साहब! ये अस्पताल है या डकैतों की गुफा? "मरीज तड़पता रहा और अस्पताल बिल बुनता रहा" आयुष्मान कार्ड को 'रद्दी' समझने वाले प्रार्थना हॉस्पिटल का कब लाइसेंस होगा रद्द
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना, जिसे गरीबों के लिए मुफ्त और बेहतर स्वास्थ्य सेवा की 'संजीवनी' माना जाता है, रीवा के कुछ निजी अस्पतालों के लिए व्यवसाय का साधन बन गई है। ताजा मामला रीवा के प्रार्थना हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर से सामने आया है, जहाँ एक पात्र हितग्राही को योजना का लाभ देने के बजाय अस्पताल प्रबंधन ने अपनी मनमानी की सारी हदें पार कर दीं। आयुष्मान भारत योजना, जिसे मोदी सरकार ने गरीबों के लिए उम्मीद की किरण बताया था, उसे यहाँ के मैनेजमेंट ने अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना लिया है। ताजा शिकार हुए आदर्श सिंह, जिनके पास वैध कार्ड होने के बावजूद उन्हें इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ा और अंततः नकद भुगतान के लिए मजबूर किया गया।

रीवा के प्रार्थना हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में आयुष्मान भारत योजना के दुरुपयोग का मामला अब केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं रहा। यह एक व्यवस्थित लूट का हिस्सा नजर आता है। ताजा मामले में आदर्श सिंह के परिवार से कार्ड होने के बावजूद पैसे वसूलने पर CMHO ने नोटिस तो जारी किया है, लेकिन सोशल मीडिया और रिकॉर्ड बताते हैं कि यह इस अस्पताल की पुरानी फितरत है।

पुराना खिलाड़ी, नया शिकार: सोशल मीडिया पर चर्चित प्रार्थना हॉस्पिटल के 5 विवाद
अस्पताल प्रबंधन पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं, जो फेसबुक और व्हाट्सएप ग्रुप्स में चर्चा का विषय रहे हैं:
- अतिरिक्त वसूली का मामला (2025): सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक तीमारदार ने आरोप लगाया था कि आयुष्मान पैकेज के अलावा दवाइयों के नाम पर उनसे 15,000 रुपये नकद लिए गए।
- कार्ड रिजेक्ट करने का बहाना: पिछले साल एक महिला मरीज के परिजनों ने फेसबुक पर पोस्ट किया था कि ऑपरेशन के ठीक पहले अस्पताल ने 'सर्वर डाउन' होने की बात कहकर कार्ड लेने से मना कर दिया और नकद भुगतान कराया।
- बिलिंग में हेराफेरी: अस्पताल पर आरोप है कि यह आयुष्मान पोर्टल पर बड़े पैकेज बुक करता है, जबकि मरीज का सामान्य इलाज किया जाता है।
- मरीजों को बंधक बनाने के आरोप: पूर्व में ऐसी भी शिकायतें आई हैं जहाँ बिल का भुगतान न होने पर अस्पताल ने मरीज को डिस्चार्ज करने से मना कर दिया, भले ही उनके पास आयुष्मान कार्ड था।
- आयुष्मान मित्र की संदिग्ध भूमिका: कई पीड़ितों ने सोशल मीडिया पर बताया है कि यहाँ के आयुष्मान मित्र मरीजों की मदद करने के बजाय उन्हें भ्रमित करते हैं ताकि अस्पताल नकद वसूली कर सके।

"कार्ड लेट लगा है, पैसे देने होंगे": आदर्श सिंह के इलाज में अस्पताल का खेल
सड़क हादसे में घायल हुए आदर्श सिंह के मामले ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनके पास वैध आयुष्मान कार्ड मौजूद था और वे ऑपरेशन सहित पूरा इलाज कैशलेस कराने के हकदार थे। लेकिन अस्पताल ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि कार्ड देरी से जमा किया गया है और मरीज को नकद भुगतान करने के लिए मजबूर किया गया। यह सीधा आरोप है कि अस्पताल केवल उन्हीं मरीजों को तवज्जो दे रहा है, जो उनकी जेबें भर सकें।

CMHO रीवा का सख्त रुख: प्रार्थना हॉस्पिटल को 'कारण बताओ' नोटिस जारी
इस मामले की गूँज जब सीएम हेल्पलाइन तक पहुँची, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) रीवा ने अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अस्पताल की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी थी कि:
- मरीज के परिवार को योजना के तहत मिलने वाले 'पैकेज' की पूरी जानकारी दी जाए।
- आयुष्मान मित्र के माध्यम से मरीज का सही मार्गदर्शन सुनिश्चित हो।
- पात्र हितग्राहियों का बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के कैशलेस उपचार किया जाए।
रीवा के जागरूक नागरिकों का कहना है कि जब अस्पताल आदतन अपराधी (Habitual Offender) बन चुका है, तो केवल नोटिस से क्या होगा?
- जांच की मांग: क्या पोर्टल पर बुक किए गए पिछले 6 महीनों के पैकेजों का ऑडिट होगा?
- लाइसेंस पर खतरा: क्या बार-बार नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाले इस अस्पताल का आयुष्मान पैनल से नाम हटाया जाएगा?
निजी अस्पतालों का पुराना ढर्रा: नोटिस ही काफी है या होगी कड़ी कार्रवाई?
रीवा में यह पहली बार नहीं है जब किसी निजी अस्पताल पर आयुष्मान योजना के दुरुपयोग का आरोप लगा हो। अक्सर देखा गया है कि सरकारी खजाने से भुगतान लेने के बावजूद ये अस्पताल मरीजों से हजारों-लाखों की अतिरिक्त नगद वसूली करते हैं। सवाल यह है कि क्या केवल नोटिस जारी करना इस समस्या का समाधान है? अक्सर औपचारिक कार्रवाइयों के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है, जिससे इन व्यवसायियों के हौसले और बुलंद हो जाते हैं।
जनता का भरोसा और सिस्टम की विफलता: कब तक भटकेंगे गरीब?
अगर आयुष्मान कार्ड जेब में होने के बाद भी गरीब मरीज को डिस्चार्ज के समय लंबा बिल थमाया जाएगा, तो जनता का सरकारी योजनाओं से विश्वास उठना तय है। सिस्टम की निगरानी में कमी और अस्पतालों की जवाबदेही तय न होना इस योजना के मूल उद्देश्य को कमजोर कर रहा है।
अब सबकी नजरें CMHO रीवा की अगली कार्रवाई पर हैं कि क्या अस्पताल का लाइसेंस रद्द होगा या फिर एक बार फिर गरीबों के हक पर 'प्रबंधन' भारी पड़ेगा। प्रार्थना हॉस्पिटल जैसे संस्थान इस योजना को व्यवसाय बना चुके हैं। अब समय है कि जिला प्रशासन केवल नोटिस के कागजों तक सीमित न रहकर, दंडात्मक कार्रवाई करे ताकि अन्य अस्पतालों को कड़ा संदेश मिले।