा के हजारों छात्रों का करियर! रो पड़े नर्सिंग छात्र, 2020 बैच का रिजल्ट अब तक पेंडिंग, कमिश्नर को सौंपा 4 सूत्रीय अल्टीमेटम

 
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ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य अंचल के रीवा संभाग में शैक्षणिक लेटलतीफी और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ युवाओं का गुस्सा पूरी तरह फूट पड़ा है। सोमवार को संभाग के विभिन्न शासकीय एवं निजी कॉलेजों में अध्ययनरत सैकड़ों नर्सिंग विद्यार्थियों ने एकजुट होकर कमिश्नर कार्यालय का घेराव किया। शैक्षणिक सत्र 2020, 2021 और 2022 के विद्यार्थियों का आरोप है कि बीते तीन सालों से अधिक समय से उनकी न तो समय पर परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं और न ही पूर्ण हो चुकी परीक्षाओं के परिणाम जारी किए जा रहे हैं।

इस प्रशासनिक उदासीनता की वजह से हजारों युवाओं का करियर अधर में लटक गया है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासनिक परिसर में जमा होकर जमकर नारेबाजी की और संभागायुक्त के नाम एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा। छात्रों ने साफ कर दिया कि यदि शासन-प्रशासन ने इस दिशा में तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे अपने अधिकारों के लिए सड़क से लेकर अदालत और राजधानी भोपाल तक उग्र आंदोलन चलाने को मजबूर होंगे।

2020-2022 बैच का भविष्य अंधकार में: रजिस्ट्रेशन और नौकरियों पर लगी रोक
आंदोलनरत विद्यार्थियों ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखते हुए बताया कि नर्सिंग पाठ्यक्रम पूरा करने की तय समय-सीमा कब की बीत चुकी है, लेकिन मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी और संबंधित नर्सिंग बोर्ड की ढुलमुल कार्यशैली के कारण पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। वर्ष 2020-21 और 2021-22 के कई ऐसे बैच हैं, जिनकी परीक्षाएं तो आयोजित करा ली गईं, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी अंतिम मार्कशीट और प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी नहीं किए गए।

नर्सिंग के क्षेत्र में बिना अधिकृत रजिस्ट्रेशन और अंकसूची के कोई भी छात्र न तो किसी राज्य स्तरीय या राष्ट्रीय स्तर की भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकता है और न ही आगे की उच्च शिक्षा के लिए किसी संस्थान में दाखिला ले सकता है। मध्य प्रदेश में पिछले दो से तीन वर्षों के दौरान स्वास्थ्य विभाग में कई महत्वपूर्ण वैकेंसियां आईं, लेकिन अंकसूची के अभाव में पात्र होते हुए भी रीवा और विंध्य क्षेत्र के हजारों होनहार छात्र-छात्राएं आवेदन फार्म भरने से वंचित रह गए।

लाखों रुपए खर्च के बाद भी बेरोजगारी का खतरा: छात्रों ने बयां किया दर्द
कमिश्नर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने अपनी व्यक्तिगत और आर्थिक व्यथा भी साझा की। छात्रों का कहना था कि रीवा और आसपास के ग्रामीण अंचलों से आने वाले अधिकांश विद्यार्थी मध्यमवर्गीय या किसान परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। अभिभावकों ने अपनी गाढ़ी कमाई, मवेशी बेचकर या कर्ज लेकर हॉस्टल, कॉलेज फीस और किताबों पर लाखों रुपए खर्च किए हैं।

छात्रों ने कहा कि पढ़ाई पूरी होने के निर्धारित समय के तीन साल बाद भी जब वे अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पा रहे हैं, तो परिजनों का मानसिक और आर्थिक तनाव चरम पर पहुंच गया है। एक छात्रा ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में पैरामेडिकल तथा नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है। एक तरफ मरीज इलाज के लिए परेशान हैं और दूसरी तरफ हम प्रशिक्षित होकर भी सेवाएं देने से महरुप हैं क्योंकि सिस्टम हमें कानूनी रूप से काम करने का लाइसेंस (रजिस्ट्रेशन) नहीं दे रहा है। यदि यही स्थिति रही तो छात्रों को मजबूरन इस पेशे को छोड़कर मजदूरी या अन्य छोटे-मोटे कार्य करने की ओर रुख करना पड़ेगा।

कमिश्नर को सौंपा 4 सूत्रीय मांग पत्र: 60 दिनों में परीक्षा और नोडल अधिकारी की नियुक्ति की शर्त
प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर चार प्रमुख बिंदुओं पर आधारित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए स्पष्ट शर्तें रखी गई हैं:

  • समयबद्ध परीक्षा का आयोजन: वर्ष 2020, 2021 और 2022 के सभी लंबित पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं आगामी 60 दिवस की अनिवार्य समय-सीमा के भीतर आयोजित की जाएं।
  • त्वरित परिणाम घोषणा: परीक्षा संपन्न होने के अधिकतम 30 दिनों के भीतर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कराकर आधिकारिक पोर्टल पर परिणाम घोषित किए जाएं।
  • नोडल अधिकारी की तैनाती: संपूर्ण परीक्षा, मूल्यांकन और अंकसूची वितरण व्यवस्था की दैनिक निगरानी के लिए संभाग स्तर पर एक विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए।
  • डिजिटल सूचना तंत्र: छात्रों को परीक्षा सारिणी, रोल नंबर और रिजल्ट संबंधी हर छोटी-बड़ी जानकारी उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS और यूनिवर्सिटी पोर्टल के माध्यम से सीधे भेजी जाए।

भोपाल कूच की चेतावनी: 'परीक्षा दो, परिणाम दो' के नारों से गूंजा प्रशासनिक परिसर
कमिश्नर दफ्तर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था के बीच छात्रों ने जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लिए युवाओं ने “परीक्षा दो, परिणाम दो, हमारा भविष्य सुरक्षित करो” और “लचर रवैया बंद करो, हक हमारा बहाल करो” जैसे गगनभेदी नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने प्रशासन को चेताया कि कोरोना महामारी के दौरान पहले ही शैक्षणिक सत्र दो साल पिछड़ चुका है, जिसे बाद में सुधारा जा सकता था।

लेकिन अब जानबूझकर की जा रही देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने के साथ ही छात्रों ने अल्टीमेटम दिया कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर यूनिवर्सिटी और शासन स्तर से लिखित परीक्षा कैलेंडर जारी नहीं किया गया, तो रीवा संभाग के सभी नर्सिंग छात्र एकजुट होकर राज्य की राजधानी भोपाल में वल्लभ भवन (सचिवालय) का घेराव करेंगे। मौके पर मौजूद पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए आश्वस्त किया कि उनकी मांगों को राज्य शासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग तक प्राथमिकता के आधार पर भेजकर जल्द सकारात्मक समाधान निकाला जाएगा।

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