1 लाख हर महीने दो वर्ना बिल रोक दूँगा! सतना की फर्म पर कस रखा था शिकंजा, 50 हजार की पहली किश्त लेते धराया PWD का चीफ इंजीनियर

 
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रीवा लोकायुक्त पुलिस ने पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर कैलाश कुमार लच्छे और उनके दलाल को 50 हजार की रिश्वत लेते सिविल लाइन बंगले से रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विंध्य अंचल के रीवा जिले में भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए लोकायुक्त पुलिस ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) रीवा संभाग के सर्वोच्च अधिकारी यानी मुख्य अभियंता (Chief Engineer) कैलाश कुमार लच्छे को लोकायुक्त की टीम ने 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए उनके शासकीय आवास से रंगे हाथों दबोच लिया।

इस सनसनीखेज कार्रवाई की मुख्य कड़ी लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक योगेश्वर शर्मा का कुशल मार्गदर्शन और उप पुलिस अधीक्षक (DSP) प्रवीण सिंह परिहार के नेतृत्व में गठित विशेष ट्रैपिंग टीम रही। पुलिस टीम ने सिविल लाइन स्थित अटल पार्क के ठीक सामने बने मुख्य अभियंता के सरकारी बंगले की घेराबंदी की। जैसे ही योजनाबद्ध तरीके से आवेदक ने रिश्वत की राशि सौंपी, लोकायुक्त की टीम ने दबिश देकर मुख्य अभियंता और वसूली के काम में लगे उनके निजी सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया।

कमीशनखोरी का पूरा खेल: हर महीने 1 लाख रुपये की बंधी थी कटमनी
भ्रष्टाचार के इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश सतना स्थित निर्माण गुणवत्ता जांचने वाली निजी फर्म 'पीवीपी एलटीडी (PVP LTD)' के प्रबंधक सोनू सिंह की सजगता के कारण संभव हुआ। यह संस्था सरकारी एवं निजी दोनों प्रकार की निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता की तकनीकी जाँच कर प्रामाणिक रिपोर्ट जारी करती है, जिसके आधार पर ही ठेकेदारों को सरकारी खजाने से भुगतान जारी किया जाता है। शिकायतकर्ता सोनू सिंह के मुताबिक, मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे ने रीवा में पदभार ग्रहण करते ही इस टेस्टिंग लैब द्वारा जारी की जाने वाली सभी जांच रिपोर्टों के आधार पर होने वाले भुगतानों पर अघोषित रोक लगा दी थी।

जब तक चीफ इंजीनियर का कमीशन तय न हो, तब तक किसी भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता रिपोर्ट को स्वीकृत नहीं किया जा रहा था। रिपोर्ट रुकने से पूरे संभाग में ठेकेदारों के काम और भुगतान ठप पड़ने लगे थे। जब फर्म के प्रबंधक ने इस बाधा को हटाने के लिए चीफ इंजीनियर से सीधी बात की, तो उन्होंने अपनी कृपा बनाए रखने और काम सुचारू रूप से चलने देने के एवज में 1 लाख रुपये प्रति माह की निश्चित बंधी-बंधाई रिश्वत की मांग रख दी।

तंग आकर आवेदक ने 4 अगस्त को लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय में विस्तृत लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त टीम ने टेप रिकॉर्डर और अन्य माध्यमों से रिश्वत की मांग का सत्यापन कराया, जिसमें 50 हजार रुपये की अग्रिम किश्त देना तय हुआ।

विदिशा का वसूली एजेंट: भ्रष्टाचार का संगठित तंत्र
इस लोकायुक्त कार्रवाई का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि मुख्य अभियंता ने रीवा में शासकीय वेतनभोगी कर्मचारियों पर भरोसा न करते हुए अपना खुद का एक समानांतर 'वसूली नेटवर्क' बना रखा था। अवैध धन की उगाही को अंजाम देने के लिए उन्होंने अपने गृह नगर के करीब स्थित विदिशा जिले से एक निजी व्यक्ति को विशेष रूप से रीवा बुलवाकर अपने साथ बंगले पर रखा हुआ था।

