बीच सड़क पर डायल-112 से शराबखोरी! वीडियो वायरल होते ही सुबह-सुबह गिरी गाज, दोनों पुलिसकर्मी नपे
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गंगेव में पुलिस की शर्मनाक करतूत आई सामने, डायल-112 गाड़ी से सायरन बजाकर शराब मंगवाने के आरोप में आरक्षक और ड्राइवर निलंबित।
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से कानून व्यवस्था और पुलिस की छवि को धूमिल करने वाला एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले के गंगेव थाना क्षेत्र के अंतर्गत सरकारी ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस वीडियो के सामने आने के बाद न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे प्रदेश की पुलिसिंग व्यवस्था और उनके नैतिक आचरण पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। जनता की सुरक्षा के लिए तैनात आपातकालीन सेवा 'डायल-112' के वाहन का ऐसा दुरुपयोग देखकर हर कोई दंग है।
खाकी वर्दी, जिसे समाज में सुरक्षा, अनुशासन और कानून के पालन का प्रतीक माना जाता है, जब वही वर्दीधारी बीच सड़क पर सरेआम कानून का माखौल उड़ाते नजर आएं, तो जनता का विश्वास डगमगाना स्वाभाविक है। रीवा के गंगेव इलाके में हुई इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि कुछ कर्मचारियों की लापरवाही और अनुशासनहीनता के कारण पूरी पुलिस फोर्स की बदनामी होती है।
वायरल वीडियो का पूरा सच: सायरन बजाकर मंगवाई शराब!
वायरल हो रहे इस वीडियो की कहानी किसी को भी हैरान कर सकती है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर उपलब्ध फुटेज के अनुसार, गंगेव क्षेत्र में एक शराब दुकान के बाहर डायल-112 की गाड़ी आकर रुकती है। इसके बाद अचानक गाड़ी का हुटर या सायरन बजता है। सायरन की आवाज सुनते ही एक स्थानीय युवक शराब की दुकान के भीतर जाता है और वहां से बियर तथा शराब की बोतलें लेकर सीधे पुलिस वाहन की तरफ दौड़ता है।
स्थानीय लोगों का गंभीर आरोप: "पुलिसकर्मियों ने किसी आपातकालीन स्थिति के लिए नहीं, बल्कि शराब की दुकान से अपना ऑर्डर रिसीव करने की सूचना देने के लिए गाड़ी का सायरन बजाया था। सायरन बजते ही युवक तुरंत बोतलें लेकर गाड़ी की खिड़की के पास पहुंच गया।"
इस पूरे घटनाक्रम का किसी जागरूक नागरिक ने अपने मोबाइल कैमरे से वीडियो बना लिया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे बेखौफ होकर ऑन-ड्यूटी कर्मचारी सरकारी वाहन का उपयोग निजी ऐशो-आराम और शराबखोरी के लिए कर रहे हैं। वीडियो जैसे ही इंटरनेट पर अपलोड हुआ, यह आग की तरह फैल गया और लोगों ने मध्य प्रदेश पुलिस को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया।
एसपी गुरुकरण सिंह का बड़ा एक्शन: दो पुलिसकर्मी तत्काल सस्पेंड
जैसे ही यह शर्मनाक वीडियो रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) गुरुकरण सिंह के संज्ञान में आया, उन्होंने मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए फौरन कड़े कदम उठाए। एसपी ने बिना किसी देरी के इस पूरे मामले की प्राथमिक जांच के आदेश दे दिए। विभाग की साख को बचाने और जनता में कड़ा संदेश देने के लिए तत्काल एसडीओपी (SDOP) स्तर के अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।
एसडीओपी द्वारा की गई त्वरित शुरुआती जांच में वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मियों की लापरवाही और अनुशासनहीनता की पुष्टि प्राथमिक तौर पर सही पाई गई। इसके बाद, मंगलवार की सुबह पुलिस अधीक्षक गुरुकरण सिंह ने एक बड़ा आदेश जारी करते हुए ड्यूटी पर तैनात आरक्षक समर पटेल और सरकारी वाहन के चालक अनूप विश्वकर्मा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया। इस त्वरित कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
एएसपी संदीप मिश्रा का बयान: विभागीय जांच से खुलेगा पूरा राज
इस पूरे घटनाक्रम और निलंबन की कार्रवाई को लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) संदीप मिश्रा ने आधिकारिक मीडिया ब्रीफिंग की। उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति लापरवाही को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। डायल-112 जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन सेवा के वाहन में इस तरह की गतिविधि अक्षम्य है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में की गई निलंबन की कार्रवाई केवल एक प्राथमिक कदम है। दोनों कर्मचारियों (आरक्षक समर पटेल और चालक अनूप विश्वकर्मा) की भूमिका प्रथम दृष्टया पूरी तरह से संदिग्ध और विभागीय नियमों के विरुद्ध पाई गई है। उन्होंने आगे कहा कि इस मामले की एक विस्तृत और गहन विभागीय जांच अभी जारी है। जांच रिपोर्ट पूरी तरह सामने आने के बाद दोनों दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक और विभागीय सेवा नियमों के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी ऐसी हिम्मत न कर सके।
सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा: खाकी की साख पर बट्टा
रीवा के गंगेव का यह वीडियो केवल समाचार चैनलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फेसबुक, ट्विटर (X) और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर भी जमकर ट्रेंड कर रहा है। नेटिजन्स (इंटरनेट यूजर्स) इस वीडियो को शेयर करते हुए तरह-तरह के मीम्स बना रहे हैं और तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि जब रक्षक ही इस तरह के कामों में लिप्त रहेंगे, तो भक्षक से जनता को कौन बचाएगा?
इस तरह के जन आक्रोश से साफ है कि पुलिस की इस छोटी सी दिखने वाली हरकत ने आम जनता के मन में विभाग के प्रति विश्वास को गंभीर ठेस पहुंचाई है।
पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता को कैसे रोकें?
रीवा की यह घटना कोई पहली या इकलौती घटना नहीं है। देश के विभिन्न हिस्सों से अक्सर ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मियों के दुर्व्यवहार या नशाखोरी के मामले सामने आते रहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पुलिस विभाग में इस प्रकार की अनुशासनहीनता को कैसे रोका जाए?
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नियमित औचक निरीक्षण: वरिष्ठ अधिकारियों को समय-समय पर फील्ड में तैनात डायल-100 या डायल-112 जैसी गाड़ियों का औचक निरीक्षण करना चाहिए।
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वाहनों में डैशकैम और जीपीएस की अनिवार्यता: सभी सरकारी सुरक्षा वाहनों के भीतर और बाहर सीसीटीवी/डैशकैम कैमरे लगाए जाने चाहिए, जिनकी लाइव मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से हो।
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कठोर दंडात्मक कार्रवाई: केवल निलंबन (सस्पेंशन) काफी नहीं है। निलंबन के बाद अक्सर कर्मचारी बहाल हो जाते हैं। ऐसे मामलों में वेतन वृद्धि रोकना या सेवा समाप्ति जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
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काउन्सिलिंग और मोरल ट्रेनिंग: पुलिसकर्मियों के अत्यधिक तनाव को दूर करने के लिए समय-समय पर नैतिक शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाने चाहिए।
रीवा एसपी की इस त्वरित कार्रवाई ने निश्चित रूप से एक नजीर पेश की है, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि भविष्य में गंगेव जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।