रीवा में तेंदुए का खौफ या सिर्फ धोखा? पटपर घाट की 'खतरनाक' तस्वीर का खुल गया कच्चा चिट्ठा!

 
ddf

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 36, पटपर घाट इलाके में तेंदुए की मौजूदगी की खबर ने रातों-रात सनसनी फैला दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक तस्वीर तेजी से प्रसारित हुई, जिसमें एक गली में तेंदुआ खड़ा दिखाई दे रहा था। इस तस्वीर को देखते ही स्थानीय निवासियों में डर का माहौल व्याप्त हो गया और लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए।

तेंदुए का यह फोटो सोशल मीडिया पर सामने आया था।

तेंदुए का यह फोटो सोशल मीडिया पर सामने आया था।

वन विभाग की जांच में खुला बड़ा राज: फोटो है पूरी तरह भ्रामक
जैसे ही तेंदुए की सूचना वन विभाग तक पहुंची, टीम तुरंत सक्रिय हुई। हालांकि, जमीनी स्तर पर जांच करने के बाद विभाग ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्र में तेंदुए के पगमार्क (पंजों के निशान) या अन्य कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं।

वन विभाग के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि "वायरल हो रही तस्वीर प्रथम दृष्टया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा निर्मित प्रतीत होती है।" तकनीक का गलत इस्तेमाल कर तस्वीर को इस तरह बनाया गया था कि वह बिल्कुल असली लगे, जिससे आम जनता में भ्रम पैदा हो सके।

स्थानीय निवासियों ने खंगाले CCTV, सच्चाई आई सामने
पटपर घाट निवासी राहुल सिंह और अन्य मोहल्लेवासियों ने अपनी सुरक्षा के प्रति सतर्कता दिखाते हुए क्षेत्र में लगे सभी CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। घंटों की मशक्कत के बाद भी किसी भी कैमरे में किसी जंगली जानवर की आवाजाही दर्ज नहीं हुई।

जिस मकान के सामने तेंदुआ खड़े होने का दावा किया जा रहा था, उस मकान के मालिक ने भी इस बात की पुष्टि की है कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने ऐसी कोई हलचल देखी। यह स्पष्ट हो गया कि किसी शरारती तत्व ने एडिटेड फोटो के जरिए शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है।

AI जनरेटेड फेक न्यूज़: समाज के लिए एक नई चुनौती
आज के दौर में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के बढ़ते प्रभाव ने असली और नकली के बीच के अंतर को कम कर दिया है। रीवा का यह मामला इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक नकली तस्वीर पूरे शहर में 'पैनिक बटन' दबा सकती है। वन विभाग ने जनता से अपील की है कि वे तकनीक के इस दुरुपयोग से सावधान रहें और किसी भी खबर को साझा करने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच अवश्य करें।

प्रशासन की चेतावनी: अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। लोगों ने मांग की है कि सोशल मीडिया पर इस तरह का डर फैलाने वाले लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ साइबर कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाए। वन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि भविष्य में कोई भी संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो सीधे विभाग के कंट्रोल रूम को सूचित करें, न कि सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाएं।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. क्या रीवा के पटपर घाट में वास्तव में तेंदुआ देखा गया है? नहीं, वन विभाग और स्थानीय जांच में तेंदुए की मौजूदगी की कोई पुष्टि नहीं हुई है। यह केवल एक अफवाह थी।
2. सोशल मीडिया पर वायरल तेंदुए की फोटो की सच्चाई क्या है? वन विभाग के अनुसार, वायरल फोटो AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनाई गई है और इसे एडिट करके भ्रम फैलाने के लिए इस्तेमाल किया गया है।
3. क्या सीसीटीवी फुटेज में तेंदुआ दिखाई दिया? नहीं, क्षेत्र के निवासियों और मकान मालिक द्वारा चेक किए गए किसी भी सीसीटीवी कैमरे में तेंदुए की कोई रिकॉर्डिंग नहीं मिली है।
4. अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ प्रशासन क्या कदम उठा रहा है? प्रशासन ने चेतावनी दी है कि गलत सूचना साझा कर जनता में डर पैदा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
5. अगर हमें सच में कोई जंगली जानवर दिखे तो क्या करें? ऐसी स्थिति में तुरंत स्थानीय पुलिस या वन विभाग के टोल-फ्री नंबर पर सूचना दें और सुरक्षित स्थान पर रहें।

Related Topics

Latest News