5 मिनट का नियम और 50 रुपये की लूट... रीवा रेलवे स्टेशन पर सरेआम चल रही है पार्किंग की गुंडागर्दी! प्रशासन मौन!
ऋतुराज द्विवेदी,रीवा/भोपाल। (राज्य ब्यूरो) विन्ध्य का मुख्य द्वार कहे जाने वाले रीवा रेलवे स्टेशन पर इन दिनों यात्रियों की सुविधा से ज्यादा पार्किंग ठेकेदारों के मुनाफे पर ध्यान दिया जा रहा है। स्टेशन परिसर में प्रवेश करते ही वाहन चालकों को पार्किंग माफियाओं की मनमानी का सामना करना पड़ता है। यहाँ नियम यात्रियों की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि उनकी जेब ढीली करने के लिए बनाए गए प्रतीत होते हैं। प्रशासन की चुप्पी ने इन ठेकेदारों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं।
8 मिनट की कीमत ₹50: एक भुक्तभोगी की दास्तां
हाल ही में एक मामला सामने आया जहाँ एक फोर-व्हीलर चालक अपने परिचित को स्टेशन छोड़ने गया था। मुख्य द्वार के पास उसने महज 8 मिनट के लिए गाड़ी रोकी। इतने ही समय में ठेकेदार के करिंदों ने उसे ₹50 का पर्चा थमा दिया। विरोध करने पर तर्क दिया गया कि यह 'नो-पार्किंग' शुल्क है। सवाल यह उठता है कि क्या किसी यात्री को सामान के साथ उतारने में 5-7 मिनट का समय लगना अपराध है?
नियमों का 'चक्रव्यूह': पार्किंग और जुर्माने का खेल
पार्किंग व्यवस्था को इस तरह से उलझाया गया है कि आम आदमी समझ ही न पाए कि उसे कितना भुगतान करना है। यहाँ मुख्य रूप से दो तरह के 'जाल' बिछाए गए हैं:
गो एंड ड्राफ्ट टाइम: नियमानुसार केवल 5 मिनट का समय 'फ्री' दिया जाता है। यदि सामान उतारने या भीड़ के कारण 6ठा मिनट हुआ, तो आपसे भारी शुल्क वसूला जाएगा।
नो-पार्किंग जोन का खौफ: रेलवे गेट के सामने जहां यात्री उतरते हैं, उसे नो-पार्किंग बताकर सामान्य से 2 से 4 गुना अधिक शुल्क वसूला जा रहा है।
अस्पष्ट दरें: टू-व्हीलर के लिए ₹110 और फोर-व्हीलर के लिए बेस प्राइस के साथ भारी GST और पेनल्टी जोड़कर मनमाना बिल बनाया जा रहा है।
प्रशासन की उदासीनता: 'शिकायत मिलेगी तो देखेंगे'
जब इस अंधेरगर्दी के बारे में रेलवे के आला अधिकारियों से बात की गई, तो उनका जवाब हमेशा की तरह टालमटोल वाला रहा। अधिकारियों का कहना है कि "जब तक कोई यात्री लिखित में शिकायत नहीं करता, हम कार्रवाई नहीं कर सकते।" यह रवैया दिखाता है कि प्रशासन को यात्रियों की परेशानी से ज्यादा कागजी खानापूर्ति में दिलचस्पी है। ठेकेदार इसी 'उदासीनता' का फायदा उठाकर खुलेआम अवैध वसूली कर रहे हैं।
जनता की बढ़ती नाराजगी और वित्तीय बोझ
रीवा स्टेशन पर आने वाले अधिकांश लोग मध्यम वर्गीय या ग्रामीण क्षेत्रों से होते हैं। उनके लिए ₹50 या ₹100 की अतिरिक्त वसूली एक बड़ा वित्तीय बोझ है। वाहन चालकों का आरोप है कि पार्किंग स्टाफ का व्यवहार भी बेहद अभद्र होता है। "ड्रॉप एंड गो" के नाम पर जो समय दिया गया है, वह स्टेशन की भीड़ और ट्रैफिक को देखते हुए ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
निष्कर्ष: सुधार की तत्काल आवश्यकता
रीवा रेलवे स्टेशन की पार्किंग व्यवस्था में पारदर्शिता की भारी कमी है। यदि जल्द ही दरों का स्पष्ट बोर्ड नहीं लगाया गया और 'फ्री ड्रॉपिंग टाइम' को 5 मिनट से बढ़ाकर 10-15 मिनट नहीं किया गया, तो यात्रियों का आक्रोश बढ़ना तय है। रेलवे को चाहिए कि वह ठेकेदारों पर लगाम कसे और डिजिटल भुगतान के साथ समय की सटीक ट्रैकिंग सुनिश्चित करे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. रीवा रेलवे स्टेशन पर 'फ्री ड्रॉपिंग टाइम' कितना है? उत्तर: वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, वाहन को स्टेशन परिसर में ले जाकर वापस आने के लिए केवल 5 मिनट का समय दिया जाता है। इसके बाद चार्ज लगना शुरू हो जाता है।
Q2. क्या नो-पार्किंग जोन में रुकने पर एक्स्ट्रा चार्ज देना होता है? उत्तर: हाँ, ठेकेदारों के अनुसार नो-पार्किंग जोन में गाड़ी रोकने पर सामान्य से 2 से 4 गुना तक अधिक जुर्माना वसूला जा रहा है।
Q3. पार्किंग शुल्क को लेकर शिकायत कहाँ दर्ज करें? उत्तर: आप स्टेशन मास्टर कार्यालय में लिखित शिकायत दे सकते हैं या रेलवे के 'RailMadad' पोर्टल/ऐप पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
Q4. क्या पार्किंग पर्ची पर GST देना अनिवार्य है? उत्तर: हाँ, वैध ठेकेदार GST के साथ ही बिल देते हैं, लेकिन बिल पर फर्म का नाम और रेलवे का अप्रूवल होना जरूरी है।