अभिभावक हो जाएं तैयार: रीवा न्यूज़ मीडिया खोल रहा है प्राइवेट स्कूलों का कच्चा चिट्ठा, जानिये आपके बच्चे के स्कूल का 'कमीशन रेट'
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। रीवा शहर में शिक्षा का स्तर बढ़ने के बजाय 'वसूली' का स्तर बढ़ गया है। Dainik Rewa News Media अपनी विशेष सीरीज के माध्यम से उन स्कूलों की कुंडली खोलने जा रहा है जिन्होंने शिक्षा को शुद्ध व्यापार बना लिया है। शहर के नामी स्कूलों ने किताबों से लेकर मोजे-बनियान तक में अपना कमीशन सेट कर रखा है।
किताबों और यूनिफॉर्म का 'डेथ वारंट'
रीवा के अधिकांश स्कूलों ने शहर की चुनिंदा दुकानों से सांठगांठ कर रखी है। अभिभावकों को मजबूर किया जाता है कि वे वहीं से किताबें और ड्रेस खरीदें। जो सेट बाजार में 3,000 रुपये का मिलना चाहिए, वह इन फिक्स दुकानों पर 5,000 से 6,000 रुपये में मिलता है। इस अतिरिक्त 3,000 में से 40% हिस्सा सीधे स्कूल मैनेजमेंट की जेब में जाता है।
री-एडमिशन और एनुअल चार्ज का अवैध जाल
नियमों के मुताबिक, एक बार एडमिशन होने के बाद हर साल प्रवेश शुल्क नहीं लिया जा सकता, लेकिन रीवा के 'शिक्षा माफिया' इसे डेवलपमेंट फीस या एनुअल चार्ज का नाम देकर हर साल हजारों रुपये वसूल रहे हैं। स्कूल की बिल्डिंग वही है, पंखे वही हैं, फिर हर साल कौन सा 'डेवलपमेंट' हो रहा है, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
खटारा बसें और आसमान छूता किराया
समान नाका हो या सिरमौर चौराहा, स्कूल की पीली बसें सड़कों पर दौड़ती तो हैं, लेकिन उनमें से आधी बसों के पास न तो वैलिड फिटनेस सर्टिफिकेट है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। डीजल के दाम थोड़े बढ़ते हैं, तो स्कूल किराया सीधे 500 रुपये बढ़ा देते हैं। यह बच्चों की जान से खिलवाड़ और अभिभावकों की मजबूरी का फायदा उठाना है।
आरटीई (RTE) और फायर सेफ्टी: कागजों पर सब दुरुस्त, धरातल पर शून्य
शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) के तहत 25% गरीब बच्चों को पढ़ाने के नाम पर सरकार से लाखों का अनुदान डकारा जा रहा है, लेकिन हकीकत में गरीब बच्चों को दुत्कारा जाता है। वहीं, शहर के कई स्कूल रिहायशी मकानों में चल रहे हैं, जहाँ न आग बुझाने के इंतजाम हैं और न ही बच्चों के खेलने के लिए मैदान। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
Dainik Rewa News Media की चेतावनी: अब जारी होगी सूची!
हम अपनी अगली रिपोर्ट में उन स्कूलों के नाम सार्वजनिक करेंगे जिनके खिलाफ हमें पुख्ता सबूत मिले हैं। हमारी टीम अभिभावक बनकर दुकानों और स्कूलों का स्टिंग ऑपरेशन कर रही है। यदि आपके पास भी किसी स्कूल की अवैध वसूली का प्रमाण है, तो हमसे साझा करें।