इस निजी दलाल की पहचान धर्मवीर भारती (पिता: टी.पी. भारती, उम्र 59 वर्ष, निवासी- रामायणी सिटी, मेन बायपास के पास, जिला विदिशा) के रूप में हुई है। सरकारी ठेकेदारों या निजी फर्मों से सीधे पैसे लेने के बजाय चीफ इंजीनियर इसी निजी व्यक्ति के जरिए रकम लेते थे। धर्मवीर भारती केवल अवैध वसूली का काम संभालता था और इस उगाही की कुल राशि में से एक निश्चित हिस्सा कमीशन के रूप में प्राप्त करता था।

मंगलवार को जब लोकायुक्त टीम ने सिविल लाइन बंगले पर छापा मारा, तो चीफ इंजीनियर के इशारे पर धर्मवीर भारती ने ही 50,000 रुपये की रिश्वत की नकदी अपनी गोद/हाथ में स्वीकार की थी। लोकायुक्त टीम ने रासायनिक परीक्षण (फिनॉल्पथलीन टेस्ट) कराकर दोनों के हाथ धुलवाए, तो घोल का रंग गुलाबी हो गया, जिससे मौके पर ही रिश्वत लेने की पुष्टि हो गई।

कौन हैं मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे? मुख्य बातें और जब्ती ब्योरा
पीडब्ल्यूडी संभाग रीवा के शीर्ष पद पर आसीन कैलाश कुमार लच्छे (पिता: श्री हरिचरण लच्छे, उम्र 59 वर्ष) का प्रशासनिक तंत्र में काफी दबदबा माना जाता था। वे मूल रूप से न्यू मीनाल रेजीडेंसी, भोपाल (म.प्र.) के निवासी हैं और रीवा में सिविल लाइन स्थित अटल पार्क के सामने बने सरकारी बंगले में रह रहे थे।

लोकायुक्त की इस रेड के दौरान PWD के मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे और उनके विदिशा निवासी वसूली एजेंट धर्मवीर भारती (उम्र 59 वर्ष) को रंगे हाथों पकड़ा गया। आरोपी अफसर द्वारा ₹10,000,000 (1 लाख रुपये) प्रति माह के बंधे कमीशन की मांग की गई थी, जिसके तहत पहली किश्त के रूप में ₹50,000 की नकद भारतीय मुद्रा मौके से जब्त की गई।

जांच रिपोर्ट रोकने का हथकंडा और ठेकेदारों की मजबूरी
पीडब्ल्यूडी द्वारा निर्मित किए जाने वाले पुल, पुलिया, सड़कों और बहुमंजिला सरकारी भवनों की मजबूती को प्रमाणित करने का काम सतना की इस टेस्टिंग फर्म के पास था।

मुख्य अभियंता द्वारा रिपोर्टों को दबाकर बैठने के कारण स्थिति यह बन गई थी कि विकास कार्य पूरे होने के बावजूद ठेकेदारों को उनका वाजिब बिल नहीं मिल पा रहा था। सरकारी धन के प्रवाह को रोककर व्यक्तिगत तिजोरी भरने की इस नीति ने लोक निर्माण विभाग के समूचे कामकाज को ठप कर दिया था। रीवा में यह चर्चा आम है कि बिना कमीशन और अवैध चढ़ावे के इस संभागीय कार्यालय से कोई भी फाइल आगे नहीं सरकती थी।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विधिक कार्रवाई और प्रशासनिक हड़कंप
लोकायुक्त की इस बड़ी कार्रवाई के बाद समूचे रीवा संभाग और भोपाल स्थित मंत्रालय स्तर तक हड़कंप मच गया है। 
लोकायुक्त पुलिस ने मुख्य अभियंता कैलाश कुमार लच्छे और उनके विदिशा निवासी सहयोगी धर्मवीर भारती के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम 2018 (Prevention of Corruption Act) की धारा 7 एवं 12 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद लोकायुक्त टीम द्वारा दोनों आरोपियों के रीवा स्थित अस्थायी निवास तथा भोपाल स्थित मीनाल रेजीडेंसी वाले मकान पर आय से अधिक संपत्ति का सुराग लगाने हेतु तलाशी अभियानों व दस्तावेजों की छानबीन शुरू कर दी गई है। क्षेत्र के नागरिकों और निष्ठावान ठेकेदारों ने लोकायुक्त पुलिस की इस कठोर कार्रवाई का स्वागत किया है।

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