सावधान रीवा! एक 'APK' फाइल और आपकी बरसों की कमाई साफ; शिल्पी उपवन से चल रहा था ठगी का काला साम्राज्य, जिसके तार जुड़े हैं देश के कई राज्यों से, जानिए कैसे बच सकते हैं आप

 
ghnvb

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। विंध्य की राजधानी रीवा अब केवल सफेद शेरों के लिए नहीं, बल्कि हाई-टेक अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के लिए भी जानी जा रही है। शहर के शिल्पी उपवन क्षेत्र में संचालित हो रहे एक बड़े साइबर नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने 13 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है। ये ठग रीवा की शांत गलियों में बैठकर गुजरात, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे थे।

cvcv

थाना प्रभारी हितेंद्र नाथ शर्मा के नेतृत्व में हुई इस कार्यवाही ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे डिजिटल दुनिया के पीछे कितना भी छिप लें, रीवा पुलिस की नजरों से नहीं बच सकते।

APK फाइल का 'जहरीला' जाल: एक क्लिक और अकाउंट साफ!
जांच में सामने आया है कि ये आरोपी बेहद शातिर तरीके से ठगी को अंजाम देते थे। इनका काम करने का तरीका (Modus Operandi) कुछ इस प्रकार था:

  •     फर्जी लिंक का जाल: ठग सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर आकर्षक ऑफर या सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जी लिंक भेजते थे।
  •     APK फाइल डाउनलोड: जैसे ही कोई व्यक्ति लिंक पर क्लिक करता, उसके फोन में एक संदिग्ध APK फाइल बैकग्राउंड में डाउनलोड हो जाती थी।
  •     निजी जानकारी की चोरी: यह फाइल असल में एक 'मैलवेयर' (Malware) होती थी जो फोन के मैसेज, कांटेक्ट और बैंक ओटीपी (OTP) को सीधे ठगों के कंट्रोल पैनल पर भेज देती थी।
  •     डिजिटल डकैती: इसके बाद आरोपी बिना किसी शोर-शराबे के पीड़ित के बैंक खातों को खाली कर देते थे।

ccb

सूरत का 7 लाख का केस और रीवा की लोकेशन
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब गुजरात के सूरत क्राइम ब्रांच ने 2025 में हुई 7 लाख रुपये की एक बड़ी ठगी की जांच शुरू की। तकनीकी विश्लेषण के दौरान आरोपियों की लोकेशन रीवा के शिल्पी उपवन में मिली। सूरत पुलिस से इनपुट साझा होने के बाद रीवा पुलिस ने तुरंत दबिश देकर पूरे गिरोह को दबोच लिया। रीवा पुलिस का मानना है कि इन 13 आरोपियों की गिरफ्तारी से शहर और प्रदेश में हुई कई अन्य अनसुलझी साइबर ठगियों के मामले भी खुल सकते हैं।

xxcxc

सायबर सेल की बड़ी बरामदगी: डिजिटल साक्ष्यों का अंबार
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण जब्त किए हैं:

    लैपटॉप और टैबलेट: डेटा मैनेज करने और फिशिंग पेज बनाने के लिए उपयोग।
    दर्जनों मोबाइल फोन: अलग-अलग राज्यों के लोगों को कॉल और मैसेज करने के लिए।
    सिम कार्ड्स: फर्जी आईडी पर लिए गए सैकड़ों एक्टिवेटेड सिम कार्ड।
    बैंक दस्तावेज: फर्जी खातों के पासबुक और संदिग्ध ट्रांजेक्शन की लिस्ट।

Related Topics

Latest News